IND vs AUS: सूर्या क्या नागपुर में डेब्यू करने वाले जडेजा और रूट की तरह चमकेंगे?
नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में 11 साल पहले इंग्लैंड के जो रूट और भारत के रवीन्द्र जडेजा ने अपने टेस्ट डेब्यू किया था। क्या सूर्यकुमार भी इनकी तरह चमकेंगे?

नागपुर का विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम। टी-20 के बादशाह सूर्य कुमार यादव ने इस मैदान पर अपने टेस्ट जीवन की शुरुआत की। इसी मैदान पर 11 साल पहले इंग्लैंड के जो रूट और भारत के रवीन्द्र जडेजा ने अपने टेस्ट डेब्यू किया था। रूट और जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े। जून 2022 में रूट टेस्ट क्रिकेट के नम्बर एकबल्लेबाज थे। 2018 में रवीन्द्र जडेजा टेस्ट क्रिकेट के नम्बर एक ऑलराउंडर थे। मार्च 2017 में वे दुनिया के नम्बर एक गेंदबाज थे। सूर्य कुमार यादव अभी दुनिया के नम्बर एक टी-20 बल्लेबाज हैं। क्या वे टेस्ट क्रिकेट में भी ये मुकाम हासिल कर पाएंगे ? क्या रूट और जडेजा की तरह नागपुर की पिच सूर्या के लिए भाग्यशाली साबित होगी ?
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इसलिए चुना सूर्या को
टेस्ट क्रिकेट में जब पिच से स्पिनर को मदद मिलने लगती है तब टिक कर खेलना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में रक्षात्मक बल्लेबाजी काम नहीं आती। तब सुरक्षा के लिए आक्रमण की नीति अपनानी पड़ती है। टी-20 में सूर्य कुमार यादव ने जो विस्मयकारी पारियां खेली हैं वह उनकी विशिष्ट प्रतिभा का प्रमाण हैं। उन्होंने कुछ ऐसे शॉट्स इजाद किये हैं जो सिर्फ वही खेल सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में अभी तक ऐसे शॉट्स नहीं खेले गये हैं। लेकिन अब सूर्या लाल गेंद के गेम को भी बदल सकते हैं। खास कर तब जब स्पिनर नाथन लियोन और टॉड मर्फी हावी होने की कोशिश करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली पारी में जिस तरह से जडेजा और अश्विन ने अपनी घुमती गेंदों से असर डाला उसको देखते हुए लियोन और मर्फी भी प्रभावशाली हो सकते हैं। तब सूर्या की तेज-तर्रार बैटिंग उनको काउंटर कर सकती है। हिटिंग एबिलिटी के कारण ही उनका टेस्ट टीम में चयन हुआ है। वे करिश्मा करने वाले खिलाड़ी हैं और इस बड़े मौके को वे जाया नहीं करेंगे। वे जानते हैं कि अगर मिडिल ऑर्डर में जगह बनाये रखनी है तो अपने नाम के अनुरूप खेलना होगा। वर्ना कई खिलाड़ी यह जगह लेने के लिए उनके पीछे खड़े हैं।

क्या रूट की तरह चमकेंगे सूर्या ?
2012 में जो रूट ने नागपुर में पहला टेस्ट मैच खेला था। तब इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टर कुक थे। इस टेस्ट मैच में रूट ने डेब्यू करते हुए पहली पारी में 73 रन बनाये थे। उन्हें लेग स्पिनर पीयूष चावला ने आउट किया था। उस मैच में भी स्पिनरों ने जलवा दिखाया था। पहली पारी में चावला ने 4 विकेट लिये थे। भारत के खिलाफ इंग्लैंड के ग्रीम स्वान ने 3 विकेट लिये थे। ये टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया था। इसके अलावा भारत के मुरली विजय ने भी नागपुर में ही टेस्ट डेब्यू किया था। 2008 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चौथा टेस्ट मैच खेला गया था। मुरली विजय ने पहली पारी में 33 और दूसरी पारी में 41 रन बनाये थे। वे भारत के सफल सलामी बल्लेबाज बने। उन्होंने भारत के लिए 61 टेस्ट खेले और 12 शतक लगाये। 2010 में इसी मैदान पर भारत के एस बद्रीनाथ और ऋद्धिमान साहा ने भी अपने जीवन का पहला टेस्ट मैच खेला था। बद्रीनाथ तो ज्यादा सफल नहीं रहे। उन्होंने केवल दो टेस्ट मैच खेले। लेकिन साहा ने विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में 40 टेस्ट खेले।

जडेजा के लिए नागपुर यादगार मैदान
रवीन्द्र जडेजा के लिए नागपुर एक यादगार मुकाम है। उन्होंने यहीं अपने टेस्ट जीवन की शुरुआत की । चोट के बाद इसी मैदान पर वापसी की। ये वापसी भी शानदार और यादगार रही। उन्होंने 5 विकेट लिये। 11वीं बार उन्होंने पांच या इससे अधिक विकेट लिये। जिस तरह से जडेजा ने मार्नस लाबुशेन और स्टिव स्मिथ का विकेट लिया वह उनकी काबिलियत का प्रमाण है। उन्होंने साबित कर दिया के वे टीम इंडिया के लिए कितने अहम खिलाड़ी हैं। जब लाबुशेन और स्मिथ एक मजबूत साझदारी की तरफ बढ़ रहे थे तब जडेजा ने ये साझेदारी तोड़ी। क्रिकेट विशेषज्ञ संजय बांगड़ ने जडेजा की लाजवाब गेंदबाजी का विश्लेषण कुछ इस प्रकार किया- नागपुर की पिच पर जिस स्पिन का अनुमान लगाया गया था गेंद उतनी टर्न नहीं हो रही थी। पिछले दो साल की तुलना में गेंद कम स्पिन (2.6 डिग्री टर्न) हुई। लेकिन जडेजा ने अपना हुनर दिखाया। उन्होंने 36 वें ओवर की पहली गेंद लाबुशेन को डाली जो 1.6 डिग्री टर्न हुई। जिस पांचवी गेंद पर उन्होंने लाबुशेन को आउट किया वह 7.5 डिग्री टर्न हुई। स्मिथ भी उनकी गेंद समझ नहीं पाए। कौन सी गेंद सीधी रहेगी और कौन सी गेंद घुमेगी, वे बिल्कुल समझ नहीं पा रहे थे। आखिरकार वे बोल्ड हो गये।












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