क्रिकेट की कलंक कथा : ना चेयरमैन, ना चीफ सेलेक्टर, BCCI का असल ‘मालिक’ कोई और !
टी-20 विश्वकप में भारतीय टीम की हार के बाद चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समिति को बर्खास्त कर दिया गया था। उनके काम को संतोषजनक नहीं माना गया था।

नये कानून और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भी बीसीसीआइ की कार्यप्रणाली पारदर्शी और नियमसम्मत नहीं हो पायी। विश्व के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड में अभी भी मनमानी और पक्षपात है। बोर्ड का अध्यक्ष तो कठपुतली है। उसको नचाने वाला कोई और है। बीसीसीआइ के मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने चूंकि खुद इन बातों का खुलासा किया है इसलिए इनकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। जिस खेल के भारत में करोड़ों लोग दीवाने हैं क्या उसकी संचालक संस्था पर ये कलंक लगना चाहिए था ? ये तो भारतीय खेल प्रेमियों की भावनाओं के साथ खेलवाड़ है।
मुख्य चयनकर्ता कठपुतली, असल आका कोई और
चेतन शर्मा ने जो कहा उसके मुताबिक बीसीसीआइ में तिकड़मबाजी और अंधेरगर्दी का आलम है। कहने के लिए बीसीसीआइ को पांच लोग चला रहे हैं लेकिन असल मालिक कोई और है। बकौल चेतन, हल्का भी धुआं उठेगा तो एक मिनट में एक्शन हो जाएगा। वो (असल आका) सीधा मुझे फोन करेगा। फिर मैं बोर्ड को फोन करूंगा। इसके बाद दोनों को (गड़बड़ करने वाले खिलाड़ी) बुला कर खड़ा किया जाएगा। हम तो सीधा ऐसे ही बोलते हैं, खेलना है क्रिकेट कि नहीं ? अगर नहीं खेलना है तो ओके, थैंक यू ! हमें आपकी जरूरत नहीं है। मतलब बोर्ड का असल मालिक 'वो' है जो किसी खिलाड़ी दंडित करने के लिए चेतन शर्मा के जरिये अपनी हनक दिखाता है। बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य चयनकर्ता उस आका के जीहुजूर हैं। यानी कुछ शक्तिशाली लोगों ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड को अपनी जागीर बना रखा है।
आराम के नाम पर ड्रॉप किया जाता है प्लेयर को
चेतन शर्मा ने खुलासा किया है कि अगर किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर करना होता है तो आराम के नाम पर उसका टीम से पत्ता कट जाता है। यानी टीम इंडिया के कोच और कप्तान जिस वर्कलोड मैनेमेंट की बात करते हैं दरअसल वो छिपा हुआ पनिशमेंट है। बड़े खिलाड़ियों को भी इसी तरह टीम से बाहर रखा जाता है। क्रिकेट बोर्ड की पोल खोलने वाले चेतन शर्मा भी खुद विवादों में रहे हैं। टी-20 विश्वकप में भारतीय टीम की हार के बाद चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समिति को बर्खास्त कर दिया गया था। उनके काम को संतोषजनक नहीं माना गया था। नयी चयन समिति के गठन के लिए इंटरव्यू लिये गये। वैंकटेश प्रसाद जैसे दिग्गज खिलाड़ी ने इसके लिए साउथ जोन से आवेदन किया था। उन्होंने 33 टेस्ट मैच में 96 विकेट लिये हैं। वे चयनकर्ता ही नहीं बल्कि मुख्य चयनकर्ता बनने के लिए सबसे मजबूत दावेदार थे। लेकिन उनको दरकिनार कर चेतन शर्मा को ही फिर मुख्य चयनकर्ता बना दिया गया। दो महीने में ऐसा क्या हो गया कि चेतन शर्मा अक्षम से सक्षम बन गये। उनको दोबारा मुख्य चयनकर्ता बनाये जाने पर बीसीसीआइ की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गयी थी।
बोर्ड में हिटलरशाही
भारतीय क्रिकेट बोर्ड दुनिया की सबसे धनी खेल संस्थाओं में एक है। इतनी धनी संस्था पर दबदबा के लिए प्रबंधकों के गुट आपस में टकराते रहते हैं। धन ही वह कारण है जिसकी वजह से बीसीसीआइ में गुटबाजी बनी रहती है। बस चेहरे बदल जाते हैं। आइपीएल के बाद तो बीसीसीआइ के पास कुबेर का खजना आ गया है। जहां अथाह पैसा हो वहां भ्रष्टाचार के आने में देर नहीं लगती। 2013 के आइपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में दिल्ली पुलिस ने श्रीसंत, अजीत चंदिला और अंकित चौहान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मुम्बई पुलिस ने बीसीसीआइ के तत्कालीन अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद मयप्पन को गिरफ्तार किया था। दामाद की गिरफ्तारी के बाद भी श्रीनिवासन पद से इस्तीफा नहीं देने पर अड़े हुए थे। उनकी ताकत के आगे कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया था। चौतरफा दबाव के बावजूद उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। उन्होंने बस इतनी मेहरबानी की कि स्पॉट फिक्सिंग जांच होने तक खुद का कामकाज से दूर कर लिया था। यानी बोर्ड में हिटलरशाही चलती रही है।
टीम इंडिया में इगो की समस्या पहले भी
चेतन शर्मा ने कप्तान और खिलाड़ी के रूप में विराट कोहली के इगो चर्चा की है। लेकिन कप्तान के इगो की समस्या पहले भी रही है। 2008 में वीरेन्द्र सहवाग तीन चार वनडे मैचों में सफल नहीं रहे। महेन्द्र सिंह धोनी तब कप्तान थे। उन्होंने सहवाग को टीम से निकाल दिया। सहवाग वनडे से संन्यास लेने की सोचने लगे। लेकिन सचिन तेंदुलकर ने उन्हें ऐसा करने से रोका। कुछ दिनों के बाद बीसीसीआइ के मुख्य चयनकर्ता के. श्रीकांत ने सहवाग से पूछा, आगे क्या करना है ? तब सहवाग ने कहा, तीन चार मैचों के आधार पर मुझे टीम से बाहर कर दिया गया तो इसमें मै क्या करूं ? अगर आपको मुझे प्लेइंग इलेवन में रखना है तब ही टीम में चयन करें। अगर सभी मैच खेलूंगा तभी टीम में रहूंगा वर्ना सेलेक्शन मत कीजिए। फिर टीम में सहवाग का चयन हुआ और उन्होंने शानदार खेल दिखाया। 2011 में भारतीय टीम को विश्व विजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने 175 रनों की धुआंधार पारी खेली थी। ये मसला तो 2008 में हल हो गया लेकिन 2012 में धोनी और सहवाग का मनमुटाव खुल कर सामने आ गया था












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