IND vs AUS: करारी हार के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली, टीम सेलेक्शन और बैटिंग स्किल पर उठे सवाल

नागपुर टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम हर विभाग में पिछड़ गई थी, बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में मेहमान टीम कुछ खास नहीं कर पाई थी।

Australia Team

IND vs AUS 1st Test: नागपुर टेस्ट में हार के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली मची हुई है। इसे ऑस्ट्रेलिया की सबसे शर्मनाक हार में से एक बताया जा रहा है। दूसरी पारी में आस्ट्रलियाई टीम सिर्फ 32.3 ओवर ही खेल कर 91 पर ऑलआउट हो गयी। भारत में सबसे कम टेस्ट स्कोर बना कर जिल्लत झेलनी पड़ी। दुनिया के नम्बर एक टेस्ट टीम की ऐसी दुर्गति ? पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर और मार्क टेलर टीम के इस प्रदर्शन से बहुत निराश हैं। अब टीम के चयन पर सवाल उठ रहे हैं। बल्लेबाजों की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।

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इसी पिच पर तो जडेजा-अक्षर ने भी बैटिंग की

ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट समीक्षक भी अब कह रहे हैं कि पिच कोई समस्या नहीं थी। रवीन्द्र जडेजा और अक्षर पटेल ने इसी पिच पर टिक कर बता दिया कि रन बनाये जा सकते हैं। उन्होंने बनाया भी। इसी पिच पर रोहित शर्मा ने 212 गेंदे खेलीं। पौने छह घंटे तक बैटिंग की। टॉड मर्फी और नाथन लियोन की घुमती हुई गेंदों का बखूबी सामना किया। यानी पिच नहीं, खिलाड़ी की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण थी। अगर पिच स्पिनरों की मददगार थी तो इसका फायदा ऑस्ट्रेलिया को भी तो मिला। मर्फी ने अपने डेब्यू टेस्ट में सात विकेट लिये। उन्होंने शुरुआती 4 विकेट लेकर भारत का स्कोर 4 विकेट पर 151 कर दिया। लेकिन नाथन लियोन उनका साथ नहीं दे पाये। अगर लियोन नहीं चले तो इसमें पिच का क्या दोष ?

इस पिच पर किस तरह बैटिंग करनी थी ?

इस पिच पर किस तरह से बल्लेबाजी होनी चाहिए थी ? इस सवाल का जवाब रोहित शर्मा के बयान से मिलता है। रोहित ने अश्विन को दिये इंटरव्यू में कहा, मैं आसानी से अपना विकेट नहीं खोना चाहता था। मैं सोच रहा था कि पिच पर टिकने के लिए क्या करना चाहिए ? मुझे स्कूल प्रैक्टिस के शुरुआती दिन याद आये। डाउन द ट्रैक शॉट मारना है। गेंद हवा में नहीं खेलनी है। गेंद की पिच तके जाना है और स्पिन को काटना है। स्वीप या रिवर्स स्वीप भी एक अच्छा विकल्प था। लेकिन पिच पर बाउंस असमान थी। कोई गेंद एकदम से उछल जाती और कोई गेंद नीचे रह जाती। तब मैंने तय कर लिया कि अब स्वीप शॉट भी नहीं खेलना है। रन बनाने के लिए खराब गेंदों का इंतजार करते रहा।

धैर्य नहीं दिखाया

लेकिन ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज खेले कैसे ? दूसरी पारी में जब ऑस्ट्रेलिया को बड़े स्कोर की जरूरत थी तब उसके बल्लेबाजों ने धैर्य नहीं दिखाया। उस्मान ख्वाजा खुद को स्पिन का अच्छा खिलाड़ी मानते हैं। लेकिन नागपुर टेस्ट में अश्विन वे उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लिया। अश्विन के हाथ में बिल्कुल नयी गेंद थी। रोहित शर्मा ने रणनीति के तहत मैच का दूसरा ओवर ही उन्हें सौंप दिया था। लाल चमचमाती हुई गेंद को जब स्पिनर फेंकता है तो क्या होता है, ख्वाजा इस बात को समझ नहीं सके। दूसरी गेंद पर वे चौका मार चुके थे। अश्विन ने पांचवी गेंद लेफ्टहैंडर के लिए ऑफ स्टंप पर डाली और ड्राइव करने के लिए ललचाया। ख्वाजा जाल में फंस गये उन्होंने ड्राइव के लिए बल्ला तेजी से घुमाया। गेंद को थोड़ी ज्यादा उछाल मिली थी और स्पिन हो कर बाहर की तरफ निकल रही थी। नतीजतन गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर स्लिप में खड़े कोहली के हाथों में समा गयी।

स्पिन नहीं खेल पाये कंगारू

दूसरी पारी का दूसरा ओवर नयी गेंद के साथ स्पिनर कर रहा था। पिच पर असमान उछाल थी और गेंद टर्न भी हो रही थी। 7 रन पर पहला विकेट गिर चुका था। ऐसी स्थिति में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को अपना गेम प्लान बदलना चाहिए था। स्पिनर को बैकफुट पर खेलने के लिए गेंद की लाइन को समझना बहुत जरूरी है। अगर गेंद की लाइन से चूके तो पगबाधा आउट होने का खतरा बढ़ जाता है। मार्नस लाबुशेन के साथ भी यही हुआ। वे जडेजा की एक गेंद खेलने के लिए क्रीज के बिल्कुल अंदर स्टंप के सामने आ गये। उन्होंने डिफेंस करने के लिए बल्ला आग बढ़ाया तब तक गेंद स्पिन हो कर उनके पैड जा टकरायी। वे पगबाधा आउट करार दिये गये। किसी बल्लेबाज ने स्टीव स्मिथ का साथ नहीं दिया। अनुभवी डेविड वार्नर भी अश्विन की गेंद की लाइन से धोखा का गये। उन्होंने मिडिल स्टंप की तरफ आ रही गेंद को रक्षात्मक तरीके से खेलने के लिए बल्ला आगे वढ़ाया। लेकिन तब तक गेंद स्पिन हो कर लेग स्टंप की तरफ घुम गयी और वार्नर के पैड से जा टकरायी। वे भी लेग बिफोर विकेट आउट हुए।

बल्लेबाजी में कौशल की कमी

ये बात किसी से छिपी नहीं है कि आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज स्पिन के नाम से बहुत घबराते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर उन्हें खेलने में बहुत परेशानी होती है। पिछले साल जून-जुलाई में ऑस्ट्रेलिया की टीम श्रीलंका गयी थी। पहला टेस्ट ऑस्ट्रेलिया ने जीता था। लेकिन दूसरे टेस्ट में वह एक नये स्पिनर के सामने धराशायी हो गया और पारी के अंतर से हारना पड़ा। श्रीलंका ने दिनेश चांदीमल के दोहरे शतक के दम पर 554 का विशाल स्कोर बनाया था। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम पहली पारी में 364 और दूसरी पारी में केवल 151 रन ही बना सकी थी। श्रीलंका के स्पिनर प्रभाथ जयसूर्या ने इस टेस्ट में डेब्यू किया था। उन्होंने पहली पारी में 6 और दूसरी पारी में भी 6 विकेट लिये थे।

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