Lok Sabha Election: टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर भाजपा के चेहरों को लेकर शुरू हुए कयास...जानिए इनमें से कौन ?
LokSabha Election: राजस्थान में 25 लोकसभा सीटों पर छिड़े सियासी संग्राम में भाजपा ने 15 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया लेकिन सचिन पायलट की हॉट सीट माने जानी वाले टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट पर अब तक प्रत्याशी का चयन नहीं हुआ है।
राजस्थान में क्लीन स्वीप के साथ हैट्रिक का दम भर रही भाजपा की गुत्थी टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर उलझी हुई नजर आ रही है।

टोंक-सवाईमाधोपुर राजस्थान की एक बड़ी लोकसभा सीट मानी जाती है। साथ ही टोंक विधानसभा से सचिन पायलट के विधायक होने के चलते यह सीट भाजपा हॉट सीट मानकर चल रही है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र में टोंक,सवाईमाधोपुर दो जिलों से मिलकर यह सीट है। इन तीनों जिलों की आठ विधानसभा सीट पर भाजपा-कांग्रेस में हमेशा ही कांटे की टक्कर रही है।
कांग्रेस ने पहले मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीना के भाई और देवली-उनियारा के दूसरी बार के विधायक हरीशचंद्र मीना को प्रत्याशी बना दिया।
हरीशचंद्र मीना ने अपने चुनावी प्रचार का बिगुल भी फूंक दिया है। लेकिन भाजपा के नेता अभी भी असमंजस में बने हुए है।
सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया अपने टिकट को लेकर कंफ्यूज नजर आ रहे है। हालांकि टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट पर तीन बड़े नामों की चर्चा चल रही है।
इन नामों में सबसे पहले स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की बेटी सुनिता बैंसला, भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर और जयपुर ग्रेटर महापौर सौम्या गुर्जर के नामों की चर्चा है।
माना जा रहा है कि इस बार टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा सीट पर भाजपा महिला कार्ड खेल सकती है। हालांकि अब तक राजस्थान में घोषित 15 प्रत्याशियों में मात्र कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई ज्योति मिर्धा के नाम को छोड़ी किसी दूसरी भाजपा महिला नेता का बतौर प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हुई है।
टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट दो जिलों को मिलाकर बनाई गई है। भौगोलिक स्थिति की बात करें तो इन दो जिलों की सीमाएं उत्तर में जयपुर, पश्चिम में अजमेर, दक्षिण में कोटा और पूर्व में मध्य प्रदेश की सीमा लगती है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में यहां बीजेपी का दबदबा है।
हालांकि, विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। टोंक सवाई माधोपुर में गुर्जर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मुस्लिमों के वोट निर्णायक भूमिका है। किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार तय करने में अहम रोल निभाते हैं।
टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा में कितनी विधानसभा सीट हैं?
जान लें कि टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट के दायरे में टोंक और सवाई माधोपुर की 4-4 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें सवाई माधोपुर जिले की गंगापुर, बामनवास, सवाई माधोपुर और खंडार विधानसभा शामिल हैं। इसके अलावा टोंक जिले की मालपुरा, निवाई, टोंक और देवली उनियारा विधानसभा भी सवाई माधोपुर लोकसभा में हैं।
टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट की 8 विधानसभा सीटों में से 4 बीजेपी और 4 कांग्रेस के पास हैं। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव बीजेपी को यहां करीब 52 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस दूसरी नंबर पर थी और उसे सिर्फ 43 फीसदी वोट ही मिल पाए थे।
गौरतलब है कि राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस का आमने-सामने का मुकाबला है। हालांकि, बीजेपी ने अभी टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट के लिए अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार हरिशचंद्र मीणा हैं। यहां के मौजूदा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया हैं। पिछले चुनाव में यहां बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कांग्रेस के नमो नारायण को बड़े अंतर से हराया था। सुखबीर सिंह जौनपुरिया को 6,41,561 वोट मिले थे और नमोनारायण ने 5,30,968 वोट पाए थेष
टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट की डेमोग्राफी की बात करें तो यहां 85 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू मतदाता हैं। टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर मुस्लिम 12.5 प्रतिशत, सिख 0.05 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 20.5 फीसदी, अनुसूचित जनजाति 16.9 प्रतिशत, गुज्जर 12.51 फीसदी जैन 0.8 फीसदी और बौद्ध 0.01 प्रतिशत हैं। ईसाई यहां 0.06 प्रतिशत हैं।
2019 के चुनाव में कितनी हुई थी वोटिंग?
पिछले लोकसभा चुनाव में टोंक सवाई माधोपुर में 1219601 वोटरों ने वोटिंग की थी। बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने 1,10,593 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि, इस बार अभी तक बीजेपी की तरफ से सुखबीर सिंह जौनपुरिया के नाम का ऐलान नहीं किया गया है। सुखबीर सिंह जौनपुरिया का टिकट कटने के कयास लगाए जा रहे हैं। सुखबीर सिंह जौनपुरिया इससे पहले हरियाणा के सोहना से विधायक भी रह चुके हैं।
अब चर्चा में चल रहे प्रत्याशियों के साथ स्थानीय नेताओं को इंतजार है कि भाजपा आलाकमान एक बार फिर से हैट्रिक के लिए सुखबीर सिंह जौनापुरिया पर भरोसा जताता है या फिर दौड़ में रहे नए नामों में से किसी एक पर मुहर लग पाती है।












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