Sagar: भैंस का बीमा लेने कोर्ट में छह साल तक लड़ी लड़ाई, कोर्ट ने यूआईआईसी कंपनी पर ठोका जुर्माना
भैंस का बीमा लेने के लिए सागर के एक किसान ने बीमा कंपनी को छह साल तक कोर्ट में घसीटा, आखिरकार किसान की जीत हुई और उपभोक्ता फोरम जिला सागर और राज्य उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को क्लेम देने के निर्देश दिए हैं।


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से फाइनेंस कराकर दो भैंसे खरीदी थी। भैंसों का 31 अगस्त 2016 को 50 हजार रुपए का बीमा कराया था। भैंसों के कानों पर बीमा कंपनी ने टैग लगाए गए थे। इसी दौरान एक भैंस जिसका टैग क्रमांक 01313 की भैंस की 7 सितंबर 2016 को दुर्घटना में मौत हो गई। किसान ने मामले की सूचना जैसीनगर थाना पुलिस को दी। पुलिस ने भैंस का पोस्टमार्टम कराया। किसान ने बीमा कंपनी को भी घटनाक्रम की सूचना दी थी। डॉक्टर की रिपोर्ट, भैंस के कान का टैग समेत अन्य दस्तावेजों के साथ किसान ने बीमा राशि के लिए क्लेम कंपनी में लगाया, लेकिन उन्होंने 9 फरवरी 2017 तक न तो कोई जवाब दिया और न ही बीमा की राशि दी। बाद में किसान पुरुषोत्तम कुर्मी ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा कार्यालय कटरा बाजार सागर के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद पेश किया।
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बीमा कंपनी का तर्क था कि नियमों का उल्लंघन हुआ, केस क्लेम निरस्त किया
अधिवक्ता पवन नन्होरिया ने बताया कि उपभोक्ता फोरम में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसान ने भैंस का टैग जमा नहीं कराया था जो अनिवार्य होता है। जिससे पशुधन बीमा की नो टैग नो क्लेम की शर्त का उल्लंघन हुआ है। इसलिए क्लेम निरस्त किया गया है। बीमा कंपनी के इस तर्क के जवाब में परिवादी के अधिवक्ता ने टैग जमा करने संबंधी दस्तावेज पेश किए। मामले में सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष टीआर उइके और सदस्य अनुभा वर्मा ने बीमा कंपनी को आदेश देते हुए भैंस के बीमा की राशि 50 हजार रुपए, सेवा में कमी के रूप में 8 हजार रुपए और 2 हजार रुपए परिवाद व्यय के किसानों को अदा करने के आदेश दिए। फोरम ने उक्त राशि एक माह में किसान को देने की बात कही है। जिसके बाद बीमा कंपनी राज्य उपभोक्ता फोरम में अपील करने पहुंची थी। राज्य उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने और दस्तावेज का परीक्षण करने के बाद जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को यथावत रखते हुए बीमा क्लेम की राशि प्रदान करने के आदेश दिए हैं।












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