काउंटी और टेस्ट में फर्क है बड़ा, रनों का अंबार लगा दिया, गावस्कर ने बताया क्या पुजारा की वापसी होगी
नई दिल्ली, 13 मई: इंग्लैंड के सुहाने मौसम में गेंदबाजों की स्विंग का सामना करते हुए चेतेश्वर पुजारा ससेक्स के लिए काउंटी चैंपियनशिप खेल रहे हैं। अंग्रेज धरती पर बैटिंग करना किसी भी बल्लेबाज का टेस्ट हो सकता है क्योंकि वहां पर मैदानी परिस्थितियां नई गेंद से तेज गेंदबाजों के अनुकूल होती है और बल्लेबाज को स्विंग के साथ तालमेल बैठाना पड़ सकता है। भारत के चेतेश्वर पुजारा अपनी खराब फॉर्म को वापस ढूंढने के लिए इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने गए क्योंकि उनको राष्ट्रीय टीम से पहले ही बाहर किया हुआ है और चल रहे मौजूदा आईपीएल में भी उनको किसी ने नहीं लिया है।

काउंटी चैंपियनशिप में पुजारा का कमाल
पुजारा इसके बदले काउंटी चैंपियनशिप में चले गए और वहां पर विपक्षी गेंदबाजों की ऐसी धुनाई की कि एक के बाद एक शतक किसी बच्चों की खेल की तरह लगते गए। पुजारा को देखकर लगा कि मानो दुनिया में क्रिकेट से आसान कोई भी चीज नहीं है और शतक लगाना तो बाएं हाथ का खेल होता है। पुजारा की फॉर्म को देखकर लोगों को यकीन है कि अब उनको भारतीय टेस्ट टीम में आने से कोई नहीं रोक सकता और पुजारा फिर से रनों के अंबार खड़े कर देंगे जिसके लिए उनको पहचान मिली थी।

चेतेश्वर पुजारा पहले की तरह बेजोड़ बल्लेबाज हो चुके हैं?
पुजारा इस सीजन में ही 4 मुकाबले खेलते हुए 143.4 दिनों की औसत से 717 रन बना चुके हैं और इस दौरान वे चार शतक भी लगा चुके हैं। उन्होंने दो दोहरे शतक भी लगाए हैं।
इस दौरान पाकिस्तान के सनसनीखेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी का भी बखूबी सामना किया। तो क्या यह मान लिया जाए कि चेतेश्वर पुजारा पहले की तरह बेजोड़ बल्लेबाज हो चुके हैं? आइए देखते हैं इस पर सुनील गावस्कर का क्या कहना है।

सुनील गावस्कर का पुजारा की वापसी पर क्या है कहना
गावस्कर ने स्पोर्ट्स तक एक इंटरव्यू के दौरान दिलचस्प पुजारा पर अपनी दिलचस्पी राय दी है। गावस्कर कहते हैं, "हां, जब भारत की इंग्लैंड दौरे के लिए टेस्ट टीम चुनी जाएगी तो पुजारा का यह परफॉर्मेंस ध्यान में रखना चाहिए। पिछली बार जब हम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए गए थे तब न्यूजीलैंड वहां दो मैच इंग्लैंड में खेल चुका था। इसके चलते कीवी परिस्थितियों से तालमेल बैठाने में सफल हुए और उनको वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल के दौरान साउथ में भी वैसी ही परिस्थितियां मिली। वहां बारिश हो रही थी। वे ढल चुके थे। इस समय चेतेश्वर पुजारा के साथ भी वही हो रहा है। वे इंग्लिश परिस्थितियों के आदी हो चुके हैं उनके गेंदबाजों को आराम से खेल रहे हैं।"

टेस्ट बनाम काउंटी: बहुत बड़ा अंतर होता है
लेकिन गावस्कर आगे चेताते हुए कहते हैं, "लेकिन हां, एक काउंटी के गेंदबाजी अटैक में और टेस्ट मैच के बॉलिंग अटैक में बहुत बड़ा अंतर होता है लेकिन अगर बल्लेबाज के पास लय आ चुकी हो तो उसकी एडवांटेज का फायदा उठाना चाहिए और उसको टीम में लेने के लिए विचार करना चाहिए। ऐसा भी नहीं है कि वह दो-तीन साल बाद टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने जा रहे हैं या वापसी करने जा रहे हैं। यह केवल 6 या 7 महीने पहले की बात है। सितंबर तक वे टीम का हिस्सा थे। न्यूजीलैंड के खिलाफ और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज का हिस्सा थे। वे जनवरी से टीम में थे। तो निश्चित तौर पर उनके लिए चुना जा सकता है।"
अभी देखने में यह भी आया है कि पुजारा काउंटी में तेज बैटिंग कर रहे हैं। देखना होगा कि चयनकर्ता चेतेश्वर पुजारा की परफॉर्मेंस देखने के बाद उनको टेस्ट टीम में फिर से चुनेंगे या फिर नहीं। देखना यह भी होगा कि पुजारा काउंटी जैसा तेज खेलना जारी रखेंगे या फिर इंटरनेशनल मुकाबलों में अपनी धीमी पहचान को ही आगे बढ़ाएंगे।












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