Kranti Goud: घर उजड़ा, सपने नहीं! झेली गरीबी फिर भी नहीं हारी हिम्मत, महिला खिलाड़ी की संघर्ष भरी कहानी
Kranti Goud inspirational story: भोपाल की रहने वाली 21 साल की तेज़ गेंदबाज़ क्रांति गौड़ आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नई सनसनी बन चुकी हैं। लेकिन उनकी यह कामयाबी आसान नहीं थी। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के आदिवासी इलाके से आने वाली क्रांति ने गरीबी, संघर्ष और तानों को पार करके अपनी पहचान बनाई। आज वह भारतीय महिला क्रिकेट की स्टार खिलाड़ी बन चुकी हैं।
पिता की छूटी नौकरी तो सड़क पर आया परिवार! (Kranti Goud inspirational story)
क्रांति के पिता मुन्ना सिंह मध्यप्रदेश पुलिस में थे, लेकिन 2012 में चुनाव ड्यूटी के दौरान अनियमितता के चलते उनकी नौकरी चली गई। इसके बाद परिवार को सरकारी क्वार्टर से निकाल दिया गया और किराए के छोटे से घर में रहना पड़ा। सबसे बड़े भाई मयंक ने पढ़ाई छोड़ दी और परिवार चलाने के लिए काम करना शुरू किया। वहीं क्रांति को भी स्कूल छोड़ना पड़ा, लेकिन क्रिकेट से मोहब्बत कम नहीं हुई।

क्रिकेट में कर रही हैं कमाल
साल 2017 में वह कोच राजीव बिलथरे की एकेडमी पहुंचीं। पैसों की तंगी देखकर कोच ने न सिर्फ फीस माफ़ की, बल्कि क्रिकेट गियर से लेकर जूते तक खुद दिलवाए। उन्होंने याद किया कि मैंने पहली बार उसे 1600 रुपये के स्पाइक्स दिलवाए थे। उसकी आंखों में खुशी और सपना दोनों दिख रहा था। क्रांति ने कुछ दिन पहले ही में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे मैच में 6 विकेट लेकर भारत को सीरीज जिताई। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने तो अपना प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड भी उनके साथ शेयर किया।
महिला आईपीएल ने बदली किस्मत
क्रांति ने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं सबसे पहले अपने परिवार के लिए घर खरीदना चाहती हूं। इसके बाद मैं ऐसी लड़कियों की मदद करूंगी जो क्रिकेट खेलना चाहती हैं लेकिन संसाधन नहीं हैं। क्रांति का सफर संघर्षों से भरा रहा है। इसलिए वह ऐसी लड़कियों का दर्द समझ सकती हैं। कोच चंद्रकांत पंडित ने उन्हें अपने कैंप में तराशा और फिर महिला आईपीएल ने उनकी किस्मत बदल दी। साल 2025 में वह यूपी वारियर्स टीम का हिस्सा थीं।












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