25 साल पहले बांग्लादेश के लिए सबसे भिड़ गया था BCCI, अब वही पाकिस्तान की गोद में बैठकर हुआ एहसान फरामोश
क्रिकेट की दुनिया में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अब उस मोड़ पर आ गए हैं जहाँ से वापसी मुश्किल नजर आ रही है। एक समय था जब टीम इंडिया और बीसीसीआई ने एक बड़े भाई की तरह बांग्लादेश का हाथ थामकर उसे क्रिकेट की दुनिया में पहचान दिलाई थी, लेकिन आज वही बांग्लादेश भारत की पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रहा है।
ताजा विवाद के बाद सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक एक ही बात गूंज रही है कि बांग्लादेश ने भारत के साथ बड़ी धोखेबाजी की है और वह साल 2000 का वह अहसान पूरी तरह भूल चुका है जिसने उनकी क्रिकेट की नींव रखी थी।

जब BCCI ने दुनिया के खिलाफ जाकर की थी मदद
इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 2000 में बांग्लादेश को 'टेस्ट स्टेटस' दिलाने के पीछे सबसे बड़ा हाथ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का ही था। उस समय दुनिया की कई दिग्गज टीमें बांग्लादेश को टेस्ट दर्जा देने के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन भारत ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और बांग्लादेश को क्रिकेट की मुख्यधारा में शामिल करवाया। इतना ही नहीं, बांग्लादेश ने अपना पहला ऐतिहासिक टेस्ट मैच भी भारत के ही खिलाफ खेला था। उस समय बीसीसीआई ने न केवल तकनीकी मदद की, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में भी पूरा सहयोग दिया था।
आईपीएल का बदला वर्ल्ड कप से?
क्रिकेट जगत तब हैरान रह गया जब बांग्लादेश ने अपने खिलाड़ियों को आगामी टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत भेजने से मना कर दिया। इस विवाद की जड़ में आईपीएल का एक छोटा सा फैसला है। बीसीसीआई ने सुरक्षा और नियमों के आधार पर उनके एक खिलाड़ी (मुस्तफिजुर रहमान) को आईपीएल से बाहर क्या किया, बांग्लादेश ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बना लिया।
आईपीएल एक घरेलू टूर्नामेंट है, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप आईसीसी का एक ग्लोबल इवेंट है। वैश्विक टूर्नामेंट का बहिष्कार करना न केवल खेल भावना के खिलाफ है, बल्कि यह बीसीसीआई और आईसीसी के साथ सीधी धोखेबाजी है। आज बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई को चुनौती दे रहा है। इसे अहसान फरामोशी ही कहा जाएगा कि जिस हाथ ने आपको चलना सिखाया, आज आप उसी को काटने की कोशिश कर रहे हैं।












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