सुनील गावस्कर का बड़ा बयान, रहाणे की कप्तानी में मिली इस जीत को बताया 'सबसे बेस्ट'

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर ने बड़ा दिया है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत पर अपनी राय रखी है। हैरानी भरी बात यह है कि वो जीत ना महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आई थी, ना ही विराट कोहली की कप्तानी में। यह जीत भारत को मिली थी अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में। जी हां, गावस्कर का कहना है कि पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में भारत की अविश्वसनीय टेस्ट जीत टीम की अब तक की सबसे बड़ी जीत है और इसे देश के क्रिकेट इतिहास में सुनहरा अध्याय माना जा सकता है।

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ये सबसे बड़ी जीत मानी जाएगी

ये सबसे बड़ी जीत मानी जाएगी

माैजूदा समय तो रहाणे आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं क्योंकि उनके खराब प्रदर्शन से टीम को नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन इस बीच गावस्कर ने एक ऐसी राय दी जो विचार करने के लायक है। पिछले साल भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके घर ही चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज खेली थी, जिसमें भारत ने पहले मैच में महज 36 रनों पर ढेर होने के बाद बाकी बचे मैचों में वापसी करते हुए 2-1 से सीरीज जीती थी। यह जीत रहाणे की कप्तानी में आई थी। गावस्कर ने कहा, "पिछले साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में भारत की जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत में से एक मानी जाएगी।"

मुझे वहां रहने का साैभाग्य मिला

मुझे वहां रहने का साैभाग्य मिला

गावस्कर ने कहा, "36 के अपने सबसे कम टेस्ट स्कोर के साथ आउट होने के बाद खुद को उठाना और फिर एक बड़े पैमाने पर घरेलू टीम को हराना खिलाड़ियों द्वारा दिखाए गए दृढ़ संकल्प और कप्तान, कोच रवि शास्त्री और बीच में रहाणे की कप्तानी ने सब ऐतिहासिक बना दिया। 72 वर्षीय पूर्व दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गावस्कर ने कहा, "मुझे वहां रहने और भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय लिखे जाने का सौभाग्य मिला।"

भारत की जीत की एक साल की सालगिरह मनाने के लिए, 'सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क' ने "डाउन अंडरडॉग्स - इंडियाज ग्रेटेस्ट कमबैक" नामक एक विशेष डॉक्यू-सीरीज का निर्माण किया है, जिसका प्रीमियर 14 जनवरी को होगा। इस दाैरान क्लार्क ने कहा, "अलग-अलग गेंदबाज, हर कोई एक जैसी गेंदबाजी नहीं करता है, अलग-अलग रणनीति, अलग-अलग कौशल, अलग-अलग प्लान, इसलिए श्रेय भारत को जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने भी पहले टेस्ट के बाद भारत को हल्के में लिया होगा।"

रहाणे की कप्तानी में मिली थी जीत

रहाणे की कप्तानी में मिली थी जीत

बता दें कि उस समय विराट कोहली की कप्तानी में भारत पहला मैच 8 विकेट से हार गया था। इस मैच में भारत पहली पारी में 36 रनों पर ढेर हो गया था। फिर कोहली सीरीजी से बाहर हो गए थे, जिससे रहाणे ने दूसरे टेस्ट से कप्तानी संभाल ली। दूसरे मैच में फिर भारत ने 8 विकेट से जीत दर्ज करते हुए सीरीज 1-1 की बराबरी पर ला दी। तीसरा टेस्ट ड्रा पर समाप्त हुआ, ऐसे में आखिरी टेस्ट दिलचस्प बन गया जो गावा में खेला गया था। इस निर्णायक मैच में भारत के सामने 328 रनों का मुश्किल लक्ष्य था लेकिन शुभमन गिल के 91, पुजारा के 56 और रिषभ पंत के नाबाद 89 रन ने भारत ने 3 विकेट से जीत दर्ज करते हुए सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लिया था।

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