16 साल की उम्र में कैंसर से लड़े,आज हैं टी-20 के कामयाब फिनिशर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज 1-1 से बराबर है। हैदराबाद का मैच फाइनल की तरह है। जो जीतेगा सीरीज उसके नाम होगी। हैदराबाद में भारत जीत सकता है।

नई दिल्ली, 25 सितंबर: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज 1-1 से बराबर है। हैदराबाद का मैच फाइनल की तरह है। जो जीतेगा सीरीज उसके नाम होगी। हैदराबाद में भारत जीत सकता है। लेकिन भारत की जीत की राह में मैथ्यू वेड सबसे बड़ा रोड़ा हैं। अगर ऑस्ट्रेलिया को रन चेज का मौका मिला तो मैथ्यू वेड का तूफानी बल्ला किसी भी टरगेट को सहज बना देगा। पिछले दो मैचों में वेड ने आखिरी ओवरों में प्रलयंकारी बैटिंग की है। वो तो गनीमत कहिए कि नागपुर में भारत को रनों पीछा करना था जिससे वह जीत गया। वर्ना वेड ने तो भारत से मैच छीनने में कोई कसर नहीं रखी थी। उन्होंने हर्षल पटेल के आठवें और अंतिम ओवर में तीन छक्के मारे थे। 20 गेदों में 43 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली थी। मोहाली के मैच में भी वेड की धांसू बैटिंग की वजह से भारत 208 रन बना कर भी हार गया था। मैच फिनिशर के रूप में वे ऑस्ट्रेलिया के लिए लाजवाब बैटिंग कर रहे हैं। जैसे कभी माइकल बेवन वनडे में ऑस्ट्रेलिया के वेस्ट फिनिशर थे वैसे अभी मैथ्यू वेड टी-20 में तहलका मचाए हुए हैं।

मैथ्यू वेड एक कामयाब फिनिशर

मैथ्यू वेड एक कामयाब फिनिशर

मोहाली में वेड की विध्वंसक बैटिंग ने भारत के जबड़े से जीत छीन ली थी। ऑस्ट्रेलिया को अंतिम तीन ओवरों में 40 रन बनाने थे। हर्षल पटेल के 18वें ओवर में वेड ने रौद्र रूप धारण कर लिया था। उन्होंने तीन छक्के ठोक कर मैच का रूख ही बदल दिया। इस ओवर में 22 रन बने थे। वेड यहीं नहीं रुके। उन्होंने भुवनेश्वर के 19वें ओवर में तीन चौके लगाये। कुल 16 रन बने। 20वें ओवर की महज औपचारिकता बची थी। दो रन बनाने थे। दूसरी ही गेंद पर जीत का लक्ष्य पूरा हो गया। वेड ने 21 गेंदों 45 रनों की पारी खेली थी। इस तरह भारत 208 रन बना कर भी हार गया। इसलिए दुआ कीजिए कि हैदराबाद में ऐसी कोई नौबत न आए। या तो भारत को रन चेज का अवसर मिले या फिर वेड का विकेट मिल जाए।

16 साल की उम्र में कैंसर से जूझे

16 साल की उम्र में कैंसर से जूझे

मैथ्यू वेड कई झंझावातों से लड़ कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं। जब वे 16 साल के थे तब वे टेस्टीकुलर कैंसर का शिकार हो गये थे। उन्हें कीमथेरेपी की कष्टदायक प्रक्रिया से जूझना पड़ा। ठीक होने के बाद 19 साल की उम्र में जब क्रिकेट करियर शुरू किया तो अपने साथी खिलाड़ी टिम पेन से जबर्दस्त होड़ करनी पड़ी। दोनों विकेटकीपर बल्लेबाज थे। 2011 में जब उनका ऑस्ट्रेलिया की टी-20 टीम में चयन हुआ तो उन्हें टेस्ट मैच का खिलाड़ी बता दिया गया। 2012 में वे टेस्ट टीम में चुने गये। उसी साल वनडे में डेब्यू हुआ। वे तीनों फॉरमेट के बीच झूलते रहे और किसी में स्थायी जगह नहीं बना पाये। 2019 में उनकी किस्मत ने फिर पलटा काया। वे एशेज के लिए चुने गये। उन्होंने दो शतक मार कर चयनकर्तचों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। जब कुछ समय के लिए डेविड वार्नर टीम से बाहर थे तब वे टी-20 में ओपनर के रूप में खेले। आखिरकार 2020-21 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया का नम्बर एक (टी-20) विकेटकीपर बल्लेबाज माना गया और उन्हें मैच फिनिशर की भूमिका सौंपी गयी। तब से वे अंतिम चार ओवरों के बीच तेज गेंदबाजों के खिलाफ 183.27 की स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हैं।

यूं पलटी किस्मत

यूं पलटी किस्मत

पिछले साल की टी-20 विश्वकप प्रतियोगिता उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हुई। सेमीफाइनल में उन्होंने पाकिस्तानी खेमे में तबाही मचा दी थी। पाकिस्तान की शान समझे जाने वाले शाहीन आफरीदी के 19वें ओवर में तीन लगातार छक्के मार कर ऑस्ट्रेलिया को रोमांचक जीत दिलायी थी। फिर फाइनल जीत कर ऑस्ट्रेलिया विश्वविजेता बना था। इसके बाद उनकी किस्मत का सितारा बुलंदी पर पहुंच गया। तब से वे ऑस्ट्रेलिया के लिए कामयाब फिनिशर की भूमिका निभा रहे हैं। टी-20 विश्वकप के लिए वे आस्ट्रेलियाई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा हैं। उन्होंने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के विश्वकप दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी। हालांकि वेड ने 10 साल पहले ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। लेकिन ब्रेड हैडिन और टिम पेन की मौजूदगी में ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं ने उन्हे नजरअंदाज कर दिया था।

10 साल पहले भी भारत के खिलाफ विस्फोटक पारी

10 साल पहले भी भारत के खिलाफ विस्फोटक पारी

2012 में सिडनी में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच टी-20 का मैच था। इस मैच से पहले ब्रेड हैडिन और टिम पेन घायल हो गये थे। संयोग से मैथ्यू वेड को मौका मिल गया। वेड ने इस मौके को दोनों हाथों से लपका था। उन्होंने डेविड वार्नर के साथ पारी शुरू की थी। वार्नर कुछ सोच पाते की वेड ने एकबारगी से रफ्तार पकड़ ली। केवल 34 गेंदों पर अर्धशतक जमा दिया। कुल मिला कर 43 गेंदों पर 72 रनों की तेजतर्रार पारी खेली। उन्होंने 5 चौके और 3 छक्के लगाये थे। वार्नर का बड़ा नाम था लेकिन वे 25 रन ही बना सके थे। ऑस्ट्रेलिया ने 171/4 का स्कोर खड़ा किया था। लेकिन भारत 6 विकेट पर 140 रन ही बना सका था। ऑस्ट्रेलिया ने 31 रनों से यह मैच जीता था।

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