भाजपा का 'गढ़' सतना सीट; रामानंद, गणेश और अब राकेश मिश्रा... 2024 में किसे मैदान में उतारेगी कांग्रेस?
MP Satna Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों को ऐलान अभी नहीं हुआ है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत तमाम पार्टियां प्रत्याशियों के चुनने में लग गई हैं।
ऐसे में Oneindia Hindi आपको ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर हाईप्रोफाइल सीटों का हाल बता रहा है। मध्य प्रदेश की सतना सीट से किसे मिलेगा टिकट और कौन करेगा वेट:-

सतना लोकसभा सीट विंध्य क्षेत्र का हिस्सा है। ये सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रही है। 2019 में यहां से भाजपा के गणेश सिंह सांसद चुने गए थे। वो चार बार के सांसद हैं और पार्टी के दिग्गज नेताओं में उनकी गिनती होती है।
गणेश सिंह ने सतना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 2019 में कांग्रेस के राजाराम त्रिपाठी को चुनाव हराया था। इस सीट पर पिछली बार कुल 11,13,656 वोट पड़े थे। इनमें से गणेश सिंह को आधे से भी ज़्यादा 5,88,753 वोट मिले थे। राजाराम त्रिपाठी को 3,57,280 वोट मिले।
सतना में भाजपा किस पर लगाएगी दांव: भाजपा में प्रत्याशी के तौर पर राकेश मिश्रा का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। ये गृह मंत्री के निजी सचिव रह चुके हैं और उनके काफी करीबी माने जाते हैं। पिछले कुछ सालों से राकेश मिश्रा ने इस इलाके में अपनी मौजूदगी दर्ज करते हुए कई हेल्थ कैंप लगाए और समाज कल्याण के काम किए।
मतलब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पीए, पहले अमित शाह और अब नड्डा का सारा कार्यालय का काम वही देखते हैं। वो पिछले कई सालों से सतना में भी उतने ही सक्रिय हैं और अपने पिता जी की स्मृति में संचालित ट्रस्ट के माध्यम से जनसेवा की गतिविधियां चला रहे हैं।
राकेश मिश्रा के बाद डॉक्टर स्वप्ना वर्मा का नाम चल रहा है। वर्मा ने पिछले साल ही बीजेपी ज्वॉइन की है। ये BJP प्रदेश कार्य समिति की सदस्य हैं। रामपुर बाघेलान के बघेल परिवार की नातिन हैं। और अमित शाह की करीबी हैं । स्वास्थ्य शिविर मात्र दिखावा है वे स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से राजनीति में कदम रख रही हैं।
संघ के बड़े नेता नानाजी देशमुख की दत्तक बेटी मानी जाने वाली डॉ नंदिता पाठक को भी पार्टी सतना से टिकट दे सकती है। लंबे समय तक इन्होंने चित्रकूट क्षेत्र में समाजसेवा का काम किया है। संजय तीर्थवानी भी भारतीय जनता पार्टी की लिस्ट में हैं। वो सिंधी समाज के एक जाने माने चेहरे के रूप में उभरे हैं।
इस सीट से प्रत्याशी के तौर पर कांग्रेस के दो विधायकों और एक पूर्व विधायक का नाम ज़ोरों पर चल रहा है। सबसे पहला नाम अजय सिंह राहुल भैया का है, जो कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। ये फिलहाल चुरहट विधानसभा सीट से विधायक हैं। सतना सीट से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को भी कांग्रेस पार्टी सतना से अपना प्रत्याशी बना सकती है। कुशावाहा की पिछड़े वोटों में अच्छी पैठ है, जिसका फायदा दूसरी सीटों पर भी मिल सकता है। लिस्ट में नीलांशु चतुर्वेदी का नाम भी है, जो पार्टी का ब्राह्मण चेहरा है। नीलांशु दो बार चित्रकूट से विधायक रह चुके हैं।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही कुछ सीटें सतना जिले से जीतती रही हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में पिछले 7 चुनाव से कांग्रेस की दाल नहीं गली। वर्ष 1991 में अंतिम बार पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अर्जुन सिंह ही यहां से सांसद चुने गए थे। उसके बाद से कोई चुनाव कांग्रेस नहीं जीत सकी। 1996 में हुए चुनाव में बीएसपी के नेता सुखलाल कुशवाहा ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को धूल चटाई थी् 1998 में रामानंद सिंह ने सतना में भाजपा की वापसी कराई। उसके बाद से कोई भी चुनाव भाजपा नहीं हारी है। 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 के लोकसभा चुनाव बीजेपी ही जीतती आ रही है। पिछले चार चुनाव भाजपा नेता गणेश सिंह ने जीते।
इसलिए कट सकता है गणेश सिंह का टिकट: इन दिनों सियासी गलियारों में सतना संसदीय सीट के बनते-बिगड़ते समीकरण की चर्चा है। हाल ही में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए गए सांसद गणेश सिंह हार गए। उन्हें सिद्धार्थ कुशवाहा ने हराया। बसपा से सांसद रहे सुखलाल कुशवाहा को साल 2004 में गणेश सिंह ने हराया था। सुखलाल के बेटे सिद्धार्थ ने गणेश सिंह को चुनाव हराकर अपने पिता की हार का बदला ले लिया।
सतना संसदीय क्षेत्र में कितनी विधानसभा शामिल: सतना, चित्रकूट, मैहर, रामपुर बघेलान, नागौद, रैगांव और अमरपाटन समेत सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
सतना की मतदाता: कुल मतदाता- 16,85,050 पुरुष मतदाता -8,81,863 महिला -8,03,180 थर्ड जेंडर -07
इन नेताओं ने किया प्रतिनिधित्व
1962 शिवदत्त उपाध्याय कांग्रेस
1967 देवेंद्र विजय सिंह कांग्रेस
1971 नरेंद्र सिंह जनसंघ
1977 दादा सुखेंद्र सिंह बीजेपी
1980 गुलशेर अहमद कांग्रेस
1984 अजीज कुरैशी कांग्रेस
1989 दादा सुखेंद्र सिंह बीजेपी
1991 अर्जुन सिंह कांग्रेस
1996 सुखलाल कुशवाहा बसपा
1998 रामानंद सिंह भाजपा
1999 रामानंद सिंह बीजेपी
2004 गणेश सिंह बीजेपी
2009 गणेश सिंह बीजेपी
2014 गणेश सिंह बीजेपी
2019 गणेश सिंह बीजेपी












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