तेजी से फैल रही T20 लीग से टेस्ट क्रिकेट को 'बचाने' के लिए ICC लाएगा 2 नियम, IPL में पहले से हैं ये रूल
T20 क्रिकेट लीग की जकड़ से टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने 2 बड़े बदलाव करने का मन बना लिया जो जल्द ही लागू हो सकते हैं।
यह बदलाव बीसीसीआई द्वारा पहले से ही उठाए गए कदमों से प्रेरित है, जिनके तहत एक फ्रेंचाइजी अपनी टीम इलेवन में 4 से ज्यादा ओवरसीज खिलाड़ियों को नहीं लेगी।

दूसरा यह है कि ओवरसीज खिलाड़ियों को लेने के बाद उनके संबंधित बोर्ड को भी कुछ पैसा चुकाया जाएगा।
असल में जिस तरह से ट्रेंट बोल्ट, जेसन रॉय जैसे खिलाड़ियों ने अपने संबंधित क्रिकेट देशों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से पल्ला झाड़ा है, उसको देखते हुए आईसीसी के कान खड़े हो गए हैं। आईसीसी नहीं चाहता कि और बड़े बड़े खिलाड़ी T20 क्रिकेट के लिए इंटरनेशनल मैचों की बलि दे। खासकर टेस्ट क्रिकेट ज्यादा प्रभावित ना हों।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यूएई में इंटरनेशनल लीग T20 और यूएसए की मेजर लीग क्रिकेट में अपनी प्लेइंग इलेवन में 9 और 6 ओवरसीज खिलाड़ियों को लेने का प्रावधान भी किया है। अगर ये चलन बढ़ गया तो इंटरनेशनल क्रिकेट को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।
जेसन रॉय ऐसे पहले खिलाड़ी बने हैं जिन्होंने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के कॉन्ट्रैक्ट को साइन करने से मना किया है। द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्ट के मुताबिक आईसीसी इन सब चीजों को लेकर चिंतित है और उसने बीसीसीआई की राह पर चलने का फैसला किया है।
आईसीसी का ये नियम सभी फुल मेंबर देशों पर लागू रहेगा। अब आईसीसी के इस फैसले के चलते आईपीएल की उन फ्रेंचाइजी का मुंह भी बंद होता हुआ दिखाई दे रहा है जो अपनी प्लेइंग इलेवन में और ज्यादा ओवरसीज खिलाड़ियों को लेने की मांग करती रहती थी। इससे लीग क्रिकेट और ज्यादा लुभावनी बनती है।
बीसीसीआई काफी पहले से ही विदेशी खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने के लिए एनओसी देने के कारण उनके क्रिकेट बोर्डों को 10% पैसा चुकाता था। यह फीस आईपीएल में खिलाड़ियों को मिलने वाली रकम का 10% होती है। अब आईसीसी भी बाकी सभी क्रिकेट लीग में यह नियम अनिवार्य बनाने जा रहा है।
यानी, आंद्रे रसैल पाकिस्तान सुपर लीग और इंटरनेशनल लीग T20 में खेलते हैं तो पीसीबी और अमीरात क्रिकेट बोर्ड को 10% रकम क्रिकेट वेस्टइंडीज को चुकानी होगी। इसके पीछे वजह यह है कि बोर्ड अपने खिलाड़ियों को तैयार करता है और फ्रेंचाइजी क्रिकेट उन्हें खिलाकर मुनाफा कमाती हैं। इसलिए बोर्ड भी कुछ पैसा पाने का हकदारी है।
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