Rekha Singh Entry As Lieutenant: शादी के 15 महीने बाद पति हो गए थे शहीद, अब सेना में लेफ्टिनेंट बनी पत्नी
दीपक सिंह से शादी से पहले रेखा सिंह शिक्षिका थीं। वो सिरमौर के जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाती थीं। पति की शहादत के बाद रेखा सिंह को मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से शिक्षाकर्मी वर्ग-दो पद पर नियुक्ति दी गई थी।

Recommended Video

Rekha Singh Entry As Lieutenant: रीवा जिले की शहीद पति के सपनों को पूरा करने के लिए रेखा सिंह भारतीय आर्मी में लेफ्टिनेंट बन गई है। 29 अप्रैल को रेखा सिंह समेत 40 महिलाएं पासिंग परेड में शामिल होंगी। लद्दाख के गलवान घाटी में चीनी सेना से हुई लड़ाई में लांस नायक दीपक सिंह शहीद हो गए थे। दीपक सिंह को शहीद होने के बाद वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।

लांस नायक दीपक सिंह शहादत से परिवार के साथ ही पत्नी रेखा पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा था। शादी को महज 15 माह ही हुए थे कि रेखा सिंह ने अपना सुहाग खो दिया था। लांस नायक दीपक सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।

पति की शहादत गम और गुस्से से रेखा सिंह में देशभक्ति का ऐसा जज्बा जगा की टीचर की नौकरी छोड़ कर भारतीय आर्मी में अफसर बनाने का सपना सजो लिया।

रेखा सिंह के लिए यह रास्ता आसान नहीं थी। नोएडा जाकर सेना में भर्ती होने के लिए एडमिशन परीक्षा की तैयारी की और ट्रेनिंग प्राप्त किया। रेखा ने फिजिकल प्रशिक्षण ली बावजूद इसके प्रथम प्रयास में सफलता हाथ नहीं लगी। रेखा ने हिम्मत नहीं हारी सेना में जाने की पूरी तैयारी करती रही। रेखा ने दूसरा प्रयास किया जिसमे मेहनत रंग लाई और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर सिलेक्शन हो गया है। रेखा एक वर्ष की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी हैं। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर प्रशिक्षण 28 मई से चेन्नई में प्रारंभ हुआ था। 29 अप्रैल को रेखा पासिंग परेड़ में शामिल होकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर सेवाएं देंगी।
शादी से पहले रेखा सिंह जवाहर नवोदय विद्यालय सिरमौर में शिक्षिका के रूप में नौकरी कर रही थीं। उच्च शिक्षा प्राप्त रेखा के मन में टीचर बनकर समाज की सेवा करने के सपने थे। विवाह के बाद उनके पति शहीद दीपक सिंह ने ऑफिसर बनने के लिए प्रेरित किया था। रेखा सिंह ने पति की शहादत के बाद उनके सपने को पूरा करने का संकल्प किया। इसमें ससुराल और मायके के परिवारजनों ने पूरा सपोर्ट मिला।
रेखा सिंह को एमपी सरकार की ओर से शिक्षाकर्मी वर्ग दो पद पर पदस्थ की गई थी। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से अपना टीचर दायित्व निभाया। लेकिन उनके मन में सेना में जाने का जज्बा लगातार बना रहा। रेखा सिंह ने जिला सैनिक कल्याण कार्यालय से इस विषय में चर्चा की। रेखा सिंह को रीवा जिला प्रशासन तथा जिला सैनिक कल्याण कार्यालय ने सेना में चयन के संबंध में उचित गाइडलाइन और संवेदनशीलता से सहयोग दिया।
रेखा सिंह ने विपरीत कठिनाइयों में हिम्मत से काम लेकर और कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण से कठिनाइयों का सामना करते हुए अप्रतिम उपलब्धि हासिल की। उन्होंने पति दीपक सिंह के उन्हें ऑफिसर बनाने के सपने को पूरा किया।












Click it and Unblock the Notifications