IPL-2023: गेल और धोनी ने कब बनाया था धीमी बल्लेबाजी का शर्मनाक रिकॉर्ड?
अगर गेंदबाज को पिच से मदद मिल रही हो तो रन बनाना आसान नहीं। चाहे फिर वह क्रिस गेल या महेन्द्र सिंह धोनी ही क्यों न हों।

आइपीएल में हमेशा तेज बल्लेबाजी की चर्चा होती है। अंतर्राष्ट्रीय सितारों से सजी यह प्रतियोगिता आक्रामक बैटिंग के लिए बनी भी है। खिलाड़ी मोटे पैसे से खरीदे जाते हैं और उनकी प्रतिबद्धता फ्रेंचाइजी के हितों से जुड़ी होती है। पूंजी निवेश का मामला है इसलिए बल्लेबाजों को हरहाल में तेज खेलना होता है। उनके लिए डॉट गेंद खेलना एक तरह से गुनाह है। लेकिन क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसे व्यवसायिक बंधनों में नहीं बांधा जा सकता है। इसकी अपनी खासियत है। अगर गेंदबाज को पिच से मदद मिल रही हो तो धाकड़ से धाकड़ बल्लेबाज भी रन नहीं सकता। भले ही वे क्रिस गेल या महेन्द्र सिंह धोनी ही क्यों न हों। आज गेल और धोनी की आइपीएल में धीमी बल्लेबाजी पर चर्चा।
IPL- गेल के 24 गेंदों पर 10 रन
कभी कभी सफल और श्रेष्ठ खिलाड़ियों के खाते में ऐसे शर्मानक रिकॉर्ड दर्ज हो जाते हैं जिसके बारे में कोई कल्पना नहीं करता। क्रिस गेल और महेन्द्र सिंह धोनी ऐसे ही खिलाड़ी हैं। दोनों ही विध्वंसक बल्लेबाजी के लिए विख्यात हैं। ये दुनिया के किसी भी गेंदबाज की धज्जियां उड़ा देने का माद्दा रखते हैं। गेल ने टी-20 में सबसे अधिक 22 शतक लगाये हैं। उन्होंने आइपीएल 2013 में सिर्फ 30 गेंदों पर शतक लगा कर तहलका मचा दिया था। गेल का ये रिकॉर्ड आज भी नहीं टूटा है। लेकिन हैरत की बात है कि यही गेल आईपीएल में सबसे धीमी पारी खेलने के लिए भी बदनाम हैं। उन्होंने 2015 के आइपीएल में 24 गेंदें खेल कर केवल 10 रन बनाये थे। वे 24 गेंदें खेल गये लेकिन न तो छक्का लगा पाए और न चौका।
आइपीएल में धोनी की सबसे धीमी पारी
महेन्द्र सिंह धोनी आइपीएल के दूसरे सबसे सफल कप्तान हैं। उनका कप्तानी और हार्ड हिटिंग बैटिंग का कोई जवाब नहीं। धोनी आइपीएल के 20वें ओवर में सबसे अधिक छक्के मारने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने आइपीएल के अंतिम ओवर में कुल 59 छक्के लगाये हैं। यह रिकॉर्ड उन्होंने इसी सीजन में बनाया है। इसी काबिलियत की वजह से धोनी को बेस्ट फिनिशर माना जाता है। लेकिन आतिशी बल्लेबाजी के लिए मशहूर धोनी के नाम पर एक धीमी पारी का अनचाहा रिकॉर्ड भी दर्ज है। धोनी ने आइपीएल 2016 में 22 गेंदें खेल कर 8 रन पर नाबाद थे। उस समय वे राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स टीम का हिस्सा थे। ये धीमी पारी उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ खेली थी।
जब पूरा ओवर मेडन खेल गये गेल
2015 में आइपीएल का 16वां मैच रॉयल चैलैंजर्स बैंगलोर और मुम्बई इंडियंस के बीच हुआ था। मुम्बई इंडियंस ने दमदार बल्लेबाजी की और 209 रन बनाये। लेंडल सिमंस ने 59, उन्मुक्त चंद ने 58 और कप्तान रोहित शर्मा ने केवल 15 गेंदों पर 42 रन बनाये थे। बैंगलोर को जीतन के लिए 210 रनों का लक्ष्य मिला। क्रिस गेल और मानविंदर बिस्ला की सलामी जोड़ी मैदान पर उतरी। मुम्बई के मैकलाघन ने पहला ओवर शुरू किया। स्ट्राइक क्रिस गेल के पास थी। इस ओवर में गेल बल्ले से सर्फ 1 रन बना सके। यहां तक कि वे फ्री हिट पर भी कोई रन नहीं बना सके। मैकलाघन की तीसरी गेंद नोबॉल थी। वाइड और नोबॉल से 3 रन बने। पहले ओवर में कुल 4 रन बने। गेल दब कर खेलते नजर आये। लसिथ मलिंगा दूसरा ओवर लेकर आये। वे जबर्दस्त लय में थे। मलिंग ने छह की छह गेंदें या तो स्लोओर फेंकी या फिर यॉर्कर। गेल एक भी रन नहीं बना सके। पूरा ओवर मेडन खेल गये। गेल जैसे विस्फोटक बल्लेबाज के लिए यह शर्मनाक था।
गेल की धीमी बल्लेबाजी से हार गया था बैंगलोर
मुम्बई के कप्तान रोहित शर्मा ने जब देखा कि गेल और बिस्ला रन नहीं बना पा रहे हैं तो उन्होंने चौथे ओवर में ही हरभजन सिंह को बुला लिया। रोहित का यह दांव सफल रहा। विस्ला ने हरभजन पर एक छक्का और एक चौका मारा लेकिन आखिरी गेंद पर बोल्ड हो गये। गेल न तो स्पिनर पर रन बना पा रहे थे और न ही तेज गेंदबाज पर। मुश्किल से सिंगल ले पा रहे थे। 24 गेंदें खेलने के बाद भी केवल 10 रन बना पाये थे। जब टीम 210 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही हो उस स्थिति में ऐसी बल्लेबाजी तो बेड़ा गर्क करने वाली ही थी। कप्तान विराट कोहली भी गेल के रवैये से हैरान थे। आखिरकार नौंवे ओवर की पहली गेंद पर हरभजन सिंह ने गेल को बोल्ड आउट कर दिया। बैंगलोर 18 रनों से यह मैच हार गया था।
जब धोनी उम्मीद पर खरे नहीं उतरे
आइपीएल 2016 का 45वां मैच राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला गया था। धोनी पुणे के कप्तान थे और गंभीर कोलकाता के। मैच केवल 17.4 ओवर ही खेला जाना था। पुणे ने पहले बैटिंग की। उसकी बल्लबाजी बहुत खराब रही। पूरी टीम 6 विकेट पर केवल 103 रन बना सकी। धोनी जैसे चतुर कप्तान ने भी न जाने क्या सोच अपने विकेट बचा कर रखे थे। जब रन नहीं बन रहे थे तब बल्लेबाजों को जोखिम उठाना चाहिए चाहिए था। चौके छक्के मारने की कोशिश में आउट हो जाते, तो हो जाते। विकेट बचा कर रखने का कोई मतलब नहीं था। खुद धोनी ने जिस तरह से बैटिंग की वह उनके समर्थकों को खटकने लगी।
22 गेंदों पर 8 रन
11वें ओवर की तीसरी गेंद पर जब जॉर्ज बेली आउट हुए तो कप्तान धोनी मैदान पर उतरे। उस समय पुणे का स्कोर था 4 विकेट पर 73 रन। धोनी पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी कि वे यहां से टीम को एक सम्मानजनक स्कोर तक ले जाएं। अभी 8 ओवर तीन गेंदों का खेल बाकी थी। इरफान पठान उनका साथ दे रहे थे। 140- 150 के आसपास स्कोर पहुंचाया जा सकता था। लेकिन धोनी ने निराश कर दिया। उन्होंने 11वें ओवर की बाकी तीन गेंदें खेलीं लेकिन कोई रन नहीं बनाया। 12वें ओवर में धोनी के बल्ले से सिर्फ 1 रन निकला। धोनी के बल्ले को जैसे सांप सूंघ गया था। वे आखिरी ओवर (17.4) तक खेले। कुल 22 गेंदों का सामना किया और सिर्फ 8 रन बनाये। ऐसी बल्लेबाजी कर नाबाद रहना उनके लिए तौहीन की बात थी। इससे तो अच्छा था कि वे छक्का मारने की कोशिश में आउट हो गये होते। कम से कम ये तो लगता कि उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। धोनी जैसे बल्लेबाज के लिए इस तरह आत्मसमर्पण करना आश्चर्यजनक था। कोलकाता ने यह मैच 8 विकेट से जीत लिया था।












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