BCCI में आखिर क्या चल रहा है ? क्या रोहित, विराट के टी-20 करियर का अब अंत हो गया ?

क्या, रोहित शर्मा, विराट कोहली के टी-20 करियर का अंत हो गया है ? क्या इसी योजना के तहत रोहित और विराट का चयन टी-20 टीम में नहीं किया गया है ? बीसीसीआइ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रोहित शर्मा, विराट कोहली, रविचंद्रन अश्विन, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद समी और दिनेश कार्तिक को स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि अब वे टी-20 विश्वकप योजना का हिस्सा नहीं हैं। बढ़ती उम्र की वजह से अब इनके नाम पर विचार नहीं किया जाएगा। अभी ही वह समय है जब 2024 विश्वकप के लिए तैयारी शुरू कर दी जाय। चर्चा के मुताबिक वरिष्ठ खिलाड़ियों के नाम पर तलवार चलाने की जिम्मेदारी चेतन शर्मा को दी गयी। बीसीसीआइ ने एक तरह से उनका इस्तेमाल किया। टी-20 विश्वकप में भारत की हार के बाद चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समिति को अपमानजनक तरीके से बर्खास्त कर दिया गया था। लेकिन अब बीसीसीआइ ने अपने हित के लिए इस समिति को अथाह ताकत दे दी। जनवरी में नयी चयन समिति का गठन हो जाएगा। लेकिन उससे पहले बिल्ली के गले में घंटी बांधने की जिम्मेदारी चेतन शर्मा को दे दी गयी। ताकि जब नयी चयन समिति काम करे तो उस पर वरिष्ठ खिलाड़ियों को 'ड्रॉप’ का आरोप नहीं लगे।
टी-20 में अब विराट, रोहित के चुने जाने की गारंटी नहीं !
बीसीसीआइ सूत्रों के मुताबिक रोहित और कोहली को टी-20 के लिए सीधे-सीधे मना नहीं किया गया है। उनसे कहा गया है कि वे 2024 की योजना में शामिल तो रहेंगे लेकिन हमेशा टीम में चुने जाने की गारंटी नहीं रहेगी। उनके फॉर्म और मैच की परिस्थितियों के पर ही उनका चयन निर्भर करेगा। अगला टी-20 विश्वकप 2024 में होना है। तब तक विराट, रोहित और अश्विन करीब 37 साल के हो जाएंगे। बीसीसीआइ इतनी उम्र के खिलाड़ियों को टी-20 टीम के लिए उपयुक्त नहीं मानती। भारतीय क्रिकेट में पहली बार इतने वरिष्ठ खिलाड़ियों को इतना कड़ा संदेश दिया गया है। बीसीसीआइ ने चेतन शर्मा के कंधे पर बंदूक रख कर यह गोली चलायी है।
बोर्ड का प्रभुत्वशाली समूह
बीसीसीआइ में हमेशा से कुछ प्रभुत्वशाली समूह रहा है। बोर्ड अध्यक्ष की वोटिंग प्रक्रिया से लेकर अहम फैसलों में इनका दखल रहता है। कहा जाता है कि एन श्रीनिवासन के कारण ही सौरव गांगुली को बीसीसीआइ अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था। इसी तरह जब ग्यारह साल पहले सचिन तेंदुलकर, वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गंभीर को टीम से हटाना था तो महेन्द्र सिंह धोनी के कंधे का इस्तेमाल किया गया था। तब धोनी ने उन तीनों को सुस्त खिलाड़ी कहा था। धोनी इन तीनों खिलाड़ियों को एक साथ टीम में रखने के खिलाफ थे। इसके लिए उन्होंने रोटेशन पॉलिसी शुरू की थी। जिसके आधार पर सचिन, सहवाग और गंभीर को अलग-अलग मैच में टीम से बाहर रखा गया। फिर धीरे-धीरे टीम से इनका पत्ता साफ हो गया। क्या रोहित और विराट के साथ यही होने वाला है ?
चेतन शर्मा वाली समिति के कड़े फैसले
तो क्या रोहित चोट के कारण नहीं बल्कि कड़े फैसले के कारण टी-20 टीम से बाहर हैं ? टी-20 विश्वकप में भारत की हार के बाद रोहित शर्मा पर तलवार लटक गयी थी। कप्तान के रूप में उनकी जीत का प्रतिशत भले अच्छा था लेकिन वे रन नहीं बना पा रहे थे। चेतन शर्मा वाली चयन समिति ने जाते जाते एक तरह से कत्लेआम मचा दिया। ऋषभ पंत को टी-20 और वनडे से बाहर कर दिया गया। शिखर धवन की वनडे टीम से छुट्टी हो गयी। भुवनेश्वर को भी सीमित ओवर क्रिकेट से बाहर कर दिया गया। रनों के लिए जूझ रहे केएल राहुल को टी-20 टीम में नहीं रखा गया है। यहां तक कि उन्हें वनडे टीम की उपकप्तानी से भी हटा दिया गया। उनकी जगह सूर्य कुमार यादव को उपकप्तान बनाया गया है। यानी बीसीसीआइ ने कठोर फैसलों से टीम इंडिया के खिलाड़ियों को संदेश दे दिया है, या तो परफॉर्म कीजिए या फिर जगह खाली कीजिए। टीम इंडिया को कुनैन की यह गोली खिलायी है चेतन शर्मा ने।
सौ फीसदी फिट नहीं तो टीम में भी नहीं
इतना ही नहीं चोट से उबर रहे खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर सख्त रवैया अख्तियार किया गया है। जसप्रीत बुमराह, रवीन्द्र जडेजा और दीपक चाहर को बता दिया गया है कि जब तक वे सौ फीसदी फिट नहीं हो जाते, टीम में उनकी वापसी संभव नहीं है। अब सवाल ये है कि जिस चयन समिति को नकारा मान कर बर्खास्त किया गया था उसको इतने कठोर फैसले का अधिकार कैसे मिल गया ? वह भी चला-चली की बेला में। बीसीसीआइ के नये अध्यक्ष रोजर बिन्नी को कुर्सी संभाले कुछ ही महीने हुए हैं। नयी नवेली क्रिकेट सलाहकार समिति भी गठित हो गयी है। जनवरी 2023 में नयी चयन समिति भी गठित होने वाली है। इन बदलावों के लिए कुछ दिन और इंतजार किया जा सकता था। ऐसी क्या जल्दी थी कि सब कुछ चेतन शर्मा वाली समिति के हाथों आनन-फानन में निबटा दिया गया ? इसकी टाइमिंग को लेकर ही बीसीसीआइ की निष्पक्षता पर सवाल उठाया जा रहा है। चर्चा है कि चेतन शर्मा को नयी चयन समिति में रखा जा सकता है। तो क्या भारतीय क्रिकेट बहुत बड़े बदलाव के मोड़ पर खड़ा है ? या फिर यह परिदृश्य रिमोट वाले 'श्री-मान’ की मर्जी का नतीजा है ?












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