रीवा में दर्दनाक हादसा, नाग पंचमी की पूजा के लिए टैंक में उत्तरी रजक समाज की तीन सगी बहनों की डूबने से हुई मौत

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में नाग पंचमी पर एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें तीन सगी बहनें पानी में डूब के मर गई। तीनों बहनें शुक्रवार शाम को नाग पंचमी की पूजा के लिए गांव के टैंक में उतरी थी, इसी दौरान ये हादसा हो गया। ग्रामीणों ने तीनों शव को बाहर निकाला।

यह पूरा मामला रीवा के ताम्र गांव का बताया जा रहा है। नाग पंचमी पर कपड़े की गुड़िया बनाकर पूजा करने और उन्हें पानी में विसर्जित करने की गांव में परंपरा है। गांव के ही राजकुमार रजक की तीनों बेटियां सोनाली तन्वी और जानवी खेल-खेल में कपड़े की गुड़िया लेकर पानी भरे टैंक में उतर गई थी। गुड़िया विसर्जित करने के दौरान तीनों गहरी जगह में चली गई और पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।

Three sisters of North Rajak community died due to drowning in the tank for worship of Nag Panchami

रीवा में एक दिन पहले बांस गांव में नहर में डूबने से दो बच्चियों की मौत हो गई थी। इसके अलावा, 10 दिन पहले गढ़ में दीवार गिरने से चार बच्चों की जान चली गई थी।

राजकुमार रजक की छह बेटियां हैं। उनकी बड़ी बेटी निधि रजक ने बताया कि सोनाली चौथी कक्षा में पढ़ती थी, जबकि तन्वी और जाह्नवी दूसरी और तीसरी कक्षा में पढ़ती थीं। निधि ने कहा कि हर साल नाग पंचमी पर वे गुड़िया को पानी में बहाने जाती हैं और दादी भी उनके साथ रहती हैं। लेकिन इस बार तीनों बहनें बिना बताए घर से चली गईं।

गांव के महेश कुमार बुनकर ने बताया कि जब बच्चों को घर में नहीं पाया गया, तो उन्होंने भी उनकी खोज शुरू की। टैंक के पास पहुंचकर उन्होंने देखा कि किनारे पर पुतलियां, चुनरी और पूजा का सामान पड़ा था। उन्होंने तुरंत पानी में कूदकर तलाशी शुरू की। गहराई में जाकर उन्हें एक बच्ची के बाल मिले, जिसे पकड़कर बाहर निकाला। फिर से पानी में जाकर उन्होंने एक फ्रॉक भी पकड़ ली और उसे बाहर खींचा। तीसरी बच्ची भी थोड़ी देर बाद मिली, लेकिन दुख की बात यह थी कि तीनों की मौत हो चुकी थी।

Three sisters of North Rajak community died due to drowning in the tank for worship of Nag Panchami

परिजनों ने बताया पूरा हाल

बच्चियों की दादी गुड्डी रजक ने आंसुओं के साथ कहा, "रक्षा बंधन आने वाला है और घर में त्योहार की तैयारी चल रही थी। त्योहार के दिन तीन मौतें होती हैं क्या? बच्चियां जरा सी बीमार भी हो जाती थीं तो हम डर जाते थे कि कुछ न हो जाए। हमारे छह बेटियां हैं और हमने कभी भेदभाव नहीं किया। हमने उन्हें बेटों की तरह पाला। वे दिन भर मुझे दादी अम्मा कहकर बुलाती रहती थीं। अगर मां कभी थप्पड़ भी मार देतीं, तो तुरंत मेरे पास दौड़ आती थीं।"

बच्चियों की मां विनीता रजक सदमे में हैं। उन्होंने बताया, "रोज की तरह तीनों बेटियां शाम 4 बजे स्कूल से लौटकर घर आईं और खेल रही थीं। काफी देर तक उनकी कोई खबर नहीं मिली तो मैंने पूछा। फिर थोड़ी देर बाद पता चला कि बेटियां डूब गई हैं। अगर मुझे इस हादसे का जरा भी अंदाजा होता तो मैं उन्हें बाहर जाने ही नहीं देती। मैं उन्हें बचा नहीं पाई।"

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