मयंक अग्रवाल की बैटिंग में क्या गड़बड़ है और क्या ठीक करने की है जरूरत, गावस्कर ने दी जानकारी
नई दिल्लीः भारत के खिलाड़ी मयंक अग्रवाल के साथ एक समस्या यह है कि वे कभी रन बनाते दिखते हैं तो कभी नौसिखिया बल्लेबाज की तरह खेलते हैं। यही समस्या भारत के अनुभवी बल्लेबाजों के भी साथ है लेकिन मयंक या केएल राहुल की असफलता भारत को बेहद खराब शुरुआत दिलाती है जिसका असर पूरी टीम की बल्लेबाजी पर पड़ता है। सुनील गावस्कर भी मयंक अग्रवाल की तकनीक से संतुष्ट नहीं है। आइए देखते हैं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा सीरीज में मयंक की बल्लेबाजी में गावस्कर क्या समस्या बता रहे हैं।

मयंक अग्रवाल की तकनीक में कुछ गड़बड़ है-
सबसे पहले तो मयंक नई गेंद के साथ बहुत ज्यादा सहज नहीं हैं। केपटाउन टेस्ट में वे जीरो पर आउट होते हुए तब बच गए थे जब केगन पीटरसन ने उनका कैच छोड़ दिया था लेकिन मयंक जीवनदान का भी फायदा नहीं उठा सके और 15 रनों के स्कोर पर ही कैगिसो रबाडा के सामने हथियार डालकर पवेलियन लौट चले।
एक ओपनर के लिए तकनीक ही सब कुछ होती है। यहां तक की वीरेंद्र सहवाग जैसा महान ओपनर भी अपनी तकनीक को लेकर करियर भर आलोचना का शिकार रहा। मयंक ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को खेल रहे हैं जबकि इसकी खास जरूरत नहीं है, उनको छोड़ा जा सकता है। अग्रवाल को सीरीज में शुरुआत मिली लेकिन भुनाई नहीं जा सकी। वे अभी भी सेंचुरियन टेस्ट की पहली पारी में बनाए गए 60 रनों से ऊपर नहीं बढ़ पाए हैं।

सुनील गावस्कर ने बताया, मयंक के साथ क्या हो रहा है-
गावस्कर को लगा है कि मयंक अग्रवाल उन गेंदों को बल्ले से धकेलने की कोशिश कर रहे हैं जो मूवमेंट कर रही हैं और फिर उनकी बैट स्पीड की वजह से वे आउट हो रहे हैं।
दरअसल मयंक अग्रवाल भारतीय टीम में फिर से चर्चाओं में तब आए जब उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में करार शतक लगाया और उनकी तकनीक की तरह से बैटिंग फॉर्म पर ज्यादा सवाल नहीं उठ रहे थे। लेकिन अब कम स्कोर बनने से उनकी तकनीक की पोल भी खुलने लगी है।

गावस्कर ने बताया क्या सुधार कर सकते हैं मयंक-
गावस्कर ने मैच के दौरान कमेट्री पैनल पर बात करते हुए कहा, जब गेंद बल्ले के बीच में आ रही हो तो अग्रवाल एक बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं, जब गेंद मूव करती है तो वह उसको थोड़ा सा पुश करने के मूड में आ जाते हैं और उनकी बैट स्पीड कई बार आउट होने का कारण बन जाती है। हमने उनके बल्ले से बाहरी किनारा निकलता हुए तब भी देखा जब वह जीरो पर थे। आप देख सकते हैं कि वह गेंद को कितनी तेजी से पुश कर रहे थे।
गावस्कर ने यह भी बताया है कि मयंक को क्या करने की जरूरत है। वे कहते हैं कि मयंक को अपने बैट को पैड के थोड़ा और पास खेलने की जरूरत है। उनको मानसिकता में भी थोड़ा बहुत बदलाव करने की दरकार है। टेस्ट क्रिकेट में गेंद को छोड़ना भी बहुत अहम होता है। पहले घंटे में ज्यादा से ज्यादा गेंद को छोड़ना अहम है।
गावस्कर कहते हैं कि जब आप क्रिकेट अलग फॉर्मेट में खेलते हैं तो अपनी मानसिकता में भी बदलाव करते हैं। ऐसा ही बदलाव टेस्ट क्रिकेट में करने की जरूरत है।












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