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सिंगरौली-प्रयागराज हाइवे पर भूमाफियाओं का खेल; मुआवजे के लालच में लोगों ने बनाए 2500 नकली मकान

Singrauli News: मध्य प्रदेश का सिंगरौली-प्रयागराज हाईवे प्रोजेक्ट बनने से पहले ही विवादों में आ गया है। सिंगरौली वाले हिस्से में हाईवे के लिए सर्वे हो चुका है। जहां 4 माह पहले सिर्फ 500 मकान थे, वहां अब 2500 घर बनाकर तैयार हो गए हैं।

सिंगरौली‌ निर्माणाधीन प्रयागराज हाईवे पर ज्यादातर घर अधूरे बने हैं। यह मकान उस जगह बने हैं, जहां से हाईवे को जाना है। खेत के बजाय मकान पर मुआवजा अधिक मिलता है। इस वजह से अधिकारियों ने भी खाली जगहों पर अधूरे मकान बना दिए हैं। मुआवजे के खेल का पता चलते ही जिला प्रशासन भी सख्त हो गया है। उसने कार्रवाई की बात कही है।

Singrauli-Prayagraj Highway Land

भ्रष्टाचार का मामला सिंगरौली-प्रयागराज हाईवे का है। इस हाईवे का 70 किमी हिस्सा सिंगरौली जिले में आता है। इसके लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। हाईवे प्रोजेक्ट पास होने के बाद ही अधिक मुआवजा दिलाने के लिए दलालों का रैकेट सक्रिय हो गया और कुछ ही महीनों में ढाई हजार मकान बन गए।

लोगों का कहना है कि हाईवे प्रोजेक्ट पास होने के बाद यहां की जमीन खरीदने वालों में नेता और अफसर भी पीछे नहीं रहे। जमीन मालिक मकान बनवाने के लिए सौदे भी कर रहे हैं। यह बात सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है।

सिंगरौली-प्रयागराज हाईवे का 70 किमी हिस्सा सिंगरौली जिले की चितरंगी और दुधमनिया तहसील से होकर बना है। 740 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में इन दोनों तहसीलों के 33 गांवों की जमीन फस रही है। अधिग्रहण की कार्यवाही मार्च में शुरू हुई। सर्वे शुरू होने के साथ ही यहां मकान बनाने पर रोक लग गई थी। जमीन की खरीद-फरोख्त भी नहीं हो सकती। प्रशासन ने इस संबंध में जानकारी दे दी है। नोटिस तक लगाए। इसके बाद भी किसानों ने मुआवजे के लिए नए फॉर्मूले पर काम शुरू कर दिया है।

जानिए क्या है मुआवजे का फार्मूला
मुआवजे के लिए खेतों में बने मकान आधे-अधूरे हैं। किसी में सिर्फ ईटें रखी गई हैं तो किसी में कच्चा घर बना हुआ है। कुछ तो सिर्फ शेड बने हैं। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने तो बाहरी राज्यों के लोगों से स्टाम्प पेपर पर सौदे भी कर लिए हैं। इसके अनुसार आवास से जो भी मुआवजा मिलेगा, उसमें से 80 प्रतिशत और 20 प्रतिशत का बंटवारा होगा। यानी मुआवजे की बढ़ी हुई राशि का 80 प्रतिशत मकान बनाने वाले को और 20 प्रतिशत राशि जमीन मालिक को मिलेगी।

केंद्र तक गई शिकायत
नेशनल हाईवे बनाने वाली केंद्रीय एजेंसी नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया और राज्य के लोक निर्माण विभाग को भी शिकायतें पहुंची हैं। इसमें कहा गया है कि लोग मुआवजे के लिए घर बना रहे हैं। चितरंगी एसडीएम सुरेश जाधव का कहना है कि सर्वे हुआ तो सिर्फ 500 घर ही आ रहे थे। अब हाईवे की जमीन पर 2,500 मकान बन चुके हैं। सर्वे के बाद बने घरों पर मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

10 गुना तक बढ़ गई जमीन की कीमत
हाईवे के सर्वे से पहले इस क्षेत्र में जमीन का रेट 8 हजार रुपये प्रति डेसिमल था, जो बढ़कर 80 हजार रुपये हो चुका है। मकान बनाने के बाद एक्सपर्ट से उसका वैल्युएशन कराया जाता है। उसके आधार पर मुआवजे की मांग की जाती है। मकान से लेकर बोर तक के पैसे मिलते हैं। सरकार का साफ कहना है कि सर्वे के बाद बने घरों पर मुआवजा नहीं मिलेगा। इसके बाद भी दलाल सक्रिय है और मुआवजा दिलाने का झांसा देकर जमीन मालिकों और अन्य लोगों को फंसा रहे हैं। यदि मुआवजा नहीं मिला तो जमीन पर मकान बनाने वालों को भारी नुकसान होगा।

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