भारतीय बल्लेबाज क्यों नहीं करते गेंदबाजी? वर्ल्ड कप से पहले कोच राहुल द्रविड़ ने किया बड़ा खुलासा

ICC World Cup 2023: भारत की मेजबानी में आईसीसी वर्ल्ड कप का आगाज 5 अक्टूबर से होने जा रहा है। टूर्नामेंट में भारतीय टीम अपना पहला मैच 8 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चेन्नई में खेलेगी। इस बीच टीम इंडिया के हेड कोच राहुल द्रविड़ ने इस सवाल का जवाब दिया है कि भारतीय बल्लेबाज आखिर गेंदबाजी क्यों नहीं करते हैं।

द्रविड़ ने बताया कि, 'मुझे लगता है कि ऐसा नियम बदलने की वजह से हो सकता है। अचानक से ही आप सर्कल के अंदर चार क्षेत्ररक्षकों से पांच क्षेत्ररक्षकों को रखने लगे। मुझे लगता है कि इससे पार्ट टाइम बॉलर की बीच के ओवरों में गेंदबाजी करने की काबिलियत में तेजी से बदलाव हुआ है।'

virat kohli, rohit sharma

द्रविड़ ने विराट कोहली, रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर और सूर्यकुमार यादव के बचाव में कहा कि, 'मुझे लगता है कि यह नियम में बदलाव के कारण हो सकता है। अचानक आप सर्कल के अंदर चार फील्डर से पांच फील्डर तक पहुंच गए हैं। मुझे लगता है कि इससे पार्ट टाइम गेंदबाज की बीच में गेंदबाजी करने में सक्षम होने की क्षमता में काफी बदलाव आया है।'

दरअसल, सूर्यकुमार को कई साल पहले मुंबई इंडियंस के एक मैच के दौरान संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के लिए बुलाया गया था और उन्होंने फिर कभी गेंदबाजी नहीं की। शिखर धवन ने सूर्या से पहले थोड़ी बहुत गेंदबाजी की, लेकिन उन्होंने बाद में गेंदबाजी करना पूरी तरह से बंद कर दिया।

अगर इससे पहले के बल्लेबाजों पर नजर डालें तो हमें यह जानने में मदद मिलेगी कि क्या बदलाव आया है। सचिन तेंदुलकर के पास इनस्विंगर, आउटस्विंगर, लेग-ब्रेक और ऑफ-ब्रेक गेंदबाजी से 154 एकदिवसीय विकेट हैं। सौरव गांगुली के पास 100 विकेट हैं।

जबकि युवराज सिंह, जिनकी गेंदबाजी ने भारत को 2011 में विश्व कप जीतने में मदद की थी, उनके नाम 111 विकेट हैं। यदि ये नाम पर्याप्त नहीं हैं तो वीरेंद्र सहवाग (96 विकेट) और सुरेश रैना (36 रन) ने भी एमएस धोनी के नेतृत्व में योगदान दिया था।

द्रविड़ ने कहा कि 'इन नामों (सचिन, सौरव, सहवाग, युवराज, रैना) की गेंदबाजी का जिक्र इस स्टेज में करो तो इनमें से ज्यादातर खिलाड़ियों ने तब गेंदबाजी शुरु की जब सर्कल में केवल चार फील्डर हुआ करते थे। इस स्थिति में (सर्कल के अंदर पांच फील्डर) में आप गेंदबाजों को गंवा सकते हो और ऐसा हमारे साथ ही नहीं हुआ, बल्कि काफी टीमों ने ऐसा किया। अगर आप ध्यान दें तो अन्य टीमों में भी पार्टटाइम बॉलर्स की संख्या में कमी आयी है। ऐसा सिर्फ भारतीय टीम के लिए नहीं है।'

उन्होंने आगे बताया कि, 'ऐसा नहीं है कि वे नेट्स में गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं, बहुत सारे गेंदबाज कोशिश करते हैं, वे नेट्स में गेंदबाजी करते हैं। लेकिन अगर आपको बीच में गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिलता है तो अपना कौशल विकसित करना बहुत मुश्किल हो जाता है।'

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उन्होंने इसके लिए कप्तानों और कोचों के डिफेंसिव माइंडसेट्स को भी जिम्मेदार ठहराया, जो पार्टटाइम गेंदबाज पर दांव नहीं लगाना चाहते।

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