Sukirti Madhav Mishra : UP के वो IPS जिनसे खौफ खाते हैं गैंगस्टर, 30 दिन में 22 ने किया सरेंडर
शामली, 29 जुलाई: वेस्ट यूपी का वो जिला जहां कभी बदमाशों का खौफ रहता था। अपराधी बेलगाम थे और बेखौफ आपराधिक वारदातों को अंजाम देते थे, उस जिले में अब पुलिस का इकबाल बुलंद हो चुका है। हम बात कर रहे हैं शामली जिले की, जहां एसपी सुकीर्ति माधव मिश्रा के खौफ से पिछले 30 दिनों के अंदर 22 गैंगस्टर थाने पहुंचकर सरेंडर कर चुके हैं। यही नहीं इन अपराधियों ने पुलिस के सामने ही अपराध से दूर रहने की कसम खाई। आरोपियों ने कहा कि वह जेल से वापसी के बाद सामान्य जीवन बिताएंगे। शामली में अपराधियों में इस खौफ के लिए लोग एसपी सुकीर्ति माधव मिश्रा को बधाई दे रहे हैं। वन इंडिया हिंदी आपको 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी सुकीर्ति माधव के बारे में बता रहा है।

2015 बैच के IPS अधिकारी हैं सुकीर्ति माधव
बिहार के जमुई जिले के गांव मलयपुर के रहने वाले सुकीर्ति माधव मिश्रा 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। सुकीर्ति माधव का जन्म 1988 में हुआ था। वह वर्तमान में यूपी के शामली जिले के एसपी हैं। सुकीर्ति माधव का जीवन संघर्षों में गुजरा। उन्होंने सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। पिता कृष्ण कांत मिश्रा जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक और मां कविता मिश्रा गृहणी हैं।

कोल इंडिया में मैनेजर के पद पर कर रहे थे नौकरी
एक इंटरव्यू में सुकीर्ति माध ने बताया था कि जब वह नौकरी कर रहे थे तब उनके जेहन में सिविल सर्विसेज को लेकर कोई ख्वाहिश नहीं थी। कोल इंडिया में मैनेजर पद पर काम करते हुए वह खुश थे। जब पिता ने कहा कि उनका सपना है कि समाज की सेवा के लिए आईपीएस ऑफिसर बनूं, तब मैंने इस बारे में सोचा। नौकरी करते हुए उन्हें करीब 2 साल हो चुके थे। पिता के कहने पर उन्होंने पहले सिविल सर्विसेस के बारे में जानना शुरू किया और फिर नौकरी करते-करते ही तैयारी शुरू कर दी।

15 लाख रु का पैकेज छोड़ ज्वॉइन की पुलिस सेवा
सुकीर्ति बताते हैं कि दो साल की तैयारी के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने सिविल सर्विसेज का पहला एग्जाम दिया और पहले ही प्रयास में उनका चयन हो गया। लेकिन तब उन्हें आईआरएस कैडर मिला था, जिसे छोड़कर उन्होंने फिर तैयारी की और दूसरे प्रयास में साल 2015-16 में आईपीएस कैडर मिल गया। इसके बाद सुकीर्ति ने 15 लाख रुपए सालाना की नौकरी छोड़ दी और पिता के सपने को पूरा करते हुए पुलिस सेवा को अपनाया।

'मैं खाकी हूं' कविता की वजह से चर्चा में रहे थे सुकीर्ति
कोरोना की पहली लहर के दौरान भी आईपीएस सुकीर्ति माधव चर्चा में आए थे। उन्होंने एक कविता लिखकर खाकी का दर्द बयां किया था। ये कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और सुर्कीति भी सुर्खियों में आ गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा आईपीएस अधिकारियों से उनके अनुभव के बारे में चर्चा के दौरान एमपी कैडर के युवा आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा को पीएम के सामने बोलने का मौका मिला। आदित्य मिश्रा ने अपने साथी कोरोना वॉरियर देवेंद्र चंद्रवंशी को याद करते हुए 'मैं खाकी हूं' कविता सुनाई। यह कविता एसपी सुकीर्ति माधव ने लिखी थी।

सुकीर्ति माधव की जीवनी
26 फरवरी 1988 में जन्मे सुकीर्ति माधव ने बिहार के जमुई जिले के गांव मलयपुर के सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद भुवनेश्वर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की थी। इसके बाद साल 2010 में एमएनआईटी दुर्गापुर से एमबीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद कोल इंडिया में मैनेजर पद की नौकरी करने चले गए। उन्हें दूसरे प्रयास में साल 2015-16 में आईपीएस कैडर मिला। वह एक दिसंबर 2020 से एसपी शामली के पद पर तैनात हैं।












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