Tiger T-140 : राजस्थान में इंसानों के खून का प्यासा हुआ 'लैला का लाडला', अब तक 3 लोगों की ली जान
करौली। रणथंभौर और सरिस्का सरीखे बाघ अभयारण्य वाले राजस्थान में इन दिनों बाघ-टी 104 ने आतंक मचा रखा है। गुरुवार को इस बाघ ने करौली जिले के कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में सिमिर बाग गांव के 26 वर्षीय युवक पिंटू माली का शिकार कर लिया है। इससे पहले भी दो लोगों की जान ले चुका है।

मां व पत्नी ने किया बचाने का प्रयास
बता दें कि गुरुवार सुबह करीब सवा आठ बजे पिंटू अपने घर पर चारपाई पर बैठा था। तभी बाघ पीछे से हमला कर उसे गर्दन से दबोच कर खेत में ले गया। पिंटू की मौके पर ही मौत हो गई। पिंटू की मां व पत्नी ने उसे बचाना चाहा तो टाइगर ने उन पर हमला करने का प्रयास किया। फिर पिंटू की मां ने दरांती फेंकी तब बाघ शव को छोड़कर भाग गया।

वनकर्मियों को बनाया बंधक
इधर, वन विभाग के कर्मचारियों के कथित रूप से देरी से आाने और बाघ को देख मौके से भाग जाने पर गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के गार्ड और कैमरामैन को बंधक बना लिया। बाद में पुलिस ने दोनों वनकर्मियों को छुड़वाया। पुलिस ने मौके से शव उठाकर स्थानीय सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टक के बाद परिजनों को सौंप दिया।

रणथम्भौर का है Tiger T-104
बता दें कि बाघ टी-104 सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर अभयारण्य का है, जो काफी समय से अपनी टेरेटरी बना रहा है। वन विभाग का आठ सदस्य दल बाघ की ट्रेकिंग कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन दिन से बाघ का गांव में मूवमेंट पता होने पर भी ग्रामीणों का सचेत नहीं किया।

वर्ष 2019 में बाघ टी-104 के शिकार
1. 12 सितम्बर 2019 को करौली के सिमिर बाग गांव में 26 वर्षीय पिंटू की जान ली।
2. 30 जुलाई 2019 को कैलादेवी के दुर्गेशी घाटा में रूप सिंह का शिकार।
3. 02 फरवरी 2019 को कुंडेरा के पाड़ली गांव में मुन्नी योगी को हमला कर मारा।

मृतक के परिजनों को 5 लाख की मदद
करौली में बाघ हमले में युवक की जान चली जाने के मामले में उप वन संरक्षक श्रवण रेडडी का कहना है कि बाघ अभी भी घटना वाले क्षेत्र में ही है। ट्रेंक्यूलाइज करने का प्रयास किय जा रहा है। मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

जानिए कौन बाघ टी-104
बाघ टी 104 रणथंभौर अभयारण की बाघिन 'लैला' का लाडला है, जो पिछले काफी समय से रणथंभौर अभयारण को छोड़ चुका है। अब रहने के लिए नया ठिकाना तलाश रहा है। इसकी उम्र करीब तीन साल है। वनकर्मियों द्वारा 4 बार ट्रेंकुलाइज किया जा चुका है। यह सवाईमाधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों के 10 जोनों में घूमते देखा गया है।












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