'बॉर्डर पर जवान शिकायत नहीं करते, फिर क्रिकेटर्स क्यों', वर्कलोड मैनेजमेंट पर फूटा गावस्कर का गुस्सा
Ind vs Eng Sunil Gavaskar: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर बड़ा बयान दिया है। सुनील गावस्कर का कहना है कि जब खिलाड़ी देश के लिए खेल रहे हों तो उन्हें थकान, दर्द या शरीर की तकलीफों की बात नहीं करनी चाहिए। गावस्कर ने इसे एक मानसिक समस्या बताया और कहा कि खिलाड़ियों को देश के जवानों से सीखना चाहिए, जो सीमाओं पर तैनात होकर कभी भी सर्दी या दर्द की शिकायत नहीं करते।
ऋषभ पंत और सिराज को लेकर कही ये बात (Ind vs Eng Sunil Gavaskar)
गावस्कर ने खासतौर पर तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में दर्द और थकान को भुलाकर टीम के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सिराज ने लगातार सभी पांच टेस्ट मैचों में लंबे स्पेल डाले और पंत ने चौथे टेस्ट में पैर में फ्रैक्चर के बावजूद बैटिंग की।

वर्कलोड शब्द को हटा देना चाहिए
गावस्कर ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारतीय क्रिकेट से वर्कलोड शब्द ही हट जाए। सिराज ने इसे पूरी तरह झूठा साबित कर दिया है। जब आप देश के लिए खेल रहे हैं तो दर्द और थकान की चिंता मत कीजिए। जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, क्या वो ठंड की शिकायत करते हैं? नहीं। तो फिर खिलाड़ी क्यों थकान की बात करते हैं? बता दें कि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को वर्कलोड मैनजमेंट को देखते हुए इस सीरीज के दो मैचों में आराम दिया गया था।
गावस्कर के बायन के बाद छिड़ी बहस
उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों को समझना चाहिए कि वे 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि गर्व और जिम्मेदारी की बात है। गावस्कर का मानना है कि पुराने ज़माने में खिलाड़ी चोट के बावजूद मैदान पर डटे रहते थे और यही जज़्बा आज के खिलाड़ियों में भी होना चाहिए। गावस्कर की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनकी सोच से सहमत हैं तो कुछ आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस और रेस्ट की अहमियत को भी मानते हैं।












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