'मैच क्यों हो रहा है?', पहलगाम हमले में पति और बेटे को खो चुकीं महिला का छलका दर्द, लगाई न्याय की गुहार
IND vs PAK Asia Cup 2025: एशिया कप 2025 (Asia Cup 2025) में भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाना है। पूरे देश और दुनिया के क्रिकेट फैंस इस मैच का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन इस हाई-वोल्टेज मुकाबले से ठीक पहले एक दर्दभरी आवाज सामने आई है, जिसने खेल और रिश्तों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सावन परमार ने किया मैच का विरोध (IND vs PAK Asia Cup 2025)
गुजरात के भावनगर के रहने वाले सावन परमार ने इस मैच के आयोजन पर कड़ा विरोध जताया है। सावन वही युवक हैं जिनके पिता और 16 साल के छोटे भाई की इस साल पहलगाम आतंकी हमले में मौत हो गई थी। हमले में उनका भाई गोलियों से छलनी कर दिया गया था और पिता भी आतंकियों की गोली का शिकार हो गए थे। इस हादसे के बाद से उनका पूरा परिवार सदमे में है।

किरण यतीश परमार का छलका दर्द
भावनगर की रहने वाली किरण यतीश परमार ने मीडिया से बात करते हुए गहरे आक्रोश और पीड़ा व्यक्त की है। किरण परमार ने बताया कि उन्होंने इस हमले में अपने पति और बेटे को खोया है। उनका कहना है कि सरकार जब तक ऑपरेशन सिंदूर को पूरी तरह खत्म नहीं करती, तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का संबंध या मुकाबला नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरा नहीं हुआ है तो यह भारत-पाकिस्तान मैच क्यों हो रहा है?
पाकिस्तान से क्रिकेट खेलना सही नहीं
सावन परमार ने मीडिया से बातचीत में भावुक होकर कहा कि जब हमें पता चला कि भारत-पाकिस्तान का मैच कराया जा रहा है तो हम बहुत आहत हुए। पाकिस्तान से किसी भी तरह का रिश्ता नहीं होना चाहिए। अगर मैच खेलना ही है, तो पहले मेरा 16 साल का भाई वापस कर दो। उनकी यह बात सिर्फ एक बेटे या भाई का दर्द नहीं है, बल्कि उन तमाम परिवारों की आवाज है जिन्होंने आतंकवाद में अपने प्रियजन खोए हैं। सावन का कहना है कि ऐसे हालात में पाकिस्तान से क्रिकेट खेलना सही संदेश नहीं देता।
बीसीसीआई ने दी थी ये सफाई
वहीं दूसरी तरफ बीसीसीआई और आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल ने भी इस मुद्दे पर सरकार की स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल रहा है और आगे भी ऐसा नहीं होगा। लेकिन एशिया कप या आईसीसी जैसे मल्टीनेशन टूर्नामेंट में भारत को मजबूरी में हिस्सा लेना पड़ता है, क्योंकि यह सरकार की नीति और टूर्नामेंट के नियमों से जुड़ा मामला है।












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