Damoh: क्रिश्चियन बालिका गृह में यौन शोषण, राज्य बाल आयोग ने छापा मारा
दमोह के मिशनरी बाल भवन में एक नाबालिग से यौन शोषण का मामला सामने आया है। बाल आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए छापामार कार्रवाई की है। इस दौरान ईसाई मिशनरी का आधारशिला संस्थान ही अवैध रूप से संचालित मिला। यहां धर्मांतरण कराने का मामला भी सामने आया है।
दमोह के अजय लाल द्वारा संचालित मिशनरी कैंपस में एक नाबालिक बच्ची के यौन शोषण का मामला सामने आया है। जिसमें डी डेनियल नाम के कर्मचारी पर नाबालिक बच्ची के साथ शोषण करने की बात सामने आई है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक नाबालिग बच्ची को दत्तक के रूप में दक्षिण भारत के एक राज्य में गोद दे दिया गया था। बच्ची जब अपने माता-पिता के पास रह रही थी।

आयोग के सदस्यों के अनुसार तब डेनियल नाम के व्यक्ति के द्वारा उसे अश्लील मैसेज और व्हाट्सएप पर चैट की गई। जिसमें डेनियल द्वारा उसे वापस कैंपस में बुलाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। जब बच्ची के माता-पिता को इस बात की जानकारी लगी तो उन्होंने बच्ची से मामले के सम्बंध में पूछताछ की गई। इसमें प्रारंभिक तौर पर डेनियल के द्वारा बालिका गृह में रहते समय शोषण किए जाने की बात सामने आई। अभिभावक की शिकायत के बाद बाल आयोग के द्वारा महिला बाल विकास को पूरे मामले की जांच करने के लिए पत्र जारी किया गया, लेकिन महिला बाल विकास के द्वारा भी लगातार 20 दिनों तक उस पत्र को दबाकर रखा गया।
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राज्य आयोग ने बयान दर्ज करने मारा छापा, मिली बाइबिलें
मप्र बाल आयोग के दो सदस्यीय दल ने जिला प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस के साथ पहुंचकर आधारशिला कैंपस में संचालित बालिका गृह पर अचानक रेड कर दी। जहां सभी बच्चों के अलग-अलग कथन लिए गए। बालिकाओं के पास से सबकी अलग-अलग बाइबल पाई गई। जिसे आयोग की टीम अपने साथ सबूत के तौर पर जब्त कर लिया है। राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य निवेदिता शर्मा ने जब प्रथक प्रथक रूप से बालिकाओं से पूछताछ की। तो पता चला कि प्रत्येक आयु वर्ग के अनुसार अलग-अलग प्रकार की बाइबिल सभी को दी गई थी। अध्ययन अनिवार्य था, इसी प्रकार ईसाई धर्म से संबंधित साहित्य आयोग के द्वारा बच्चों के पास से बरामद किया गया है। बच्चों को धार्मिक शिक्षा देकर ईसाई धर्म में मतांतरण कराने का मामला पाया गया है। इधर बालगृह और बालिका गृह के पास संचालन की सक्षम मान्यता ही नहीं पाई गई है।












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