टेस्ट कप्तानी: रोहित को एक और मौका, 40 दिन बाद क्या धोनी की तरह ले पाएंगे विदाई?
बीसीसीआई रोहित शर्मा को एक और मौका देने पर विचार कर रही है। अगर वेस्टइंडीज दौरे पर रोहित ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो टीम मैनेजमेंट नये सिरे से उनके भविष्य पर विचार करेगा।
भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान रोहित शर्मा के लिए 12 से 24 जुलाई के बीच का समय करियर के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इन बारह-तेरह दिनों में तय हो जाएगा कि रोहित शर्मा टेस्ट कप्तान रहेंगे या नहीं। दरअसल भारत, वेस्टइंडीज के साथ दो टेस्ट मैच खेलने वाला है जो डोमिनका और त्रिनिदाद में खेले जाएंगे। पहला टेस्ट 12 जुलाई से और दूसरा टेस्ट 20 जुलाई से शुरू होगा।
टेस्ट कप्तानी- रोहित को एक और मौका
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में भारत की करारी हार के बाद कप्तान के रूप में रोहित शर्मा की स्थिति कमजोर हो गयी है। बीसीसीआई रोहित को एक और मौका देने पर विचार कर रही है। अगर वेस्टइंडीज दौरे पर रोहित ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो टीम मैनेजमेंट नये सिरे से उनके भविष्य पर विचार करेगा। बीसीसीई रोहित को वेस्टइंडीज दौरे पर टेस्ट कप्तान के रूप में इसलिए भेज रही है ताकि उसे सोच-विचार के लिए समय मिल जाए। जुलाई 2023 के बाद निकट भविष्य में भारत की कोई टेस्ट सीरीज नहीं खेलनी है।

वेस्टइंडीज में अच्छा नहीं खेले तो विदाई तय
वेस्टइंडीज में टेस्ट खेलने के बाद भारत दिसम्बर 2023 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर जाएगा। यानी वीसीसीआई को पांच महीने का वक्त मिल जाएगा। अभी चयन समिति में मुख्य चयनकर्ता का पद खाली है। शिवसुंदर दास प्रभार में इस भूमिका को निभा रहे हैं। तब तक नये मुख्य चयनकर्ता भी चयन समिति में आ जाएंगे और पांच सदस्यों का कोरम पूरा हो जाएगा। चूंकि अब भारत को भविष्य का कप्तान तय करना है इसलिए योग्य उम्मीदवार को कई कसौटियों पर परखा जाएगा। यह काम पूर्ण चयन समिति ही कर सकती है। इसलिए रोहित को फिलहाल एक और मौका दिया गया है।
देर-सबेर रोहित को तो कप्तानी से हटना ही है
अगर वेस्टइंडीज में अच्छा खेले तो भी रोहित अधिक दिनों तक टेस्ट कप्तान नहीं रह सकते। वेस्टइंडीज में जो दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे वे विश्व टेस्ट चैंपियन 2025 का हिस्सा हैं। दो साल की अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट सीरीज के बाद 2025 का फाइनल तय होगा। रोहित की उम्र अभी 36 साल है।
दो साल बाद उनकी उम्र 38 साल हो जाएगा। जाहिर है इतनी अधिक उम्र तक उनके लिए कप्तानी बहुत मुश्किल होगी। वैसे भी भारत 10 साल से आइसीसी की कोई ट्रॉफी नहीं जीत पाया है। इसलिए बीसीसीआई अब नया कप्तान लाना चाहती है जो भारतीय क्रिकेट को आगे ले जा सके।
देर सबेर रोहित शर्मा को टेस्ट कप्तानी से हटना ही है। रोहित भी इस बात को भली भांति जान रहे हैं। नीम पे करेला ये कि उनके रन भी नहीं बन रहे। हो सकता है रोहित भी धोनी और विराट की तरह खुद कप्तानी छोड़ दें। हटाये जाने से तो अच्छा है कि रोहित खुद अलविदा कह दें।
कप्तान रोहित- 7 टेस्ट में 390 रन
रोहित शर्मा 2022 में टेस्ट कप्तान बने थे। जनवरी 2022 में दक्षिण अफ्रीका के हाथों टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद विराट कोहली ने टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी। रोहित के कप्तान बनने के बाद भारत ने 10 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें से रोहित शर्मा इंजरी के कारण 3 टेस्ट नहीं खेल पाये। इन 7 टेस्ट मैचों में रोहित ने 390 रन बनाये जिसमें सिर्फ एक शतक शामिल है। 50 से ऊपर का कोई स्कोर नहीं है।
कप्तान बनने के बाद रोहित की बल्लेबाजी वैसी नहीं रही जिसके लिए वे विख्यात हैं। अगर कप्तान खुद रन नहीं बना पाएगा तो वह टीम को कैसे 'मोटिवेट' कर पाएगा। अब उनके पास मौका है कि वे वेस्टइंडीज में रनों के सूखे को खत्म कर अपने सम्मान को बचाएं। उनके नाम पर कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं। वे भारत के चुनिंदा स्ट्रोक प्लेयर में एक हैं। वे बड़े खिलाड़ी हैं इसलिए उनके प्रशंसक भी चाहते हैं कि वे रन बना कर सम्मान के साथ बिदाई लें।
रोहित के सामने धोनी की नजीर
2014 में महेन्द्र सिंह धोनी ने टेस्ट कप्तानी से सम्मानपूर्वक बिदाई ली थी। उन्हें एहसास हो गया था कि अब उनका खेल पांच दिवसीय क्रिकेट के अनुरूप नहीं रहा गया है। इसलिए उन्होंने टेस्ट सीरीज के बीच में ही कप्तानी छोड़ दी थी। 2014 में धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गयी थी। पहले टेस्ट में धोनी चोट की वजह से नहीं खेल सके थे। विराट कोहली ने कप्तानी की थी। भारत यह टेस्ट 48 रनों से हार गया।
दूसरे टेस्ट में धोनी लौटे। पहली पारी में उन्होंने 33 और दूसरी पारी में 0 बनाया। भारत यह टेस्ट भी हार गया। ऑस्ट्रलिया ने उसे 4 विकेट से हराया। लगातार हार से धोनी विचलित हो गये। तीसरा टेस्ट मैच ड्रा रहा। धोनी ने पहली पारी में 11 और दूसरी पारी में नाबाद 24 रन बनाये।
तीसरा टेस्ट मैच जब ड्रा खत्म हुआ तो धोनी न केवल कप्तानी छोड़ दी बल्कि टेस्ट क्रिकेट से ही संन्यास ले लिया। धोनी के अचानक इस फैसले से हर कोई स्तबध रह गया था। न तो वीसीसीआइ को कुछ कहने का मौका मिला न किसी और को, धोनी ने खुद किनारा कर लिया। क्या रोहित शर्मा भी ऐसा कर पाएंगे?












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