कुल्लू बस हादसे में बड़ा खुलासा, ड्राइवर के बारे में सामने आई ये बात
शिमला। कुल्ले के बंजार बस हादसे में मरने वालों की तादाद बढ़कर 44 हो गई, जबकि 31 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ये हादसा अपने पीछे कई सवाल छोड़ कर चला गया है। 52 सीटर बस में करीब 75 लोग सवार थे। लेकिन हैरानी की बात है कि कुल्लू से लेकर बंजार तक किसी भी जगह बस को यातायात पुलिस ने नहीं रोका, न ही किसी ने आवरलोडिंग के लिए टोका। यही नहीं खटारा हो चुकी बस आराम से सवारियां ढो रही थी व आरटीओ ने भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। यही नहीं चालक भी नौसिखिया था। वह इस बस को पहली बार चला रहा था और बस के खाई में लुढ़कने से पहले ही बस चालक ने ऐन मौके पर बस से छलांग लगा दी थी। चालक का अभी तक कोई अता-पता नहीं चल पाया है।

बस की छत पर भी बैठे थे लोग
पुलिस के अनुसार, खटारा हो चुकी महावीर कोच बस (एचपी 65-7065) ओवरलोड होकर बंजार से गाड़ागुशैणी की तरफ जा रही थी। बस जैसे ही बंजार से करीब एक किलोमीटर आगे तीखे बयोठ मोड़ के पास पहुंची तो अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। सड़क से गिरते ही बस पहाड़ी से जा टकराई, जिससे उसके दो हिस्से हो गए। बस के खाई में गिरने से परखच्चे उड़ गए। बस की छत अलग होकर पहाड़ी पर ही फंस गई, जबकि निचला हिस्सा खड्ड में जा पहुंचा। टायर भी अलग हो गए थे। 42 सीटर बस में 75 से ज्यादा लोग सवार थे। छत पर भी सवारियां बैठा रखी थीं। हादसे के बाद घटनास्थल और आसपास चीख-पुकार मच गई। बस में करीब दो दर्जन स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी सवार थे। हादसे में पत्रकार मोहन लाल ठाकुर भी हादसे के शिकार हो गए हैं। वे अपनी दो बेटियों के साथ अपने गांव जा रहे थे। हादसे में उनकी एक बेटी की भी मौत हो गई है, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल है।

खराब सड़क भी बनी हादसे की एक वजह
हादसे में खराब सड़क भी एक वजह रही है। सड़क के किनारों पर न कोई पैरापिट थे और न ही कोई क्रैश बैरियर। सूचना के बाद पुलिस और आसपास के ग्रामीण घटना स्थल पर देवदूत बनकर पहुंचे। जिला भर से एंबुलेंस भेजी गईं। लोगों ने सबसे पहले हादसे में घायल हुए लोगों को बाहर निकाला। पहाड़ी पर फंसे कई घायलों को रस्सी के सहारे खड्ड में उतारा और बाद में लोगों ने पीठ पर उठाकर तार स्पैन (रस्सी का झूला) से सड़क तक पहुंचाया। यहां से 108 एबुंलेंस से घायलों को बंजार अस्पताल लाया गया। जिले की सभी एंबुलेंस घायलों को लाने में लगा दी गईं। इसके बाद हादसे में मृतकों को बाहर निकाला गया, जिनमें कई शव क्षत-विक्षत होकर खाई और पहाड़ी की ढलान पर झाड़ियों में बिखरे हुए थे। एसडीएम बंजार एमआर भारद्वाज ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया था। उपायुक्त कुल्लू भी पूरे प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचीं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों और घायलों को फौरी राहत प्रदान की है।

हादसे में मारे गए लोगों की लिस्ट
पुष्पा देवी (25) निवासी भूमिया, बिशन सिंह (42) छुनार, आदित्य शर्मा (22) पेडचा, मीना देवी (28) धार, चांदनी (20) तहसील बालीचौकी, चरन सिंह (54) गडशाउ, डोला सिंह (56) पौड़ी, खजान सिंह (75) बाहू, दिजेंद्र (26) पेडचा, चंपा (26) गाड़ागुशैणी, कंडक्टर छोटू, यशपाल (36) मोहनी, सेस राम (80) मोहनी, पूर्ण चंद (24) थववाडी, कांता (20) बाहू, रमेश चंद (20) मोहनी, दुर्गा देवी (38) बछूट, पन्नू देवी (62), मोहन लाल (46) सूमतांदी, जाह्नवी (10) सूमतांदी, शांगरी देवी (75) गुशैणी, रीत राम (45) विगर, खीम सिंह (60) गाड़ागुशैणी, गीता देवी (20) वीहांवा, यमुना देवी धार तांदी, दीना नाथ (60) ददभास, दिनेश भूमिया (4), सेस राम (61) ढियों, पन्ना लाल पुजाली, रीता देवी बाहू, कुसुमलता (30) बछूट, धनेश्वरी बछूट सहित 44 मृतक शामिल हैं।

हिमाचल में इससे पहले हुए बड़े बस हादसे
9 अप्रैल 2018: नूरपुर में खाई में गिरी स्कूल बस, 23 बच्चों समेत 27 की मौत।
20 अप्रैल 2017: यात्रियों से भरी उत्तराखंड की ओवरलोड निजी बस शिमला के गुम्मा में खाई में गिरी, 45 की मौत।
5 नवंबर 2016: मंडी के बिंद्रावणी में ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत और 26 घायल।
20 मई 2016: चंबा में बस हादसे में 14 मरे, 31 घायल।
23 जुलाई 2015: कुल्लू में पार्वती नदी में गिरी बस, 31 लोग बहे।
21 अगस्त 2014: किन्नौर के रुतरंग में बास्पा नदी में गिरी बस 23 की मौत, 20 घायल।
27 सितंबर 2013: रेणुका में ददाहू-टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस गहरी खाई में गिरी। बस सवार सभी 21 लोगों की मौत।
8 मई 2013: मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे।
11 अगस्त 2012: चंबा-धुलाड़ा मार्ग पर गागला के पास ओवरलोड बस हादसा, 52 मरे।












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