जब सिक्सर किंग गेल ने बॉलिंग से पलट दिया मैच, 1 रन से हार गया था भारत
क्रिस गेल दुनिया के सबसे विध्वंसक बल्लेबाजों में से एक थे। चौकों-छक्कों से वेस्टइंडीज को उन्होंने न जाने कितने मैच जिताए। लेकिन वे अच्छे ऑफ स्पिनर भी थे।
स्पोर्ट्स डेस्क, जुलाई 23: क्रिस गेल दुनिया के सबसे विध्वंसक बल्लेबाजों में से एक थे। चौकों-छक्कों से वेस्टइंडीज को उन्होंने न जाने कितने मैच जिताए। लेकिन वे अच्छे ऑफ स्पिनर भी थे। 301 वनडे में 167 विकेट लेना साबित करता है कि वे एक कुशल गेंदबाज भी थे। 2006 के एक वनडे मैच में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से मैच का रुख ऐसा पलटा था कि भारत 1 रन से हार गया था। उस मैच में ब्रायन लारा ने कमाल की कप्तानी की थी।
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2006 में खेला गया था मुकाबला
मई 2006 में जमैका की राजधानी किंग्स्टन में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा एकदिवसीय मैच खेला गया था। वेस्टइंडीज के कप्तान ब्रायन लारा थे। टीम में रामनरेश सरवन, शिवनारायण चंद्रपाल जैसे धाकड़ बल्लेबाज थे। ऑलराउंडर के रूप में गेल, ड्योन ब्रावो और मर्लिन सैमुअल्स मौजूद थे। उस समय वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजी पहले की तरह नहीं रह गयी थी। तेज गेंदबाजी का भार फिडेल एडवर्ड, इयान ब्रेडशॉ, जिरोम टेलर पर था। इनका एम्ब्रोज, वाल्श जैसा नाम न था। लेकिन कप्तान ब्रायन लारा ने अपनी गेंदबाजी विकल्पों का इतना बेहतरीन इस्तेमाल किया कि वेस्टइंडीज की मैच पर पकड़ बनी रही। इन्हीं गेंदबाजों के दम पर लारा ने 198 जैसे छोटे स्कोर की रक्षा कर ली। भारत के कप्तान राहुल द्रविड़ थे। टीम में वीरेन्द्र सहवाग, युवराज सिंह, महेन्द्र सिंह धोनी, सुरेश रैना, मोहम्मद कैफ जैसे नामी बल्लेबाज थे। लेकिन इसके बाद भी भारत 1 रन से ये मैच हार गया था।

भारत की कसी गेंदबाजी, वेस्टइंडीज के 198 रन
पहले वेस्टइंडीज ने बैटिंग की। अजीत अगरकर ने तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल को जीरो पर बोल्ड कर वेस्टइंडीज के खेमे में खलबली मचा दी। इसके बाद भारतीय गेंदबाज इस कदर हावी हो गये कि वेस्टइंडीज के बल्लेबाज दबाव में आ गये। सिर्फ रामनरेश सरवन ने 98 रन बनाये। उनको छोड़ कर कोई दूसरा बल्लेबाज नहीं चला। ब्रायन लारा 14, चंद्रपाल 10, सेमुअल्स 19, ब्रावो 0 पर आउट हुए। वेस्टइंडीज 50 ओवरों में सिर्फ 198 रन बना सकी। सबसे सफल गेंदबाज इरफान पठान रहे। उन्होंने 9 ओवर में 45 रन दे कर तीन विकेट लिये। अजीत अगरकर ने 10 ओवर में दो मेडन रखते हुए 25 रन दिये और 2 विकेट लिये। रमेश पोवार को 2 विकेट मिले। हरभजन सिंह और युवराज सिंह को एक-एक विकेट मिला।

भारत की बैटिंग लड़खड़ाई
भारत को जीत के लिए 199 रन बनाने थे। सहवाग, युवराज, रैना और धोनी के रहते ये लक्ष्य बहुत आसान लग रहा था। लेकिन उस दिन लारा और उनके गेंदबाजों ने तय कर रखा था कि हर हाल में इस छोटे स्कोर की रक्षा करनी है। कप्तान द्रविड़ सहवाग के साथ ओपनिंग के लिए उतरे। लेकिन जब टीम का स्कोर 25 रन था तब सहवाग 12 रन बना कर आउट हो गये। उन्हें ब्रेडशॉ ने शिकार बनाया। 51 रन बनत-बनते द्रविड़ और इरफान पठान भी चलते बने। इरफान वन डाउन खेलने आये थे। लेकिन ये प्रयोग असफल रहा। इरफान ने 14 और द्रविड़ ने 11 रन बनाये। 51 रन पर तीन विकेट गिर चुके थे।
तब भारत की तरफ से युवराज सिंह ने मोर्चा संभाला। भारत को सुरेश रैना से बहुत आशा थी। वे दबाव में अच्छा खेलते थे। लेकिन उस दिन रैना भी नहीं चले और 27 रन ही बना सके। रैना पांचवें विकेट के रूप में आउट हुए तब भारत का स्कोर था 124 रन। युवराज का साथ देने के लिए धोनी मैदान पर उतरे। उन दिनों धोनी हार्ड हिटर बैट्समैन के रूप में मशहूर थे। भारतीय क्रिकेट प्रशंसक यही समझ रहे थे कि अब युवराज- धोनी की जोड़ी भारत को जीत दिला कर ही लौटेगी। उस समय करीब 14.4 ओवर में 75 रन बनाने थे।

ब्रायन लारा का दांव
लेकिन भारत की उम्मीदों को तब झटका लगा जब जिरोम टेलर ने धोनी को सिर्फ 2 रन पर बोल्ड कर दिया। जिस एडवर्ड, ब्रेडशॉ और टेलर को साधारण तेज गेंदबाज माना जा रहा था उन्होंने भारतीय बल्लेबाजी को तहस नहस कर दिया। 134 पर भारत के 7 विकेट गिर चुके थे। मैच भारत के हाथ से फिसल रहा था। उम्मीद की एक आखिरी किरण युवराज सिंह थे। वे 50 रन बना अभी तक जमे हुए थे। इस मैच में लारा ने एक जबर्दस्त दांव खेला था। आम तौर पर क्रिस गेल वनडे मैचों में दस ओवर का कोटा नहीं करते थे। उनका इस्तेमाल साझेदारी तोड़ने के लिए पार्टटाइम बॉलर के रूप में होता था। इस मैच में गेल 0 पर आउट हो गये थे। लेकिन लारा ने गेंदबाजी में उनको तुरुप का पत्ता बनाया।

कैसे पलटा मुकाबला
गेल और सैमुअल्स ने न केवल 10 ओवर बॉलिंग की बल्कि इनका इस्तेमाल डेथ ओवरों में किया गया। तेज गेंदबाजी के लिए विख्यात वेस्टइंडीज टीम का यह चौंकाने वाला फैसला था। समुअल्स पारी का 47वां ओवर फेंकने के लिए आये। सैमुअल्स ने इस ओवर में सिर्फ 2 रन दिये और रमेश पोवार का विकेट भी लिया। भारत का स्कोर था 8 विकेट पर 178 रन। भारत को 3 ओवर में जीत के लिए चाहिए थे 21 रन और वेस्टइंडीज को जीत के लिए चाहिए थे दो विकेट। 48वें ओवर का खेल शुरु हुआ। ब्रावो बॉलिंग के लिए आये। युवराज 79 पर खेल रहे थे। हरभजन सिंह को खाता खोलना था। इस ओवर में 9 रन बने। हरभजन एक और युवराज 85 पर पहुंचे। अब भारत को दो ओवर में 12 रन बनाने थे। वेस्टइंडीज को 2 विकेट की तलाश थी।

गेल का कमाल
मैच रोमांचक दौर में दाखिल हो चुका था। कोई टीम जीत सकती थी। युवराज सिंह की क्षमता से सभी वाकिफ थे। इस चुनौतीपूर्ण समय में ब्रायन लारा ने ऐसा फैसला लिया कि सभी चौंक गये। उन्होंने गेल को 49वां ओवर फेंकने के लिए बुलाया। गेल ने पहली ही गेंद पर हरभजन सिंह को आउट कर कप्तान के फैसले को सच साबित किया। युवराज का साथ देने के लिए मुनाफ पटेल आये। मुनाफ गेल की तीन गेंदों पर कोई रन नहीं बना सके। पांचवीं गेद पर मुनाफ ने एक रन लिया। आखिरी गेंद पर युवराज कोई रन नहीं बना सके। गेल का 49वां ओवर मैच का टर्निंग प्वाइंट रहा। इस ओवर में सिर्फ 1 रन बना और एक विकेट भी गिरा। इसके कारण 50वें ओवर में भारत पर दबाव बढ़ गया।

फिर ब्रावो ने दिखाया दम
अब भारत को अंतिम ओवर में 11 रन चाहिए थे और हाथ में विकेट था सिर्फ एक। ड्योन ब्रावो को आखिरी ओवर फेंकने के लिए बुलाया गया। उन्हें शुरू से डेथ ओवरों का स्पेशलिस्ट गेंदबाज माना जाता था। बाद में ब्रावो ने चेन्नई सुरकिंग्स के लिए ये भूमिका निभायी। 50वें ओवर की पहली गेंद पर मुनफ ने एक रन लेकर स्ट्राइक युवराज को दे दी। युवराज ने दूसरी और तीसरी गेंद पर लगातार दो चौके लगा कर मैच भारत की तरफ मोड़ दिया। वे 93 रन पर पहुंच गये थे। जीत के लिए अब सिर्फ 2 रन चाहिए थे। बराबर करने के लिए 1 रन चाहिए था। लेकिन पांचवीं गेंद पर ब्रावो ने युवराज को बोल्ड कर वेस्टइंडीज को 1 रन से जीत दिला दी। अगर गेल के 49वें ओवर में चार- पांच रन भी बन गये होते तो भारत ये मैच जीत जाता। लेकिन गेल ने उस दिन बॉलिंग में कमाल कर दिया था। 10 ओवरों में सिर्फ 33 रन देकर एक विकेट लिया था।












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