AUS vs PAK: जूते पर लगी रोक तो, बांह पर बांध ली काली पट्टी, जानें उस्मान ख्वाजा को लेकर क्यों मचा है बवाल?
AUS vs PAK 1st Test: ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने पर्थ में ट्रेनिंग सेशन के दौरान अपने जूतों के कारण सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था, जिस पर गाजा पट्टी में चल रहे इजरायल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीन पीड़ितों के समर्थन का संदेश लिखा था, लेकिन जब बल्लेबाज को खास संदेश वाले जूते पहनने की अनुमति नहीं मिली तो उन्होंने टेस्ट के पहले दिन बांह पर काली पट्टी बांधकर मैच खेला।
दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बुधवार को इस मामले में तब हस्तक्षेप किया जब ख्वाजा ने संकेत दिया कि उन्होंने मैच के दौरान जूते पहनने की योजना बनाई है, जिसमें इजराइल-हमास युद्ध में निर्दोष लोगों का समर्थन करने वाला संदेश लिखा था।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए आईसीसी की नीतियां टीम की ड्रेस या क्रिकेट गैजेट्स पर राजनीतिक या धार्मिक बयानों के प्रदर्शन पर रोक लगाती हैं। ख्वाजा ने कहा कि वह व्यक्तिगत या टीम प्रतिबंधों से बचने के लिए फैसले का पालन करेंगे, लेकिन आईसीसी के रुख को चुनौती देंगे।
ख्वाजा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, 'स्वतंत्रता एक मानव अधिकार है और सभी के लिए समान अधिकार हैं।' 'मैं उस पर विश्वास करना कभी बंद नहीं करूंगा।'
पांच दिवसीय सीरीज के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, जहां ख्वाजा और उनके साथी ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर पिच पर पहुंचे। दरअसल, ख्वाजा पाकिस्तान में पैदा हुए हैं और ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले मुस्लिम हैं, सीरीज के पहले टेस्ट मैच में उन्होंने गाजा में पीड़ित लोगों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए काली पट्टी पहनी थी।
ख्वाजा ने कहा कि उन्होंने अपने जूतों पर जो लिखा है वह राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा कि, 'मैं किसी का पक्ष नहीं ले रहा हूं। ख्वाजा ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें लिखा कि, 'मेरे लिए मानव जीवन बराबर है। मैं सिर्फ उन लोगों के लिए बोल रहा हूं जिनके पास आवाज नहीं है। यह मेरे दिल के करीब है।'
उस्मान ख्वाजा ने 30वें ओवर में शाहीन शाह अफरीदी की गेंद पर कैच आउट होने से पहले वार्नर के साथ 126 रन की शुरुआती साझेदारी की, जिसमें उन्होंने 41 रन बनाए, इसके उन्हें वापस पवेलियन लौटना पड़ा।
वहीं इस मामले पर कप्तान पैट कमिंस ने कहा कि, 'जूतों पर लिखा था- सभी का जीवन समान है, मैं इसका समर्थन करता हूं।' 'यह बहुत विभाजनकारी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि किसी को वास्तव में इसके बारे में बहुत अधिक शिकायतें हो सकती हैं।'












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