पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू करने वाला खिलाड़ी असली युद्ध में भाग गया, युसूफ पठान पैसों के लिए थे देशभक्त?
Yusuf Pathan: साल 2007 के टी20 वर्ल्ड कप में एक 24 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने फाइनल में डेब्यू किया, जिसका नाम था युसूफ पठान। पहले ही मैच में दो धाकड़ शॉट खेलकर इस प्लेयर ने प्रभावित करने का काम किया था। भारत ने उस वर्ल्ड कप में जीत दर्ज की और युसूफ पठान इन दो शॉट्स की वजह से ही रातोंरात हीरो बन गए।
इसके बाद उनको लगातार टीम इंडिया में खेलने का मौका मिलता चला गया और जीवन भी तेजी से पटरी पर दौड़ने लगा, हर भारतीय को इस प्लेयर पर गर्व महसूस होने लगा। इंटरनेशनल क्रिकेट से आईपीएल और अन्य लीग क्रिकेट खेलते हुए युसूफ पठान ने अच्छा धन अर्जित किया, सम्मान भी मिला।

फैन्स का प्यार उनको बराबर मिलता रहा और युसूफ पठान भी खुद को देशभक्त क्रिकेटर दर्शाते हुए रिटायरमेंट के बाद वेटरन क्रिकेटरों की लीग्स में खेलते रहे और भारत के फैन्स का प्यार और पैसा बटोरते चले गए। जब उनके सामने असली परीक्षा की घड़ी आई, तो उन फैन्स, चाहने वालों और पूरे देश का दिल तोड़ दिया। यहां युसूफ पठान ने दिखाया कि अब देश उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।
क्रिकेटर से राजनेता बनते ही बदली देशभक्ति
तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ सांसद बने युसूफ पठान ने दिखा कि देश अब उनके लिए कुछ नहीं है। क्रिकेट में देशभक्त बनकर पैसा छापने के बाद असली युद्ध आने पर मैदान छोड़कर भाग गए।
पहलगाम हमले के बाद किये गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए। आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका उजागर करने के लिए भारत सरकार ने अलग-अलग पार्टियों के कुछ सांसदों का चयन विदेश में जाने वाले डेलिगेशन के लिए किया। ये सभी सांसद पाकिस्तान के काले कारनामे बताने के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे।
युसूफ पठान के पास था बड़ा मौका
उनमें युसूफ पठान का नाम भी शामिल था, पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू करने वाले पठान के पास एक बार फिर से शानदार शॉट मारने का मौका आया लेकिन इस बार वह पीछे हट गए। देश से ऊपर पार्टी को रखते हुए युसूफ पठान ने दिखा दिया कि देश सिर्फ क्रिकेट से पैसे बनाने के लिए ही था। जब असल में देश को उनकी जरूरत है, तो वह कहीं छिप गए हैं।
युसूफ पठान ने भारत सरकार को बता दिया कि वह इस काम के लिए उपलब्ध नहीं हैं। दरअसल पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए ममत बनर्जी की सरकार ने यह दांव चला है। टीएमसी का कहना है कि डेलिगेशन में जाने के लिए पठान का चयन सरकार ने खुद किया है। पार्टी ने इसे तय नहीं किया था। खैर यह सब बहानेबाजी है, जिसे पूरा देश देख रहा है।
युसूफ पठान ने मारी पैर पर कुल्हाड़ी
युसूफ पठान की बतौर क्रिकेटर इज्जत थी। उनको खेल की वजह से दर्शकों ने बड़ा प्यार दिया, दौलत मिली और शोहरत भी मिली। उनका यह कदम अब पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। अभी वह वेटरन क्रिकेट लीग्स में खेलते हैं, अब अगर ऐसी कोई लीग में उनका नाम दिखेगा, तो दर्शकों की तरफ से सीधा बहिष्कार भी देखने को मिलेगा।
आने वाली पीढ़ियों तक को यह बात पता चलेगी कि भारत का एक ऐसा क्रिकेटर भी हुआ था, जिसने कमाई के लिए देश का नाम इस्तेमाल किया और असली जंग के मौके पर भाग खड़ा हुआ। यह समय चला जाएगा लेकिन पठान का फैसला सालों तक लोगों के जेहन में रहेगा।
पठान के लिए देश से बड़ी पार्टी
पठान यहाँ पार्टी की बात नहीं सुनते हुए देशहित के लिए डेलिगेशन में जाने का फैसला ले सकते थे। उससे एक सकारात्मक मैसेज भी जाता लेकिन उन्होंने टीएमसी को देश से ऊपर रखा, जिसे कोई भारतीय उचित नहीं मान रहा। वह शशि थरूर से ही सीख सकते थे, जिन्होंने कांग्रेस की बात सुने बिना सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर देशहित के लिए डेलिगेशन के साथ जाने का फैसला लिया।
युसूफ पठान के फैसले से एक ही संदेश जाता है कि जरूरत के समय उन्होंने देश से साथ दगा किया है। पार्टी कभी देश से बड़ी नहीं हो सकती। पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने एक कविता में यह कहा था कि सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए।












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