पूर्व कोच ने किया खुलासा, जिद्दी पंत को कोचिंग देनी कर दी थी बंद, असफलता मिली तो अक्ल ठिकाने आई!
पूर्व कोच ने खुलासा किया उन्होंने पंत को कोचिंग देना लगभग बंद कर दिया था क्योंकि वे उनसे तंग आ गए थे पर समय के साथ वे दोनों एक साथ हो गए और चीजें सहज हो गईं। क्या है पंत की जिद की ये कहानी?

ऋषभ पंत की दुर्भाग्यपूर्ण कार दुर्घटना ने भारतीय क्रिकेट के टेस्ट प्रारूफ में एक बड़ा शून्य जरूर ला दिया है जिसे भरने का दम अभी किसी और विकेटकीपर बल्लेबाज में नहीं है। हालांकि बाकी दो प्रारूपों में भारत को पास विकल्पों की भरमार है। ये विकल्प और ज्यादा अब उभरकर आए हैं क्योंकि जब पंत खेल रहे थे तब वे कहीं ना कहीं तीनों फॉर्मेट के खिलाड़ी थे। ये केवल दिनेश कार्तिक की अविश्वसनीय फॉर्म से बना लहर थी जिसने सिलेक्टरों को वर्ल्ड कप में डीके को लेने पर मजबूर किया लेकिन उनको वर्ल्ड कप के कीपर के तौर पर प्रजेंट करना बेकार ही साबित हुआ। इसने ना भारत को फायदा दिया और पंत का टी20 फॉर्मेट में खुद से विश्वास भी कम हुआ।

विकेटकीपिंग को फाइन-ट्यूनिंग की जरूरत थी
पंत में एक समय काफी एटीट्यूड माना जाता था। वे शायद जिद्दी भी थे लेकिन भारतीय टीम ने उनको बहुत अच्छे तरीके से डेवलेप किया। वर्ना एक समय था ये खिलाड़ी एकदम कच्चा था और खुद पर बहुत काम करने की दरकार थी। वह हमेशा गेंद के अच्छे हिटर थे, लेकिन उनकी विकेटकीपिंग को फाइन-ट्यूनिंग की जरूरत थी। अपने शुरुआती दिनों के दौरान, पंत तब के भारतीय फील्डिंग कोच आर श्रीधर की देखरेख में थे। हालांकि, एक समय था जब युवा खिलाड़ी की जिद तत्कालीन भारतीय कोच को परेशान करती थी।

श्रीधर ने खुलासा किया
'कोचिंग बियॉन्ड' नामक अपनी बुक में, श्रीधर ने खुलासा किया कि कैसे उन्होंने पंत को कोचिंग देना लगभग बंद कर दिया था क्योंकि वे उनसे तंग आ गए थे पर समय के साथ वे दोनों एक साथ हो गए और चीजें सहज हो गईं।
श्रीधर ने लिखा, "पंत कुछ इनपुट को नहीं ले रहे थे। क्योंकि उन्हें उस खेल पर भरोसा था जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया था। मुझे कहना पड़ेगा उनकी जिद ने मुझे बहुत परेशान किया। लेकिन गुस्सा या निराश होने से किसी की मदद नहीं होने वाली थी। मुझे ऋषभ को अलग-अलग चीजें करने की कोशिश करने के लिए एक रास्ता खोजना पड़ा। जबकि पंत को ये देखना था कि क्या वे बदलाव वास्तव में उसकी कीपिंग के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।"

एक टाइम के बाद उसको सुझाव देना बंद कर दिया
श्रीधर ने खुलासा किया कि कैसे उन्होंने पंत को सलाह देना बंद कर दिया और कुछ सख्ती करनी पड़ी। पर इससे पंत को ही नुकसान हुआ और कोच को अपनी गलती का अहसास हुआ।
उन्होंने कहा, हमने बहुत सा समय साथ प्रैक्टिस में बिताया लेकिन मैंने एक टाइम के बाद उसको सुझाव देना बंद कर दिया और जब भी वो उससे विकेट के पीछे बॉल कलेक्ट नहीं होती तो वो मेरी और अजीब तरह से देखता जिसे मैं नजरअंदाज करता। पंत होशियार था और उसको ये समझने में ज्यादा समय नहीं लगा कि कुछ तो गड़बड़ हो रही है।

'सर, आप कुछ नहीं कह रहे हैं'
"थोड़ी देर बाद वह मेरे पास आया और कहा 'सर, आप कुछ नहीं कह रहे हैं। मुझे बताएं कि क्या करना है। मैंने मन ही मन मुस्कराते हुए कहा कि आपको अपने हाथों से नहीं दिमाग से काम लेना होगा।"
फिर उसने वैसा ही किया। उसके दिमाग ने अपना काम करना शुरू किया जिसका रिजल्ट बॉडी पर भी दिखाई देने लगा और कीपिंग पर भी।
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