'अकेले मां का बच्चे पर अधिकार नहीं...,' कोर्ट ने शिखर धवन की पत्नी को बेटे को भारत लाने का दिया आदेश
क्रिकेटर शिखर धवन और उनकी पत्नी आयशा के बीच तलाक और बच्चे की कस्टडी को लेकर केस चल रहा है। इस बीच दिल्ली की एक अदालत ने धवन के नौ साल के बेटे को भारत लाने का आदेश दिया है।

Shikhar Dhawan: भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन के अपनी पत्नी आयशा मुखर्जी से अलग होने के बाद से उनका बेटा जोरावर भी ऑस्ट्रेलिया में अपनी मां के साथ रह रहा है। इस बीच दिल्ली की एक फैमिली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने क्रिकेटर शिखर धवन की अलग रह रही पत्नी आयशा को अपने नौ साल के बेटे को भारत लाने का आदेश दिया है।
दरअसल, कोर्ट ने यह कहते हुए ये फैसला सुनाया है कि अकेले मां का बच्चे पर अधिकार नहीं होता है, और आयशा मुखर्जी को अपने नौ साल के बेटे को भारत लाने का आदेश दिया है। शिखर और उनका परिवार अगस्त 2020 से बच्चे से नहीं मिला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे से नहीं मिलाने को लेकर कोर्ट ने उन्हें फटकार भी लगाई है।
तलाक और बच्चे की कस्टडी को लेकर चल रहा केस
शिखर धवन और उनकी पत्नी आयशा के बीच तलाक और बच्चे की कस्टडी को लेकर केस चल रहा है। इससे पहले धवन ने कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आयशा उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं। इस बीच अब कोर्ट ने उनके बच्चे को भारत लगाने का एक बड़ा आदेश सुना दिया है। दोनों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में कानूनी मामले दायर हैं।
जज हरीश कुमार ने ये फैसला सुनाया है। हालांकि, आयशा ने उस समय बच्चे को लाने पर आपत्ति जताई, उन्होंने तर्क दिया कि वह स्कूल नहीं जा पाएगा। इसके बाद इस तथ्य पर विचार करते हुए कि इस अवधि के दौरान बच्चे का स्कूल बंद रहेगा, इसके बाद आयशा ने फिर से आपत्ति जताई, यह तर्क देते हुए कि तारीख तय करने से पहले परिवार के अधिकांश सदस्यों से सलाह नहीं ली गई थी।
न्यायाधीश ने कहा कि आयशा इस बात का पर्याप्त आधार नहीं दे पाई है कि वह क्यों नहीं चाहती थी कि बच्चा धवन परिवार से न मिले। आदेश में कहा गया कि, 'वह क्यों नहीं चाहती कि बच्चा भारत में याचिकाकर्ता के घर और उसके रिश्तेदारों से परिचित हो। इसलिए, इस परिस्थिति में जब बच्चे की स्कूल की छुट्टी है, तो याचिकाकर्ता की बच्चे को कुछ दिनों के लिए भारत में रखने की इच्छा अवास्तविक नहीं कही जा सकती है। खासकर जब बच्चा याचिकाकर्ता के साथ सहज हो।'
न्यायाधीश ने कहा कि एक तरफ आयशा बच्चे के जीवन में धवन की महत्वपूर्ण भूमिका को समझने का दावा करती है और दूसरी तरफ वह बच्चे को उसके पिता और दादा-दादी से मिलाने के लिए लाने पर आपत्ति जता रही है। जज ने कहा कि 'यदि बच्चे के जीवन में पिता की महत्वपूर्ण भूमिका है तो उसके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वह उसे अवसर प्रदान करे ताकि वह बच्चे में उन मूल्यों को विकसित कर सके जिन्हें वह महत्वपूर्ण मानता है।












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