Ravindra Bhati: 'दिल्ली पुलिस कांस्टेबल' की वजह से टूटा रविंद्र भाटी का बाड़मेर सांसद बनने का सपना
Ravindra Bhati vs Ummedaram Beniwal Barmer: 'इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर, शहर में तेरी जीत से ज्यादा चर्चे मेरी हार के हैं...' ये लाइनें रविंद्र सिंह भाटी पर सटीक बैठती हैं। राजस्थान के बाड़मेर को देशभर की सुर्खियों में ला देने वाले भाटी लोकसभा चुनाव 2024 हार गए।
बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल जीते हैं। बाड़मेर के मौजूदा सांसद व केंद्रीय मंत्री भाजपा के कैलाश चौधरी तीसरे नंबर पर रहे हैं। राजस्थान की हॉट सीट बाड़मेर में उम्मेदराम बेनीवाल की जीत से ज्यादा चर्चा तो रविंद्र भाटी की हार हो रही है।

बाड़मेर में किसको कितने वोट मिले?
उम्मेदाराम बेनीवाल-704676
रविंद्र सिंह भाटी-586500
कैलाश चौधरी-286733
जीत का अंतर- 118176
दिल्ली कांस्टेबल से संसद तक का सफर
रविंद्र सिंह भाटी को हराने वाले उम्मेदाराम बेनीवाल दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल रह चुके हैं। साल 1995 में बेनीवाल ने दिल्ली पुलिस ज्वाइन की थी। करीब 10 साल सेवाएं दी और साल 2005 में संसद मार्ग दिल्ली के पुलिस थाने में रहते नौकरी छोड़ दी।

नौकरी छोड़ने के बाद बेनीवाल राजनीति में आए। हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से जुड़े और बाड़मेर की बायतु सीट से साल 2018 और 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा। दोनों बार ही हारे। 2024 में आरएलपी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।
रविंद्र सिंह भाटी की हार की वजह
4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आए। बाड़मेर से चुनाव हारने के बाद रविन्द्र भाटी बोले कि 'जनता का फैसला मान्य है। जनता के बीच रहूंगा और उनके काम करूंगा । मायूस होने की जरूरत नहीं है। यह अंतिम जीत या अंतिम हार नहीं है।
राजनीति के जानकार कहते हैं कि रविंद्र सिंह भाटी की बाड़मेर से हार की कई वजह हैं। उनका चुनाव मैदान में निर्दलीय उतरना, जातीय समीकरण, लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं समेत कई कारण शामिल है। यह भी कहा जा रहा है कि रविंद्र सिंह भाटी को शिव का विधायक रहते हुए पहले पांच साल तक जनता के काम करने चाहिए थे। फिर लोकसभा चुनाव लड़ते तो शायद जीत जाते।












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