सागर के युवा ने दुबई में लिखा अंग्रेजी उपन्यास, सोशल मीडिया पर धूम
सागर। 2 जून
मप्र के सागर के छोटे से इलाके से निकलकर दुबई में बसे महज 30 साल के युवा का अंग्रेजी उपन्यास "द नाइट आउट" सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। सबसे खास बात उपन्यास युवाओं के ऐसे सवालों का जवाब देता है, जिन्हें समाज ने कभी सवाल ही नहीं समझा!

गोपालगंज झंडाचौक के शास्त्री परिवार का बेटा कार्तिकेय शास्त्री बीते कई सालों से दुबई में रियल एस्टेट बिजनेस से जुड़ा है। इन दिनों वह अपने नॉवेल "द नाइट आउट" को लेकर चर्चा में हैं। नॉवेल चार दोस्तों की कहानी है इसमें चारों अलग अलग परेशानियों से घिरे अपना स्ट्रेस रिलीज़ करने मिलते हैं, जहाँ एक रात उनके साथ कुछ ऐसा होता है कि चारों के मकसद ही बदल जाते हैं। नॉवेल का ट्रेलर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो काफी ट्रेंड कर रहा है।
नॉवेल का ऑनलाइन विमोचन बीते रोज 1 जून को हुआ। कार्तिकेय सागर के गोपालगंज स्थित झंडाचौक पर एक संयुक्त परिवार में पले बढ़े। परिवार में शुरू से ही साहित्यिक माहौल था। दादा गोंविन्द प्रसाद शास्त्री जाने माने पंडित रहे तो ताऊजी श्यामलम संस्था के माध्यम से साहित्य सेवा करते हैं। कार्तिकेय ने नोबल के विषय मे बताते हुए कहा कि इसे लिखने में उन्हें काफी वक्त लगा है। लिखने के पीछे की वजह उन्होंने अपना भावुक स्वभाव होना बताया। कार्तिक कहते हैं, कि उन्हें रिश्तों की अच्छी खासी समझ है लोग अक्सर खुद के ही इमोशंस को नहीं समझ पाते। जिसकी वजह से कई बार डिप्रेशन के कारण रिश्ते तो टूटते ही हैं लोग खुद का भी नुकसान कर बैठते हैं। ज़िंदगी का मूल उद्देश्य, समाज और लोगों के लिए हम कभी-कभी कुछ नहीं कर पाते और बेकार की बातों में नासमझी के चलते उलझे रहते हैं। यह नोबल इस तरह के सवालों का जवाब है जिन्हें अब तक लोगों ने सवाल ही नही माना है।
संस्कृत, हिंदी अब अंग्रेजी
अंग्रेजी उपन्यास लेखन के विषय में कार्तिक के पिता रमाकांत शास्त्री का कहना है कि पिताजी के समय संस्कृत का माहौल था। एक संस्कृत विद्यालय भी परिवार में संचालित होता है। हम लोगों के समय संस्कृत से हिंदी साहित्य की तरफ झुकाव बढ़ गया था। अब नई पीढ़ी अंग्रेजी की ओर बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय भाषा होने नाते देश के युवाओं के विचार विश्व को भी पढ़ने मिलेंगे।












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