इतने बड़े खिलाड़ी होकर भी पाकिस्तान के कप्तान क्यों नहीं बने शोएब अख्तर? खुद किया खुलासा
Shoaib Akhtar: पाकिस्तान के इतने महान तेज गेंदबाज होने के बावजूद शोएब अख्तर ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की कप्तानी क्यों नहीं की इसका उन्होंने खुद खुलासा किया है।

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर (Shoabi Akhtar) ने आखिरकार इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान की कप्तानी कभी क्यों नहीं की जबकि वह अपनी टीम के एक बहुत बड़े खिलाड़ी भी रहे उनका प्रभाव भी टीम पर देखने को मिला और रिटायरमेंट के बाद भी उनके अंदर अपने विचारों को प्रकट करने की क्षमता दिखाती है कि वह एक अच्छे लीडर हो सकते थे। शोएब अख्तर ने पाकिस्तान के लिए 1997 में डेब्यू किया था और अपने पूरे करियर में 46 टेस्ट 163 वन डे इंटरनेशनल और 15 T20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले। इस दौरान उनको टेस्ट क्रिकेट के साथ-साथ है वनडे क्रिकेट में अपनी तूफानी गेंदबाजी के लिए बहुत सफलता मिली लेकिन T20 इंटरनेशनल क्रिकेट तब इतना प्रचलित नहीं हुआ करता था।
उन्होंने वनडे वर्ल्ड कप 2003 के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ 161 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी भी जो आज भी दुनिया में सबसे तेज गेंद है। पाकिस्तान क्रिकेट के हवाले से बात करते हुए अख्तर ने कहा है कि वह कप्तानी नहीं कर पाए क्योंकि उनको लगता था कि वह बहुत फिट नहीं है। उनका कहना है कि मैं पांच में तीन मैच ही खेल सकता था। मुझे 2002 में कप्तानी का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन तब मैं केवल 2 साल ही खेल पाता। अख्तर का कहना है कि कप्तान होने के बाद आपको सारे मैच खेलने पड़ते हैं और उनके शरीर की फिटनेस इसकी इजाजत नहीं दे रही थी।
अख्तर अपने करियर के दौरान घुटने की तकलीफ से जूझते रहे और बहुत तेज गेंदबाज होने के कारण उनको अन्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक फिट होने की जरूरत पड़ती थी। पूर्व तेज गेंदबाज ने उन चीजों के बारे में भी बताया जो उनके करियर के दौरान घटित हुई। उनका कहना है कि जब वे खराब फॉर्म से जूझ रहे थे तब टीम के साथियों ने उनको सपोर्ट किया लेकिन पाक बोर्ड की हालत ऐसी थी कि वहां से बस गलतफहमियां ही पैदा हो रही थी। जिसके चलते वे कप्तानी के बारे में वैसे भी नहीं सोच सकते थे।
अख्तर खुद भी मानसिक और शारीरिक तौर पर कप्तानी के लिए रेडी नहीं थे क्योंकि ये एक बड़ी जिम्मेदारी थी और वे हल्के फुल्के अंदाज में इसको संभाल नहीं सकते थे। शोएब को पाक क्रिकेट के महानतम गेंदबाजों में एक माना जाता है और दुनिया के सबसे आतंकित करने वाले गेंदबाजों में उनका नाम गिना जाता है। लेकिन वे सर्वकालिक महान की लिस्ट में मीलों दूर ही रहे क्योंकि उनको चोटों ने तंग किया और 2011 के वर्ल्ड कप के बाद संन्यास लेकर ही खेल से उनका संघर्ष खत्म हुआ। इसके बाद भी वे अपने घुटनों की कई सर्जरी करा चुके हैं।
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