IPL 2022 : ये हैं वो मुख्य कारण, जिसके चलते KKR नहीं पहुंचा प्लेऑफ में

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स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल 2022 में कोलकाता नाइट राइडर्स का सफर खराब रहा। इस बार टीम नए कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ उतरी थी, लेकिन प्रदर्शन वैसा नहीं रहा, जिसके लिए वह जाने जाते थे। इयोन मोर्गन की कप्तानी में केकेआर पिछले सीजन में फाइनल तक पहुंची थी, जहां उसे फिर चेन्नई सुपर किंग्स से हार मिली थी। लेकिन इस बार टीम प्लेऑफ में प्रवेश भी नहीं कर पाई। टीम को अपने आखिरी लीग मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स से 2 रनों हार का सामना करना पड़ा, साथ ही उसका सफर 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत के साथ समाप्त हो गया। आखिर क्या वो कारण रहे जिसके चलते केकेआर इस बार प्लेऑफ तक नहीं जा सकी? आइए जानें-
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नामी खिलाड़ी चक्रवर्ती हुए फेल
फ्रेंचाइजी के लिए जो नामी खिलाड़ी हर सीजन में कुछ अलग करते दिखते थे वो इस बार नाकाम साबित हुए। स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को फ्रेंचाइजी ने बड़ी उम्मीद के साथ 8 करोड़ में रिटेन किया था। लेकिन हुआ यह कि चक्रवर्ती अपनी गेंद से बल्लेबाजों को परेशान करने में नाकाम रहे। चक्रवर्ती को 11 मैच खेलने को मिले, जिसमें वह सिर्फ 6 विकेट ही ले सके। चक्रवर्ती टीम में सबसे विश्वास भरे गेंदबाज थे, लेकिन उनके ना चलने से स्पिन विभाग कमजोर पड़ गया, जिस कारण केकेआर बीच के ओवरों में रनों को रोकने, साथ में विकेट लेने में नाकाम रहा।

ओपनिंग जोड़ी फेल
केकेआर को पूरे सीजन में अच्छी शुरूआत नहीं मिल सकी। टीम कई बार ओपनिंग जोड़ी बदलने के लिए मजबूर हुई। अजिंक्य रहाणे, सैम बिलिंगस, सुनील नरेन, वेंकटेश अय्यर और आरोन फिंच केकेआर के लिए बतौर सलामी बल्लेबाज खेलते दिखे, लेकिन सभी टीम को अच्छी शुरूआत नहीं दिला सके, जो टीम को प्लेऑफ की दाैड़ से बाहर करने का मुख्य कारण साबित हुआ।
- वेंकटेश 12 मैचों में 107.69 की खराब स्ट्राइक रेट से 182 रन बना सके।
- रहाणे 7 मैचों में 103.91 की स्ट्राइक रेट से 133 रन बना सके।
- सैम बिलिंग्स ने 8 मैचों में 122.46 की स्ट्राइक रेट से 169 रन बनाए।
- सुनील नरेन 14 मैचों में 177.50 की स्ट्राइक रेट से सिर्फ 71 रन बना सके।
- आरोन फिंच को 5 मैच खेलने को मिले, जिसमें वह सिर्फ 86 रन बना सके।

प्लेइंग XI सेट ना कर पाना
केकेआर ने इस बार हुई मेगा नीलामी के नामी खिलाड़ी अपने साथ जोड़े। लगा कि टीम अय्यर की कप्तानी में आगे जाती दिखेगी, लेकिन कंफ्यूजन इतनी रही कि टीम प्रबंधन एक सटीक प्लेइंग इलेवन चुनने में कामयाब नहीं हो पाया। बार-बार प्लेइंग इलेवन में बदलाव करना टीम को भारी पड़ा, क्योंकि इससे ना सिर्फ खिलाड़ियों का आत्मविश्वास डगमगाया, बल्कि पूरा बैटिंग ऑर्डर भी बदलता दिखा जिस कारण लय बरकरार रख पाना टीम से लिए संभव नहीं हो पाया।












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