MP: पहनने को जूते नहीं थे, फिर भी बिटिया गोल्ड लाई, विभाग अवॉर्ड की राशि तक डकार गया!
सागर, 15 जुलाई। वो गरीबी और अभावों में पली/बढ़ी है, जब स्कूल में खेल में हिस्सा लिया तो पहनने को जूते तक नहीं थे, बावजूद इसके अथक मेहनत कर राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता में कूडो में गोल्ड मेडल जीतकर आई थी, इधर विभाग के अधिकारियों की लालफीताशाही कहें या असंवेदनशीलता वे उसके हक का अवॉर्ड का पैसा तक डकार गए। अधिकारी की एक कलम की चूक से वह दो साल से अवॉर्ड राशि पाने भटक रही है।

मप्र के सागर में भैंसा स्कूल में पढने वाली दिव्या अहिरवार ने विपरीत परिस्थतियों में पढ़ाई और प्रेक्टिस कर बतौर कूडो खिलाडी बेहतरीन प्रदर्शन कर साल 2019-2020 में राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। शासन के नियमानुसार उसे अवॉर्ड के तौर पर 21 हजार की राशि मिलना थी, लेकिन आदिमजाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने उसके पत्र में व्यक्तिगत रुप से शामिल होने वाली प्रतिभागी लिख दिया था। इनकी गलती से उसकी अवॉर्ड की राशि 21 हजार नहीं मिल सकी। उसे महज 4 हजार रुपए प्रदान किए गए। दिव्या को अपनी साथी खिलाडियों को मिली अवॉर्ड राशि से पता चला कि उसे 21 हजार मिलना थे तो उसने अधिकारियों से संपर्क किया तो बताया कि उसके पत्र में व्यक्तिगत रुप से शामिल होने वाली प्रतिभागी लिखा है, इस कारण उसे उक्त राशि नहीं मिल पाई।
अब जल्द मिलेगी दिव्या को अवॉर्ड की बकाया राशि
नेशनल खिलाडी के मामले में किरकिरी के बाद अब विभाग की नींद खुली है। आदिवासी विकास विभाग सागर के सहायक आयुक्त का कहना है कि स्थिति स्पष्ट हो गई है, जल्द ही दिव्या को बकाया राशि भी प्राप्त हो जाएगी। पूर्व में सहभागिता और मेडल जीतने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी, जिस कारण यह गफलत हुई है। जल्द ही दिव्या को राशि प्राप्त हो जाएगी। प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेज दिया गया है।












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