NZ vs ENG: वेलिंग्टन में खुली इंग्लैंड के 'बैजबॉल' की कलई, न्यूजीलैंड ने 1 रन से टेस्ट जीतकर सीरीज बराबर की
England vs New Zealand: बेन स्टोक्स की धीमी बल्लेबाजी और हैरी ब्रूक के रन आउट ने अंग्रेजों को एक और बड़ी सीरीज जीतने से वंचित कर दिया। वेलिंग्टन टेस्ट मैच न्यूजीलैंड के लिए यादगार रहेगा। उन्होंने गजब की वापसी की।

आखिरकार इंग्लैंड के बैजबॉल कॉन्सेप्ट (England Bazball Concept) की कलई वेलिंग्टन के बेसिन रिजर्व में खुल गई जब उनको चौथी पारी में 258 के टारगेट को चेज करने में 1 रनों की हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही ये दो मैचों की बेहद छोटी सीरीज 1-1 से समाप्त हो गई। हाल में ही अश्विन ने कहा था हर पिच पर ये बैजबॉल नहीं चलने वाला और ये इसी टेस्ट मैच में देखने के लिए मिल गया जब पहली पारी में बहुत तेजी से रन बनाने वाली इंग्लैंड की टीम चौथी पारी में हार गई। दूसरी ओर मेजबानों के लिए मैच यादगार रहा क्योंकि अंग्रेजों ने कीवियों को फॉलोऑन दिया था लेकिन ये गजब की वापसी रही।

बैजबॉल कॉन्सेप्ट जीत के करीब भी लाया और हार का कारण भी बना
कहीं ना कहीं इस सीरीज में बेन स्टोक्स के खराब प्रदर्शन का खामियाज अब उनकी टीम को भी भुगतना पड़ा है जो करिश्माई ऑलराउंडर की इमेज को खुद के हाथों पर समाप्त करने पर तुल रहे हैं या उनकी फिटनेस में कोई दिक्कत है। स्टोक्स ना तो बल्लेबाज के तौर पर चल पाए और ना ही उन्होंने गेंदबाजी में खुद को मौके दिए। जितनी बॉलिंग की उसमें भी नाममात्र का ही दमखम दिखाया। इंग्लैंड की चौथी पारी की बात करें तो उन्होंने इस मुकाबले में मिले टारगेट को हासिल करने के लिए शुरुआत फिर से तेज की जब जैक क्रॉली ने 30 गेंदों पर 24 रनों की पारी खेली लेकिन साउदी ने उनको बोल्ड करके पहली सफलता दिलाई। दूसरे ओपनिंग बल्लेबाज बेन डकेट ने भी 43 गेंदों पर तेज 33 रन बनाए लेकिन मैट हेनरी का शिकार बने। इस दौरान ऑली रॉबिसन ने 2 और ओली पोप ने 14 रन बनाए।

फीके साबित हुए बेन स्टोक्स
टॉप ऑर्डर पर 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान के बावजूद अंग्रेजों ने 80 रन बनाकर बैजबॉल के मुताबिक खेल दिखाया लेकिन उनको तब पूरी तरह बैकफुट पर आ जाना पड़ा जब हैरी ब्रूक जीरो पर रन आउट हो गए और ये मैच का टर्निंग प्वाइंट कहा जाएगा क्योंकि इसने ऑउट ऑफ टच दिख रहे बेन स्टोक्स को टेस्ट क्रिकेट के पुराने जमाने में जाने के लिए मजबूर कर दिया। स्टोक्स ने तब खूंटा गाड़ने की पुरानी सोच दिखाई जब दूसरे छोर पर जो रूट तूफानी पारी को अंजाम दे रहे थे। सदाबहार जो रूट की पारी शतक की ओर बढ़ रही थी और स्टोक्स बेहद धीमी बल्लेबाजी कर रहे थे। स्टोक्स इस सीरीज में पूरी तरह बुझे दिखाई दिए और ये नहीं भूलना चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट को दर्शकों के लिए मनोरंजक बनाने की पहल करने वाले शख्स भी स्टोक्स ही थे।

200 के पार लगे दो निर्णायक झटके
लेकिन उन्होंने सोच से विपरीत बैटिंग की जिसके चलते 200 पार स्कोर होते ही इंग्लैंड को ऐसे दो झटके लगे जिन्होंने उनकी हार तय कर दी। 116 गेंदों पर निराशाजनक 33 रन बनाकर स्टोक्स वेगनर का शिकार हुए और जब इसके तुरंत बाद जो रूट 113 गेंदों पर 95 रन बनाकर आउट हुए तो इंग्लिश टीम 202 पर ही 7 विकेट खो चुकी थी। स्टोक्स का थोड़ा भी पॉजिटिव प्रयास अंग्रेजों को बहुत बेहतर स्थिति में पहुंचा सकता था क्योंकि तमाम बाधाओं के बावजूद विकेटकीपर बेन फॉक्स ने 57 गेंदों पर 35 रनों की पारी से सुनिश्चित किया था कि वे टारगेट को हासिल करने की यथासंभव जाएंगे। इस दौरान ठीक-ठाक बैटिंग करने वाले स्टुअर्ट ब्रॉड 11 ही रन बना सके। जैक लीच ने 1 और जेम्स एंडरसन ने 4 ही रनों का योगदान दिया। फॉक्स का विकेट अगर 251 रनों पर ना गिरता तो ये टीम जीत सकती थी।

हैरी ब्रूक का विकेट टर्निंग पॉइंट, विलियमसन प्लेयर ऑफ द मैच बने
न्यूजीलैंड की टीम ने टिम साउदी के तीन और वेगनर के चार विकेटों के दम पर बेहतरीन वापसी की। इससे पहले तीसरी पारी में केन विलियमसन ने 132 रनों की पारी खेली थी जिसके चलते उनको मैन ऑफ द मैच मिला और पहली पारी में 186 रनों का योगदान देने वाले हैरी ब्रूक को प्लेयर ऑफ द सीरीज मिला। निश्चित तौर पर बेन स्टोक्स के अजीबोगरीब प्रदर्शन ने सीरीज में अंग्रेजों को क्लीन स्वीप नहीं करने दिया और उनके खुद को बैजबॉल कॉन्सेप्ट की कलई मुश्किल हालातों में खुल गई। हालांकि ये इस कॉन्सेप्ट की हार नहीं है क्योंकि इंग्लैंड ने करीबी मैच खेला और वे 1 रन से हार गए। लेकिन ये हार बताती है कि कुछ अहम मौकों पर टिकना भी जरूरी होता है। इस बार तेज पारी खेलने में केवल जो रूट ही कामयाब रहे। इंग्लिश ओपनरों का तेज खेलकर बिना अर्धशतक के आउट होना भी निर्णायक बना। फिर भी बैजबॉल का सबसे बड़ा प्लेयर हैरी ब्रूक जिस तरह से रन आउट हुआ वह ही मैच का टर्निंग प्वाइंट है।












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