वाल्मीकि समाज की एक बेटी की शादी में पूरा गांव बना छावनी, गांव में पहली बार घोड़ी चढ़ा दूल्हा
उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में वाल्मीकि समाज की एक बरात चढ़ाने हेतु जनपद का पुलिस बल गांव की गलियों में चप्पे-चप्पे पर लगाया गया है। जी हाँ, एक शादी के लिए इतना इंतेज़ाम इसलिए किया गया है क्योंकि आज से लगभग 6 माह पहले गांव के ही महेंद्र सिंह की बेटी की बारात चढ़ने के दौरान बरात एवं घरात के लोगों के साथ गांव के ही चंद लोगों के द्वारा मारपीट किए जाने पर वाल्मीकि समाज के लोग भयभीत हो गए थे। वही इसी 25 नवम्बर को गांव के ही राजू वाल्मीकि की बेटी की शादी थी और पिछली बारात में हुई मारपीट से भयभीत राजू ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। जिसके चलते यह सुरक्षा इंतेज़ाम किये गए हैं।

"सवर्ण समाज दलित की बारात नहीं चढ़ने देता"
दरअसल, उत्तर प्रदेश के जनपद संभल निवासी एवं फरियादी राजू वाल्मिकी ने बताया कि गांव में सवर्ण समाज के लोग दलित बेटे या बेटी की बारात नहीं चढ़ने देते। यह परंपरा देश की आजादी के बाद भी खत्म नहीं हुई है। अब उसकी बेटी रवीना की बारात बदायूं जनपद से आ रही है, और वह चाहता है कि बारात गांव में घोड़े-बाजे के साथ निकले। लोहावई एक सवर्ण बाहुल्य गांव है और यहां ऊंची जाति के लोग कभी भी दलित परिवार की शादी धूमधाम से नहीं होने देते हैं।
राजू वाल्मीकि की बिटिया रबीना की 25 नवंबर की शाम बरात चढ़नी थी। 6 माह पूर्व हुई घटना से वाल्मीकि समाज में यह डर था कि कहीं इस बार भी ऐसी कोई घटना न हो जाए। राजू वाल्मीकि अपनी इस चिंता को लेकर वाल्मीकि समाज के नेताओं के पास गए तो उन्होंने उनकी मदद करते हुए पुलिस से सुरक्षा की मांग करने का सुझाव दिया। इसके बाद राजू वाल्मीकि और समज के नेताओ ने 19 नवंबर को एक लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी और बारात में सुरक्षा प्रदान करने की बात कही। राजू वाल्मीकि की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बारात में सुरक्षा का आश्वासन दे दिया।

जिस गली से चाहे, वहां से बारात निकाल सकते हैं
नतीजन शादी वाले दिन यानी 25 नवंबर को गांव की गलियों के चप्पे-चप्पे पर पूरे जनपद से 14 सब इंस्पेक्टर, एक स्पेक्टर तथा 44 महिला एवं पुरुष कांस्टेबलों को तैनात कर दिया। इसी के साथ लड़की पक्ष के राजू वाल्मीकि को बता दिया गया है कि सुविधा अनुसार वह किसी भी गली से बरात को निकाल सकते हैं, पुलिस उनके साथ पूरा सहयोग प्रदान करेगी। इसी के साथ लड़की पक्ष के घर पहुंचे वाल्मीकि समाज के नेताओं ने भी खैर खबर ली। साथ ही मौके पर पहुंचे गुन्नौर सीओ आलोक कुमार सिद्धू एवं जूनावई थाना प्रभारी ने लड़की पक्ष के घर पहुंच कर वाल्मीकि समाज के नेताओं एवं परिवार के लोगों से भी बात की।

झगड़ा न हो, इसलिए की पुलिस बल की मांग
यहां बताते चलें वाल्मीकि समाज के ही रमेश कुमार ने बताया कि आज से 6 माह पहले 5 मई को वाल्मीकि समाज के महेंद्र सिंह की बिटिया बबीता की बारात चढ़ने के दौरान खड़क बंशी बिरादरी के लोगों के साथ झगड़ा फसाद हो गया था। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा हमारी खेती की सिंचाई हेतु इन लोगों ने पानी तक बंद कर दिया। जिसके चलते हमारी सारी फसलें सूख कर बर्बाद हो गई। वही हम ने इसी डर के चलते राजू वाल्मीकि बेटी रवीना की शादी में झगड़ा फसाद न हो, इसके लिए पुलिस बल की मांग की है।
जानकारी अनुसार जूनावई थाना क्षेत्र का लोहामई गांव लगभग 3000 से अधिक आबादी में बसा हुआ है। जिसमें 1200 मत मुस्लिम, 600 मत खागी ,50 मत वाल्मीकि, 40 मत ब्राह्मण, 70 मत जाटव ,और 50 मत कोरी जाति के पढ़ते हैं।

पुलिस स्टाफ की तरफ से 11हजार रुपये का कन्यादान
वही मौके पर पहुंचे गुन्नौर सीओ आलोक कुमार सिद्धू ने जूनावई थाना प्रभारी पुष्कर मेहरा से स्थिति का जायजा लिया। इसको लेकर उन्होंने बताया के पूरे गांव में शांति व्यवस्था बनाए जाने हेतु गांव के प्रत्येक गली के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल को बैठा दिया गया है। वही लड़की पक्ष के लोगों को बता दिया गया है कि सहूलियत के अनुसार किसी भी गली से बरात को चढ़ाया जा सकता है। पुलिस उनके साथ रहेगी। इसी के साथ लड़की पक्ष के लोगों को कन्यादान के बतौर 11000 की धनराशि भी पुलिस स्टाफ की तरफ से दी गई है।












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