बेटी को खोने के कुछ दिन बाद ही खेली ऐसी पारी, खूब हो रही है इस खिलाड़ी के जज्बे की तारीफ
नई दिल्ली, 26 फरवरी: बड़ौदा के खिलाड़ी विष्णु सोलंकी की तारीफ हो रही है और इसका कारण बना है मुश्किल परिस्थितियों में आया हुआ उनका शतक। भारत में इस समय घरेलू स्तर पर रणजी ट्रॉफी 2021-22 सीजन चल रहा है जहां विष्णु सोलंकी ने चंडीगढ़ के खिलाफ तब शतक बनाया जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपनी बेटी को खो दिया था। इस पिच पर गेंदबाजों को मदद मिलती हुई देखी गई क्योंकि चंडीगढ़ की टीम 168 रनों पर ही आउट हो गई थी हालांकि सोलंकी पांच नंबर पर बल्लेबाजी करने आए और उन्होंने शानदार बैटिंग का परिचय दिया और दूसरे दिन की समाप्ति पर अपना शतक भी लगा दिया।
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विष्णु सौलंकी का जज्बेदार शतक-
बड़ौदा की टीम 400 पर पहुंच गई है और सोलंकी 161 गेंदों पर 103 रन बनाकर नाबाद है। ऐसे व्यक्तिगत दुख के बावजूद विषम परिस्थितियों में लड़कर शतक बनाने के जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है और सौराष्ट्र के विकेटकीपर बल्लेबाज शेल्डन जेक्सन ने भी सोलंकी की तारीफ की है।
शेल्डन जैक्सन ने लिखा- क्या बल्लेबाज है। जितने खिलाड़ियों को मैं जानता हूं,ये उनमें सबसे टफ होंगे। विष्णु और उनके परिवार को बिग सेल्यूट, किसी भी तरह से यह आसान नहीं था। आपके लिए और भी शतक और सफलता की कामना करता हूं।
यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है...
कुछ दिनों पहले ही बल्लेबाज ने अपनी नवजात बेटी को खो दिया था उन्होंने बच्ची का दाह संस्कार किया और फिर रणजी ट्रॉफी में अपनी टीम रिप्रजेंट करने के लिए वापस आ गए और फिर चंडीगढ़ के खिलाफ जबरदस्त शतक बना दिया।
बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन के सीईओ शिशिर भी 29 साल के खिलाड़ी के प्रदर्शन से प्रभावित है।
उन्होंने ट्वीट किया है- यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है जिसने कुछ दिन पहले ही अपनी नवजात बेटी को खो दिया। उन्होंने दाह संस्कार किया और फिर अपनी टीम में वापस आ गए जहां उन्होंने शतक लगाया। उनका नाम सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा चर्चित ना हो लेकिन विष्णु सोलंकी मेरे लिए एक असली जिंदगी के हीरो है, एक प्रेरणा है।

बेटी 24 घंटे में ही चल बसी थी-
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सोलंकी को उनकी बेटी के जन्म की खबर 11 फरवरी को मिली थी। 24 घंटे के अंदर ही क्रिकेटर को पता चला कि उनकी बेटी दुनिया में नहीं रही। सोलंकी तब अपनी स्टेट टीम के साथ भुवनेश्वर में थे उसके बाद उन्होंने दाह संस्कार में भाग लेने के लिए बड़ोदरा की उड़ान बड़ी। हालांकि 3 दिन के अंदर ही वह वापस भुवनेश्वर आ गए और अपनी टीम के साथ मिल गए।












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