Ranthambore VIDEO : रणथम्भौर नेशनल पार्क में आया नन्हा मेहमान, शावक के साथ दिखी बाघिन T-39
सवाई माधोपुर, 5 मार्च। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथम्भौर नेशनल पार्क में लंबे अरसे से बाघिन टी39 मां बनी है। इससे वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। बाघिन अपने शावकों के साथ नजर आई है। रणथंभौर नेशनल पार्क में नए मेहमान को देखा गया है। यह मेहमान और कोई नहीं बल्कि बाघिन टी 39 का शावक है।
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एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हुई दिखाई दी
बाघिन अपने बच्चे के जन्म के उपरांत उसे सुरक्षित स्थान पर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हुई दिखाई दी है। यह नजारा रणथंभोर नेशनल पार्क के जोन नंबर एक में देखा गया। उस वक्त कुछ पर्यटक जंगल सफारी के लिए निकले हुए थे। तब अचानक उनके सामने बाघिन अपने शावक के साथ आई। पर्यटकों ने इसे कैमरे में कैद कर लिया।

वन्यजीव प्रेमी अभिभूत हो उठे
शावक के जन्म के बाद डीएफओ महेंद्र शर्मा ने क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है और लगातार बाघिन और उसके शावक की मॉनिटरिंग की जा रही है। बाघिन के मुंह में शावक को ले जाते हुए नजारे को देख वन्यजीव प्रेमी अभिभूत हो उठे।

पार्क में बाघों की संख्या भी बढ़ गई
पार्क में बाघों की संख्या भी बढ़ गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग बाघिन व शावक को सुरक्षित रख पाएगा या नहीं। क्योंकि पूर्व में भी कई ऐसी घटनाएं यहां देखने को मिली हैं, जिसमें बाघिन और उसके सावक अचानक गायब हो गए थे। पहले बाघिन टी13 अपने शावकों को लेकर खंडार क्षेत्र में लेकर विचरण करने गई थी। वो आज तक नहीं लौटी।

रणथंभौर नेशनल पार्क कब स्थापित हुआ?
रणथंभौर उद्यान को भारत सरकार ने 1955 में 'सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य' के तौर पर स्थापित किया था। बाद में देशभर में बाघों की घटती संख्या से चिंतित होकर सरकार ने इसे 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर अभयारण्य' घोषित किया और बाघों के संरक्षण की कवायद शुरू की।
रणथंबोर अभ्यारण में कौन-कौन से जानवर पाए जाते हैं?
यहाँ पाये जाने वाले अन्य जीव जन्तुओं में मुख्यतया सुस्त भालू, भारतीय तेंदुआ, सांभर, रीसस मकाक, नीलगाय,दक्षिणी मैदानी धूसर लंगूर, जंगली सूअर, धारीदार लकड़बग्घा, मगरमच्छ, चीतल इनके अलावा सरीसृप और कई प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती है।

रणथंबोर में कितने टाइगर है?
रणथम्भौर बाघ परियोजना के अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में रणथम्भौर में लगभग 65-70 बाघ हैं। इनमें 24 नर व 24 मादा और 17 शावक शामिल है। रणथम्भौर में बाघों के लगातार बढ़ते कुनबे के चलते यहां बाघों के लिए टेरेटरी का दायरा कम पड़ता जा रहा है।












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