IND vs NZ: टीवी देखकर भी फैसला नहीं दे सकते तो अंपायरिंग का क्या फायदा? संन्यास लेकर घर बैठो

IND vs NZ: न्यूजीलैंड के खिलाफ मुंबई टेस्ट मैच में खराब अंपायरिंग भी एक हार का बड़ा कारण रही है। भारतीय टीम की खराब बैटिंग की वजह से अंपायरिंग को लेकर बात नहीं हो रही। ऋषभ पंत को दूसरी पारी में दिया गया आउट एक बड़ा उदाहरण है। पंत अगर उस समय क्रीज पर होते तो टीम इंडिया मैच नहीं हारती।

बैट और पैड कैच की अपील के बाद मैदानी अंपायर ने कीवी फील्डरों की अपील खारिज का दी थी लेकिन जब मामला रिव्यू के लिए गया था टीवी अंपायर ने इसे बदलकर पंत को पवेलियन जाने का फरमान सुना दिया। यहाँ टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा क्योंकि टीवी अंपायर ने गलती की थी।

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घटना तीसरे दिन के दूसरे सेशन में हुई जब पंत फिफ्टी जड़कर 64 रन पर खेल रहे थे। उनके साथ वॉशिंगटन सुंदर खड़े थे और टीम इंडिया जीत की तरफ बढ़ रही थी। इस बीच एजाज पटेल की गेंद पर बैट-पैड की अपील हुई और मैदानी अंपायर ने नॉट आउट का फैसला दिया।

टीवी अम्पायर पॉल रेफेल ने पंत को आउट दिया। रिप्ले में दिख रहा था कि बल्ला पैड से लगा, तो स्निक दिखा। इसे अंपायर ने बल्ले से लगा हुआ किनारा माना। रिप्ले में देखने से पता चल रहा था कि कोई साफ़ एविडेंस नहीं था कि गेंद बल्ले से लगकर कैच हुई है लेकिन टीवी अंपायर ने पंत को आउट दे दिया।

रेफेल के पास जब कन्क्लूजिव एविडेंस नहीं था तो पंत को आउट किस आधार पर दे दिया। क्लीयर एविडेंस होने पर ही मैदानी अंपायर का फैसला बदला जा सकता है। पॉल रेफेल ने अगर टीवी में देखकर फैसला दिया है, तो यह बहुत ही घटिया अंपायरिंग की जाएगी क्योंकि इस एक फैसले से भारत को हार का सामना करना पड़ा है।

अगर टीवी पर देखकर भी ऐसे फैसले देने पड़ते हैं, तो अंपायरिंग छोड़कर घर बैठना चाहिए और परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान देना चाहिए। पॉल रेफेल के इस घटिया फैसले की जितनी आलोचना की जाए, तो कम है।

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