MP Election: विंध्य की 9 सीटों पर प्रदेशभर की नजर, विधानसभा अध्यक्ष से लेकर पूर्व CM के बेटे और साले मैदान में
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में विंध्य क्षेत्र हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस क्षेत्र की 30 विधानसभा सीटों में से 9 सिम ऐसी हैं जिन पर प्रदेश भर की नजर है यहां से विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम जहां अपने ही भतीजे से चुनाव में मुकाबला कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से दो नेता पुत्रों की साख भी दाव पर लगी हुई है।
इसके साथ ही दल बदल करने के लिए चर्चित रहने वाले फेमस विधायक नारायण त्रिपाठी भी इसी क्षेत्र से है। सफेद शेर के नाम से पहचाने जाने वाले दिवंगत श्रीनिवास तिवारी के पौत्र दल- बदल कर भाजपा उम्मीदवार बने हैं। इन सभी सीटों पर प्रदेश भर की नजर है कि आखिर उनके क्षेत्र में इस बार क्या होगा।

विंध्य में पिछले चुनाव में कांग्रेस को जबर्दस्त हार का सामना करना पड़ा था तभी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था जहां की 30 सीटों में से कांग्रेस मात्र चार सीटें ही जीत पाई थी। हालांकि उपचुनाव में कांग्रेस ने दो सीटें जीतकर यह आंकड़ा क्षेत्र पहुंचा लिया।
बता दे विंध्य क्षेत्र में पिछले चुनाव में कांग्रेस को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा था। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र कुमार सिंह जैसे दिग्गज यहां से चुनाव हार गए थे। इनके हारने के चलते यहां से कमलेश्वर पटेल तेजी से कांग्रेस में आगे बढ़े और अभी सीडब्ल्यूसी तक में जगह बनाने में सफल रहे। आपको बताते हैं। अब आपको उन 9 सीटों के बारे में बताते हैं जिनकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।
सीधी-विंध्य क्षेत्र की सीधी विधानसभा सीट पर भाजपा ने सांसद रीती पाठक को उम्मीदवार बनाया है। वह अजय सिंह को सीधी लोकसभा से चुनाव हराकर संसद पहुंची थी।
सतना सीट- यहां से भाजपा ने सांसद गणेश सिंह को उम्मीदवार बनाया है यह सीट कांग्रेस के पास है।
देवतालाब- विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम यहां से उम्मीदवार है वह पिछला चुनाव का मंत्र से जीते थे इस बार उनकी जीत रोकने के लिए कांग्रेस ने उनके भतीजे पद्मेश गौतम को उतारा है।
रीवा- ब्राह्मण वर्ग में पकड़ रखने वाले राजेंद्र शुक्ला चुनाव से और पहले मंत्री बनाए गए थे। वह बड़े अंतर से चुनाव जीत रहे है।
त्योंथर- इस विधानसभा सीट इस सीट से विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पुत्र सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया जो कांग्रेस से राजनीति करके अभी हाल में ही भाजपा में शामिल हुए है।
चुरहट विधानसभा सीट- मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह इस सीट से पिछला चुनाव हार गए थे। इससे पहले में दो बार लगातार लोकसभा का चुनाव भी हार चुके हैं। इसके चलते उनकी सीट भी चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। चुरहट से भाजपा के मौजूदा विधायक सत्येंद्र तिवारी इस बार भी कांग्रेस प्रत्याशी अजय सिंह को टक्कर देंगे।
अमरपाटन- विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और डॉ राजेंद्र कुमार सिंह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के साले होते हैं। अजय सिंह के मामा है। वे पिछला चुनाव हार गए थे। उन्हें मंत्री रामखेलावन पटेल ने पिछले चुनाव में हरा दिया था। इस बार भी इन दोनों के बीच मुकाबला है।
सिंहावल- विंध्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले इंद्रजीत पटेल के बेटे कमलेश्वर पटेल से लगातार इस सीट से जीते आ रहे हैं। इस क्षेत्र के ओबीसी में उनकी अपनी अलग पहचान है। कांग्रेस की युवा पीढ़ी जो आगे बढ़ाई जा रही है उसमें कमलेश पर पटेल भी शामिल है।
मैहर- यह सीट कांग्रेस और भाजपा की उम्मीदवार की जगह नारायण त्रिपाठी को लेकर चर्चाओं का विषय बनी हुई है। बार-बार दल बदल के लिए प्रदेश में मशहूर विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस बार अपनी पार्टी बना ली है। उनकी पार्टी का नाम विंध्य जनता पार्टी है। वह इसी पार्टी से मैहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।












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