Prateek Yadav Postmortem: शरीर पर 6 चोटें-दिमाग में ब्लीडिंग! छाती-हाथ पर इतने गहरे घाव, विसरा क्यों सुरक्षित?
Prateek Yadav Postmortem Report: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई व मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव (38) का 13 मई 2026 को सुबह अचानक निधन हो गया। इस खबर से उत्तर प्रदेश की यादव सियासत में शोक की लहर दौड गई। सुबह सिविल अस्पताल में ब्रॉट डेड लाए गए प्रतीक का KGMU में पोस्टमॉर्टम पूरा हो चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, मौत की मुख्य वजह फेफड़ों में अत्यधिक रक्त प्रवाह अवरोध के कारण हृदय-श्वसन संबंधी विफलता बताई गई है। यानी फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में बड़े थक्के (Blood Clot) के कारण हृदय और श्वसन प्रणाली का अचानक फेल होना। दिल के दाहिने हिस्से में जमा हुआ खून मिला जबकि बायां हिस्सा खाली था।

रिपोर्ट में शरीर पर 6 चोटों (Ante-Mortem Injuries) का जिक्र है, जिनमें से कुछ 1-2 दिन पुरानी बताई गई हैं। हार्ट और पल्मोनरी मटेरियल हिस्टोपैथोलॉजी के लिए फॉर्मालिन में सुरक्षित रखा गया है, जबकि विसरा को सुरक्षित रखकर पुलिस को सौंपा गया। आखिर क्यों विसरा सुरक्षित रखा गया? किन वजहों में ऐसा किया जाता है? आइए विस्तार से जानते हैं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या-क्या लिखा हैघ्
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला?
KGMU में चार डॉक्टरों की टीम (डॉ. मौसमी सिंह, डॉ. हिमांशु पटेल, डॉ. फातिमा आदि) और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम हुआ। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई।
मौत की अहम वजह 'Cardiorespiratory Collapse due to Massive Pulmonary Thromboembolism' बताई गई। फेफड़ों में खून का बड़ा थक्का बनने से ब्लड फ्लो रुक गया, जिससे हार्ट और लंग्स दोनों फेल हो गए। थक्का संभवतः निचले हिस्से (Legs) से ट्रैवल करके ऊपर पहुंचा, जिससे आर्टरीज और लंग्स में इंफेक्शन फैला। जांच में दो चीजों को सुरक्षित रखा गया....
संरक्षित सैंपल्स:
- Whole Heart & Pulmonary Thromboembolic Material फॉर्मालिन में हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए।
- विसरा (अंदरूनी अंगों के सैंपल्स) केमिकल एनालिसिस के लिए, नंबर 752/2026।
ये कदम स्टैंडर्ड मेडिको-लीगल प्रक्रिया हैं, खासकर संदिग्ध या अचानक मौत में।
शरीर पर चोटें: 6 निशान, कितने गहरे और कितने पुराने?
रिपोर्ट में कुल 6 Ante-Mortem चोटें (मौत से पहले की) दर्ज हैं, जिनके नीचे Ecchymosis (अंदरूनी रक्तस्राव) भी मिला:
- छाती के दाहिने हिस्से पर 14x7 सेमी चोट
- दाहिनी बांह के पीछे 19x12 सेमी कंट्यूजन
- दाहिने फोरआर्म पर 24x6 सेमी लंबी चोट
- दाहिने हाथ पर 6x4 सेमी निशान
- दाहिने हाथ के पीछे 12x6 सेमी चोट
- बाएं हाथ की कलाई पर 3x2 सेमी चोट
कितने पुराने?
- चोट 1, 2 और 4: लगभग 2 दिन पुरानी
- चोट 5 और 6: करीब 1 दिन पुरानी
ये चोटें मौत का सीधा कारण नहीं बताई गईं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि कोई गंभीर बाहरी चोट या फाउल प्ले के निशान नहीं मिले।
पैरों में सूजन और शरीर पर पुराने निशान
रिपोर्ट के अनुसार,
- दोनों पैरों में सूजन (Oedema) थी
- पेट, जांघ और घुटनों के पास पुराने हील्ड स्कार मिले
- दोनों पैरों पर कई Scratch Marks भी दर्ज किए गए
विसरा और हार्ट क्यों सुरक्षित रखा गया?
- पूरा हार्ट
- थ्रोम्बोएम्बोलिक मटेरियल
- पेट, आंत, लीवर, किडनी, खून समेत 7 सैंपल सुरक्षित किए हैं।
दिमाग में भी मिला ब्लीडिंग का संकेत
पोस्टमार्टम के पेज-4 में 'Brain' सेक्शन में लिखा गया है कि Sub Arachnoid Haemorrhage present over both right & left temporo-parietal region। यानी दिमाग की बाहरी परत के नीचे दोनों तरफ ब्लीडिंग के संकेत मिले। हालांकि खोपड़ी (Skull) में कोई फ्रैक्चर नहीं मिला और गर्दन, हायॉइड बोन तथा ट्रेकिया सामान्य पाए गए।
प्रतीक को क्या क्या थी दिक्कतें?
प्रतीक लंबे समय से लंग्स की समस्या से जूझ रहे थे। हाल ही में Medanta Hospital में Pulmonary Embolism का इलाज चल रहा था। कुछ महीने पहले लेफ्ट पैर की सर्जरी भी हुई थी। Hypertension और अन्य मुद्दे भी थे। मेडिसिन विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया कि हमें प्रतीक यादव के निधन की खबर मिली है, और इस नुकसान से हम बहुत दुखी हैं। वह हमारे पुराने मरीज थे। मैं काफी समय से उनका इलाज कर रही थी, उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं थीं। कुछ ही दिन पहले, उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज़्म होने के बाद यहां भर्ती किया गया था, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें खून का थक्का (Blood clot) धमनियों में पहुंचकर वहीं फंस जाता है।
आगे बताया कि उनके फेफड़ों में रुकावट के कारण, उनके दिल के काम करने पर बुरा असर पड़ा। कुछ दिन पहले ही वह साँस लेने में दिक्कत और सांस से जुड़ी अन्य समस्याओं की शिकायत लेकर यहाँ आए थे, और उसी समय उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज़्म का पता चला था। पल्मोनरी एम्बोलिज़्म की स्थिति, अपने आप में ही, बहुत गंभीर होती है और इसमें काफी ज़्यादा खतरा होता है। वह पहले से ही खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे थे। उन्हें अपनी मेडिकल समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी थी और वह अपनी ब्लड प्रेशर की दवाएं नियमित रूप से लेते थे।
विसरा सुरक्षित रखना: क्यों जरूरी है?
विसरा सुरक्षित रखना पोस्टमॉर्टम की स्टैंडर्ड प्रक्रिया है। इसका मतलब:
- केमिकल एनालिसिस: जहर, ड्रग्स, अल्कोहल या टॉक्सिन की जांच।
- हिस्टोपैथोलॉजी: माइक्रोस्कोपिक स्तर पर अंगों की जांच, थक्के का स्रोत, इंफेक्शन, कोई छिपी बीमारी।
कब रखा जाता है?
- मौत का कारण तुरंत स्पष्ट न हो
- अचानक/संदिग्ध मौत
- चोटें मौजूद हों लेकिन मौत का सीधा लिंक न हो
- पुलिस जांच चल रही हो
- परिवार या सार्वजनिक संदेह हो
प्रतीक मामले में पुलिस ने फोन कब्जे में लिया है, घर की जांच की जा रही है। विसरा रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग सकते हैं। प्रतीक की हालिया सर्जरी और लंग इश्यू इसे ट्रिगर कर सकते थे।
पुलिस जांच और आगे क्या?
- फोन, घर की तलाशी
- परिवार और स्टाफ से पूछताछ
- विसरा + हिस्टो रिपोर्ट का इंतजार
- अंतिम संस्कार: 14 मई को 11 बजे बैकुंठ धाम













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