रियो में पदक जीतकर पीवी सिंधु ने बदला अपना जीवन, बताया कैसे संघर्ष और सफलता का जश्न मनाया
भारतीय ओलंपिक पदक विजेता शटलर पीवी सिंधु ने रविवार को 2016 में रियो ओलंपिक में अपना पहला ओलंपिक पदक याद किया। उन्होंने कहा कि इसने उनके जीवन को बदल दिया है।
सिंधु ने 2016 में रियो ओलंपिक में स्पेन की कैरोलिना मारिन से हारकर रजत पदक जीता था। यह उनका पहला ओलंपिक पदक था।

सिंधु ने कहा, "सात साल पहले, मैंने एक ऐसी यात्रा पर शुरुआत की थी जिसने मेरे जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। यह विश्वास करना मुश्किल है कि उस बात को सात लंबे साल हो गए हैं। यह रजत पदक मेरे समर्पण, कड़ी मेहनत और मेरे कोच, साथियों और फैंस के अटूट समर्थन का एक प्रतीक था।"
उन्होंने आगे कैरोलिना के खिलाफ प्रतिद्वंद्विता की भी सराहा, जिनके खिलाफ वो 3 सेट का मैराथन फाइनल कुछ कम नहीं था।
सिंधु ने कहा, "यह सात साल का समय उतार-चढ़ाव, चुनौतियों और जीत का मिश्रण रहा है, लेकिन सबसे ऊपर, दृढ़ इच्छा शक्ति का एक प्रमाण है!"
सिंधु ने 2019 में BWF विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता, वे भारत की पहली और एकमात्र महिला विश्व चैंपियन बनीं। उन्होंने इससे पहले चार पदक जीते थे, जिनमें से दो रजत और दो कांस्य थे।
अप्रैल 2017 में, उन्होंने महिला खिलाड़ियों में विश्व में नंबर दो की अपनी सर्वश्रेष्ठ रैंक को हासिल किया था। उन्होंने टोक्यो 2020 ओलंपिक में महिला सिंगल इवेंट में भी कांस्य पदक जीता। सिंधु ने 2018 और 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला सिंगल और मिक्स टीम इवेंट में भी स्वर्ण और रजत पदक जीते।
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इससे पहले सिंधु ने 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में भी रजत पदक जीता। हालांकि, वह फिलहाल अपने करियर के खराब दौर से गुजर रही हैं, जिसमें फॉर्म और चोटें शामिल हैं।
इस दौरान कई टूर्नामेंट में शिरकत करने के बावजूद अब अगस्त 2023 में चीन में होने वाले एशियाई खेलों से पहले, सिंधु अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में वापस आने और भारत के लिए पदक जीतने की कोशिश करेंगी।












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