टीम इंडिया का नया अवतार : विकेट गिरे तो गिरे ! तोड़ कर खेलो, फोड़ कर खेलो
नई दिल्ली, जुलाई 11। विकेट गिरे तो गिरे, तोड़ कर खेलो, फोड़ कर खेलो। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 मैच में भारत नये अवतार में दिखा। टी-20 विश्वकप के लिए टीम इंडिया इसी तेवर में है। न केवल पावर प्ले में बल्कि मिडिल और स्लॉग ओवरों में भी तोड़-फोड़ जारी रहनी चाहिए। हर हाल में मोमेंटम बनाये रखना है। द्रविड़-रोहित की जोड़ी ने मुनादी कर दी है, होशियार ! ये न्यू टीम इंडिया है। एजबेस्ट टी-20 में भारत के विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे लेकिन आखिरकार 8 विकेट पर 170 रनों का स्कोर खड़ा हो गया। विकेटों के पतझड़ के बीच भी भारत के रनों की रफ्तार 8.50 प्रतिओवर रही। ऐसा नहीं है कि आंख मूंद कर सिर्फ जोश ही दिखाना है। वक्त के हिसाब से खुद को ढालना भी है। दिनेश कार्तिक को फिनिशर की भूमिका सौंपी गयी है। वे पहली गेंद से ही प्रहार की क्षमता रखते हैं। लेकिन एजबेस्टन में उन्होंने हालात को देख कर अपनी भूमिका बदल ली। विकेट गिर रहे थे। संभल कर खेले। करीब चार ओवर तक विकेट गिरने के सिलसिले को रोके रखा। इसका फायदा जडेजा को मिला। उन्होंने एक्सिलेटर पर पांव दबाए रखा।

पावरप्ले में बल्लेबाजी का तूफानी अंदाज
1996 के विश्वकप में श्रीलंका के ओपनर सनथ जयसूर्या और रमेश कालूवितर्ना ने पहले 15 ओवरों में फील्डिंग प्रतिबंधों का फाय़दा उठा कर चौकों छक्कों की बरसात कर दी थी। अब भारत इस नीति को टी-20 में अमलीजामा पहना रहा है। एजबेस्टन टी-20 में रोहित शर्मा और ऋषभ पंत की सलामी जोड़ी ने 4.5 ओवर में 49 रन बना लिये थे। भारत को तेज शुरुआत मिल चुकी थी। रोहित 20 गेंदों पर 31 रन बना कर आउट हुए। पावर प्ले के पहले छह ओवरों में भारत का स्कोर था एक विकेट पर 61 रन। यानी रन बनाने की रफ्तार 10 रन प्रति ओवर से अधिक थी। 61 के स्कोर पर कोहली और पंत के विकेट गिर गये। तीन विकेट गिरने के बावजूद सूर्य कुमार यादव और हार्दिक पांड्या ने रन गति धीमी नहीं होने दी। इन दोनों ने करीब चार ओवरों में 28 रन बनाये। 11वें ओवर में सूर्या 11 गेंदों पर 15 रन बना कर आउट हुए। तब भारत स्कोर चार विकेट पर 89 रन था। इसी स्कोर पर हार्दिक भी 12 रन बना कर चलते बने। 10.4 ओवर में 89 रन पर पांच विकेट गिर चुके थे। पांच विकेट गिरने के बावजूद भारत की रन गति 8 रन प्रतिओवर से अधिक थी।

जैसी स्थिति वैसी भूमिका
तब दिनेश कार्तिक मैदान पर उतरे। उन्होंने हालात को भांप कर पिंच हिटर की भूमिका छोड़ दी। संभल कर खेलने लगे। दूसरी तरफ रवीन्द्र जडेजा लय में थे। कार्तिक ने जडेजा के साथ मिलकर स्कोर को 89 से 122 तक पहुंचाया। करीब चार ओवर तक विकेट गिरने नहीं दिये। दुर्भाग्य से कार्तिक रनआउट हो गये। उन्होंने 17 गेंदों पर 12 रन बनाये और मुश्किल वक्त में जडेजा के साथ 33 रनों की साझेदारी की। कार्तिक 16 वें ओवर की पहली गेंद पर आउट हुए। 122 रन पर छठा विकेट गिरा था। इसके बाद हर्षल पटेल ने छोटी लेकिन तेज पारी खेली। हर्षल ने 6 गेंदों 13 रन बनाये और जडेजा साथ 11 गेंदों पर 23 रनों की साझेदारी की। 145 के स्कोर पर हर्षल सातवें विकेट के रूप में आउट हुए। अभी तीन ओवर का खेल बाकी था। जडेजा ने एक छोर संभाल भी रखा था और तेजी से रन भी बना रहे थे। वे एंकर रोल और पिंच हिटर, दोनों भूमिका एक साथ निभा रहे थे। 18 वें ओवर में 7 रन बने, 19 वें ओवर में 7 रन बने और भुवनेश्वर का विकेट गिरा। 20वें ओवर में 11 रन बने। जडेजा ने 29 गेंदों पर 46 नाबाद रन बनाये। विकेटों के पतन के बीच भी भारत ने आक्रमण की नीति नहीं छोड़ी इसलिए वह 170 रन बनाने में सफल रहा।

आक्रमण के सेनापति
अगलग अलग मोर्चों के लिए अलग-अलग सेनापति तय हैं। पावर प्ले में कप्तान रोहित शर्मा आक्रणण की बागडोर संभालेंगे। मिडिल ओवरों में आक्रमण के लिए कई सेनापति तैयार हैं। फिलहाल सूर्य कुमार यादव इस भूमिका में हैं। दीपक हुड्डा ने भी पिछले कुछ मैचों में अपनी छाप छोड़ी है। अब तीन महीने की परीक्षा में कौन पास होता है, इसका इंतजार है। विराट कोहली के बल्ले की गूंज का भी इंतजार है। डेथ ओवरों में आक्रमण का भार हार्दिक पांडया और दिनेश कार्तिक के कंधों पर होगा। अगर टीम को तेज शुरुआत मिली तो इस मोमेंटम को अंत तक बनाये रखने के लिए कम से कम चार-पांच विस्फोटक बल्लेबाज जरूर होने चाहिए। ये तो अभी शुरुआत है। मैच मैच दर मैच भारत की यह रणनीति अभी और निखरेगी।












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