T20 World Cup 2024 final: वो फाइनल मैच जिसे लोग भूल नहीं पाएंगे, क्रिकेट के इतिहास का सबसे रोमांचक मुकाबला
T20 World Cup 2024 Champion Team India: भारतीय क्रिकेट पिछले कुछ समय से अपने शीर्ष पर है। 2023 में जिस तरह से भारतीय टीम ने प्रदर्शन किया, उसे देखते हुए हर कोई यह सुनिश्चित मान रहा था कि इस बार भारत ही विश्वकप की ट्रॉफी उठाने जा रहा है।
वनडे विश्वकप के फाइनल मुकाबले तक भारत अविजित रहा था, लेकिन फाइनल मुकाबले में हार के साथ करोड़ों भारतीय क्रिकेट फैंस के साथ पूरी टीम इंडिया का दिल टूट गया था। क्रिकेट की जो समझ रखते हैं उन्हें पता है कि 2023 विश्वकप की भारतीय टीम अबतक की सर्वश्रेष्ठ टीम थी, ऐसे में अगर यह टीम विश्वकप नहीं जीतती है तो फिर इस ट्रॉफी का इंतजार काफी लंबा हो सकता है।

लेकिन कहते हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। वनडे विश्वकप के फाइनल में मिली निराशा के बाद भारतीय टीम ने 29 जून 2024 को ऐतिहासिक बना दिया। एक बार फिर से कप्तान रोहित शर्मा की अगुवाई में भारतीय टीम मैदान में उतरी और इस बार भारत ने विश्वकप में हर बड़ी टीम को धूल चटाते हुए विश्वकप की ट्रॉफी को अपने नाम किया।
विराट कुछ ठानकर आए थे
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल मुकाबले की बात करें तो टॉस जीतकर जब रोहित शर्मा ने पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया तो रोहित शर्मा और विराट कोहली पारी की शुरुआत करने उतरे। विराट कोहली इस पूरे विश्वकप में खराब फॉर्म से गुजर रहे थे। लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में रोहित शर्मा ने कहा था कि विराट फाइनल मुकाबले के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ बचाकर रख रहे हैं।
बल्लेबाजी की शुरुआत से पहले विराट कोहली मैदान पिच के पास घुटने मोड़कर बैठे नजर जाएं, उनकी आंखें बंद थी और शायद वह खुद से बात करते हुए यही कह रहे थे कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी पारी होनी चाहिए।
कोहली ने साफ कर दिए थे तेवर
इसके बाद जब विराट ने पहली गेंद का सामना किया तो उसे बाउंड्री के पार कर दिया। अगली गेंद को भी कोहली ने चौके में तब्दील किया। पहले ओवर की आखिरी गेंद को भी कोहली ने चौके से समाप्त किया। ऐसे में कोहली ने साफ कर दिया था कि वह किस इरादे के साथ यह फाइनल मुकाबला खेलने आए हैं।
लगातार 3 विकेट ने बढ़ाई टीम इंडिया की मुश्किल
लेकिन अगले ही ओवर में इन फॉर्म कप्तान रोहित शर्मा लगातार दो चौके लगाकर केशव महाराज की गेंद पर आउट हो गए। रोहित के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने आए ऋषभ पंत खाता खोले बिना आउट हो गए।
दूसरे छोर पर खड़े विराट कोहली यह सब देख रहे थे। लगातार दो विकेट गिरने के बाद सूर्यकुमार भी पांचवे ओवर में अपना विकेट गंवा बैठे, इस वक्त भारत का स्कोर 4.3 ओवर में 34/3 था।
मुश्किल में अक्षर ने टीम को संभाला
ऐसे मुश्किल समय में बल्लेबाजी के लिए अक्षर पटेल मैदान पर आए और उन्होंने विराट कोहली के साथ लड़खड़ाती पारी को संभाला। यह ऐसा वक्त था जब भारतीय टीम जबरदस्त दबाव में थी, करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं।
लेकिन बापू और कोहली कुछ और ही सोचकर आए थे। एक तरफ कोहली ने अपने विकेट को बचाते हुए सधी हुई बल्लेबाजी की तो दूसरी तरफ अक्षर पटेल भारत के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद कर रहे थे।
अक्षर के साथ मिलकर विराट ने टीम की पारी को 100 के पार पहुंचाया। लेकिन इसी वक्त बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अक्षर पटेल 47 रन के स्कोर पर रन आउट हो गए। क्विंटन डी कॉक के जबरदस्त डायरेक्ट हिट के चलते अक्षर की शानदार पारी समाप्त हो गई।
अक्षर ने 31 गेंदों पर 47 रनों की पारी खेली, इस दौरान उन्होंने 4 छक्के और 1 चौका लगाया। इस वक्त भारत का स्कोर 13.3 ओवर के बाद 106/4 था अक्षर के आउट होने के बाद भारत के सामने स्कोरबोर्ड को तेज करने की चुनौती थी।
शिवम दुबे की छोटी, मगर तेज पारी
इस वक्त शिवम दुबे बल्लेबाजी के लिए आए, उन्होंने 16 गेंदों पर 27 रनों की तेज पारी खेली, इस दौरान 1 छक्का और 3 चौका लगाकर टीम के स्कोर को बढ़ाने का काम किया। लेकिन फिर वह नॉर्किया का शिकार होकर पवेलियन लौट गए।
कोहली ने लगया टॉप गियर
वहीं दूसरे छोर पर विराट कोहली ने भी 48 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। 15 ओवर के बाद भारत का स्कोर 118/4 था। जिसके बाद भारत ने स्कोर बोर्ड को तेजी चलाना शुरू किया।
शिवम दुबे की तेज पारी के साथ विराट कोहली ने भी अपने हाथ खोले। कोहली ने अर्धशतक के बाद सिर्फ 11 गेंदों का सामना करते हुए 26 रन बनाएं और टीम के स्कोर को 176 रन तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।
दूसरी पारी का रोमांच
भारत ने टी-20 विश्वकप के फाइनल मुकाबले में अबतक का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। 177 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम शुरुआत अच्छी नहीं हुई, जसप्रीत बुमरा ने सलामी बल्लेबाज रीजा हेनरीक को 4 रन के स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया।
12 रन के स्कोर पर दक्षिण अफ्रीका का दूसरा विकेट कप्तान एडन मारक्रम के रूप में गिरा और वह भी 4 रन बनाकर अर्शदीप सिंह की गेंद पर आउट हो गए। 12 रन के स्कोर पर दक्षिण अफ्रीका के दो विकेट गिरने के बाद मानों लग रहा था कि यह मैच भारत के शिकंजे में आ रहा है।
स्टब्स-डीकॉक ने बढ़ाई टीम इंडिया की धड़कनें
क्विंटन डी कॉक और ट्रिस्टन स्टब्स अलग ही मूड में थे। दोनों ने तेजी से रन बनाना शुरू किया। 8.4 ओवर में दोनों ने टीम के स्कोर पर 70 पहुंचा दिया। लेकिन इस अहम पड़ाव पर अक्षर पटेल 'बापू' ने स्टब्स को क्लीन बोल्ड करके टीम इंडिया की वापसी कराई।
मैच में दक्षिण अफ्रीका की पकड़ इस विकेट के गिरने के बाद भी मजबूत लग रही थी। ऐसे समय में बल्लेबाजी करने के लिए विस्फोटक बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन मैदान में आए और उन्होंने एक-एक करके भारतीय गेंदबाजों की क्लास लगाना शुरू कर दिया।
डी कॉक के विकेट से जगी उम्मीद
वह कुछ अलग ही मूड में मैदान में आए थे। उन्होंने हर गेंदबाज को छक्का-चौका बहुत ही आसानी से लगाना शुरू कर दिया। महज 12 ओवर में दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 101 पर पहुंच गया। ऐसे मुश्किल समय में अर्शदीप सिंह ने क्विंटन डी कॉक को 39 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजकर भारतीय टीम की उम्मीदों को जिंदा रखा।
क्लासेन का तूफान
हेनरिक क्लासेन ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से भारतीय टीम की उम्मीदों पर पानी फेरने का मन बना लिया था। जिस तरह से वह मैदान के हर तरफ छक्के-चौके लगा रहे थे, उसे देखकर भारतीय क्रिकेट फैंसने अपनी उम्मीदें इस मैच में छोड़ दी थीं, लोगों को 2023 के वनडे विश्वकप का फाइनल याद आने लगा।
निराशा में टीम इंडिया, जसप्रीत बुमरा ने संभाली कमान
इस वक्त दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 15 ओवर में 147-4 था। क्लासेन 22 गेंद पर 49 और डेविड मिलर 7 गेंद पर 14 रन बनाकर खेल रहे थे। दक्षिण अफ्रीका की टीम को 30 गेंदों पर 30 रन चाहिए थे। मैच के इस पड़ाव पर कप्तान रोहित ने अपने सबसे भरोसेमंद गेंदबाज जसप्रीत को गेंद थमाई। 16वें ओवर में बुमरा ने सिर्फ 4 रन दिए।
टीम इंडिया के कंधे जरूर नजर आ रहे थे लेकिन रोहित शर्मा की टीम ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। कप्तान रोहित शर्मा ने हौसला नहीं छोड़ा और उनके हौसले के नई उड़ान देने का काम सूर्यकुमार यादव के अद्भुत कैच ने दिया।
24 गेंद 26 रन की दरकार, हार्दिक का चला जादू
एक वक्त जब 16 ओवर में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने 151 रन जड़ दिए तो अफ्रीकी टीम को 24 गेंदों पर सिर्फ 26 रनों की दरकार थी, हर तरफ मायूसी और निराशा छा रही थी। लेकिन इस हार्दिक पांड्या ने गेंद संभाली और क्लासेन को विकेट के पीछे पंत के हाथ कैच आउट करा दिया। क्लासेन ने 27 गेंदों पर 52 रन बनाएं, इस दौरान 5 छक्के और 2 चौके जड़े।
इस कैच के साथ ही भारतीय टीम ने मैच में वापसी की उम्मीद को जगा दिया। पूरी टीम फिर से नई उत्तेजना के साथ भर गई। लेकिन अभी भी भारत के सामने किलर-मिलर का खतरा बरकरार था। हार्दिक ने 17वें ओवर में सिर्फ 4 रन दिए और घातक क्लासेन को आउट किया।
बुमरा के सामने बेबस प्रोटीस
जसप्रीत बुमरा ने एक बार फिर से गेंद थामी और 18वें ओवर में गेंदबाजी करने के लिए आए। इस ओवर में बुमरा ने सिर्फ 2 रन दिए और यैंसेन को विकेट अपने नाम किया। लेकिन इसके साथ ही बुमरा के 4 ओवर खत्म हो गए, उन्होंने 4 ओवर में 16 रन देकर 3 विकेट अपने नाम किए थे।
किलर-मिलर का खतरा
भारतीय टीम 18वें ओवर तक मैच में वापसी कर चुकी थी, लेकिन दूसरे छोर पर मिलर की चुनौती अब भी बरकरार थी। ऐसे समय में गेंदबाजी करने के लिए अर्शदीप सिंह आए। अर्शदीप ने बेहद किफायती गेंदबाजी करते हुए 19वें ओवर में सिर्फ 4 रन दिए और दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 161/6 था । यानि दक्षिण अफ्रीका को आखिरी ओवर में 16 रनों की दरकार थी।
आखिरी ओवर का रोमांच
मैच का आखिरी ओवर हार्दिक पांड्या लेकर आए। इस वक्त तक कप्तान रोहित के पास और कोई विकल्प नहीं था। अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमरा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव के 4-4 ओवर का कोटा समाप्त हो चुका था। ऐसे में मुश्किल घड़ी में गेंद हार्दिक के हाथ आई। पूरे देश की निगाहें उनके ऊपर थी।
भारत को विश्व चैंपियन बनने के लिए आखिरी ओवर में 16 रन बचाने थे। ऐसे मुश्किल हालात में हार्दिक पांड्या ने पहली ही गेंद पर डेविड मिलर को पवेलियन पहुंचा दिया। लेकिन इस विकेट का पूरा श्रेय सूर्यकुमार यादव को जाना चाहिए।
सूर्या का जादूई कैच
सूर्या ने बाउंड्री पार जाकर जिस जबरदस्त अंदाज में मिलर का कैच पकड़ा, वो शायद भारतीय क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल पाएंगे। सूर्या ने मिलर का सिर्फ कैच नहीं पकड़ा था, उन्होंने विश्वकप की ट्रॉफी भी पकड़ ली थी।
हार्दिक पांड्या का करिश्मा
दक्षिण अफ्रीका की टीम को अब 5 गेंद पर 16 रनों की दरकार थी। ऐसे में अगली ही गेंद पर रबाडा ने चौका जड़ दिया। जिसके बाद अगली दो गेंदों पर 1-1 रन लेग बाई के रूप में आए। अब दक्षिण अफ्रीका की टीम को 2 गेंद पर 10 रन चाहिए थे। लेकिन अगली गेंद पांड्या ने वाइड डाल दी।
यानि अब दक्षिण अफ्रीका की 2 गेंद पर जीत के लिए 9 रन चाहिए थे। हार्दिक ने पांचवी गेंद पर रबाडा को पवेलियन भेज दिया और इस विकेट के साथ ही भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया। भावुक आंखों के साथ हार्दिक ने आखिरी गेंद डाली और सिर्फ एक रन दिया। इसी के साथ ही भारत ने 11 साल से आईसीसी ट्रॉफी के सूखे को समाप्त कर दिया।
जीत के बाद भावुक पल
रोहित शर्मा आखिरी गेंद के साथ ही मैदान में लेट गए, फूट-फूटकर खुशी के मारे रोने लगे और मैदान पर हाथ पटकने लगे, जो दर्शाता है कि रोहित के लिए इस ट्रॉफी के क्या मायने हैं।
वहीं हार्दिक पांड्या की आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी, कोच राहुल द्रविड़ सबकुछ छोड़कर दोनों हाथ हवा में उछालने लगे और अलग ही अंदाज में खुशी मनाने लगे। विराट कोहली भी खुद को रोक नहीं सके और इसके साथ ही पूरी टीम भावुक एक साथ एकजुट होकर खुशी का इजहार करने लगी।












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