Sambhal News: भीषण गर्मी में आग के बीच तपस्या कर रहे थे संत 'पागल बाबा', फिर जो हुआ उसे सुनकर हर कोई दुखी
Sambhal News: उत्तर प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में चारों तरफ आग जलाकर तपस्या कर रहे 70 वर्षीय एक साधु की मौत हो गई। तपस्या करने के लिए साधु द्वारा जिला प्रशासन से अनुमति भी ली गई थी।
साधु की मौत के बाद उनके सेवादार और भक्तों में शोक की लहर छा गई। संभावना जताई जा रही है कि भीषण गर्मी में आग के बीच तपस्या करने के दौरान तापमान बढ़ने से साधु की हालत खराब हो गई होगी और गर्मी के कारण ही उनकी मौत हुई है।

तपस्या करते समय अचानक बिगड़ी तबीयत
मूल रूप से अमेठी जनपद की शिव धाम सगरा महाकाल के रहने वाले संत पागल बाबा विश्व शांति और नशा मुक्ति के लिए अग्नि तपस्या करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अमेठी से संभल पहुंचकर जिला प्रशासन से तपस्या करने की अनुमति ली थी।
भीषण गर्मी में कैला देवी थाना क्षेत्र के बेनीपुर चक गांव में स्थित एक खेत में पागल बाबा अपने चारों तरफ अग्नि जलाकर तपस्या कर रहे थे। बाबा द्वारा तपस्या किए जाने की जानकारी मिलने के बाद काफी संख्या में गांव वाले उन्हें देखने के लिए भी पहुंच रहे थे।
बताया जा रहा है कि तपस्या प्रारंभ होने के बाद जिले के अधिकारी भी वहां पहुंचे थे। 23 मई से पागल बाबा की तपस्या प्रारंभ हुई थी। पागल बाबा रोजाना सुबह से लेकर शाम तक अग्नि के बीच में बैठ जाते और तपस्या करते। बाबा से जुड़े भक्तों का कहना है कि वह विश्व में शांति चाहते थे।
इसके अलावा पागल बाबा चाहते थे कि लोगों को नशा से मुक्ति मिले और सभी तरह की नशा सामग्रियों पर रोक लगाई जाए। इसी को लेकर पागल बाबा भीषण गर्मी में आग के बीच तपस्या कर रहे थे। बेनीपुर चक के अलावा आसपास के गांव के ग्रामीणों द्वारा भी बाबा को समर्थन मिल रहा था।
बताया जा रहा है कि रोजाना की तरह रविवार को भी पागल बाबा खेत में तपस्या करने बैठे इसी दौरान उनकी हालत अचानक खराब हो गई। हालत खराब होने के बाद सेवादार गजराज सिंह ने उन्हें पानी पिलाया। पानी पिलाने के बाद उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचा।
जिला अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों द्वारा संत पागल बाबा को मृत घोषित कर दिया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद सीडीओ और एसडीएम भी जिला अस्पताल पहुंच गए और बाबा के सेवादार से जानकारी ली। वहीं पागल बाबा की मौत हो जाने के बाद उनके भक्तों में अशोक की लहर है।












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