देवबंद पहुंचे पाकिस्तान के 5 सांसद, भारत के साथ रिश्तों पर कही दिल की बात
सहारनपुर। पड़ोसी देश पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद जहां इमरान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर के जरिये हिंदुस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, वहीं पाकिस्तान का विपक्ष भी दोनों देशों के बीच मधुर संबंध चाहता है। पाकिस्तानी संसद में विपक्ष के सदस्य मौलाना अता उर रहमान ने कहा कि हम तो दोनों देशों के बीच सन 1947 से पहले जैसे ताल्लुकात भी चाहते हैं।

सोमवार को पाकिस्तानी संसद के पांच सदस्य प्रतिनिधि मंडल के साथ देवबंद पहुंचे जमीयत उलेमा ए इस्लाम पाकिस्तान सूबा पखतून खेबर के उपाध्यक्ष एवं सांसद मौलाना अता उर रहमान पत्रकारों से बात कर रहे थे। पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के साथ पूर्व क्रिकेटर इमरान खान के हाथों में पाकिस्तान की बागडोर आने के बाद हिंदुस्तान व पाकिस्तान के रिश्तों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर बनाने बात हिंदुस्तान सरकार से पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने ही की है।

यह पूछे जाने पर कि विपक्ष के रूप में आप हिंदुस्तान से कैसे रिश्ते चाहते हैं पर उन्होंने दो टूक कहा कि हम तो सन 1947 से पहले जैसे रिश्ते भी चाहते हैं। मीडिया द्वारा दारुल उलूम देवबंद का नाम पाकिस्तान से जोड़े जाने पर मौलाना अता उर रहमान ने कहा कि दारुल उलूम मादरे इलमी है इसने हमारी इलमी तिशनगी (प्यास) को बुझाया है। सिर्फ हमारे पास तक ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में इलमे नबवी पहुंचाया है, इससे बढ़कर और कुछ नहीं है। सिर्फ दारुल उलूम देवबंद ही नहीं पूरी दुनिया में जहां भी दीनी और इलमी काम हो रहे हैं वहां दहशतगर्दी का तसव्वुर भी नहीं है। इस दौरान पाकिस्तानी संसद के सदस्य मौलाना अराद महमूद, मौलाना सलाहुद्दीन अय्यूबी, मौलाना अब्दुल वासे व मौलाना अब्दुल शकूर के अलावा मोहम्मद मदनी व मौलाना गय्यूर मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने किया दारुल उलूम का दौरा
देश में मुसलमानों की सबसे बड़ी जमात जमीयत उलेमा की स्थापना के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली में आयोजित हुए सेमिनार में शिरकत करने के लिए हिंदुस्तान आए पाकिस्तानी सांसदों के पांच सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को देवबंद आकर दारुल उलूम का दीदार किया। पाकिस्तानी सांसदों ने दारुल उलूम के अतिथिगृह में मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी से मुलाकात की। मोहतमिम ने पाकिस्तानी महमानों का खेरमकदम करते हुए यहां दी जाने वाली तालीम व तरबियत के बारे में जानकारी दी। इसके उपरांत पाकिस्तानी सांसदों ने दारुल उलूम की ऐतिहासिक लाईब्रेरी समेत अन्य इमारतों का भ्रमण किया और दारुल उलूम देवबंद आने पर खुशी का इजहार किया।
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