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17वां जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 के दूसरे दिन वक्ताओं ने क्या दिया मंत्र?

Jaipur Literature Festival 2024: जयपुर में 17वें लिटरेचर फेस्टिवल 2024 का आज दूसरा दिन नए विचारों और शानदार वक्ताओं के नाम रहा ।

दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक शो जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 के दूसरे दिन की शुरुआत होटल क्लार्क्स आमेर, सर्द सुबह में कई रोचक और उत्तेजक सत्रों के साथ हुई|

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फेस्टिवल का दूसरा दिन राजनीति, जीवनीकार, संगीत, स्टाइल, अध्यात्म और रचनात्मकता के नाम रहा। दिन की शुरुआत फिल स्कार्फ के दिल छू लेने संगीत के साथ हुई। सेक्सोफोन पर जैज़ और पारंपरिक राग की जुगलबंदी प्रस्तुत की। उनका साथ प्रियांक कृष्णा और अनूप बनर्जी ने दिया।

यह रहे प्रमुख खास सत्र
सत्र 'ट्रस्ट' में पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक हर्नान डियाज़ ने अपने उपन्यास और लेखकीय सफ़र पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "मैं एक टेस्टीमोनियल लेखक नहीं हूं... मेरा लेखन मेरे निजी अनुभवों पर आधारित नहीं है।

इसलिए पन्नों पर मुझे ढूँढना बेमानी है, लेकिन... मैं उस तरह का लेखक हूं जो सोचता है कि साहित्य अधिक साहित्य से बनता है, और मैं परंपरा का सामना करके लिखता हूं।

उससे पीछे नहीं... मेरा ज्यादातर काम इन कठोर बातों से जुड़ा है और फिर उनमें किसी प्रकार का पुरातात्विक हस्तक्षेप उसे और प्रेरित करता है।

सुबह के एक सत्र 'यशोधरा एंड वीमेन ऑफ़ द संघ' में श्याम सेल्वादुरै और वेनेसा आर. सेसों ने अपनी किताबों के माध्यम से इतिहास के सबसे अदृश्य व्यक्तित्व यशोधरा पर चर्चा की।

सत्र संचालन लेखिका और कवयित्री अरुंधति सुब्रमनियम ने करते हुए श्याम सेल्वादुरै के साथ लेखन पर बात करते हुए कहा, "लेखन शुरू करने से ज्यादा जरूरी होता है, उस पर टिके रहना। इसके लिए आपके कथ्य में रोचकता और जिज्ञासा होनी चाहिए। यशोधरा अपने आपमें सब कुछ हैं। ।

एक दिलचस्प सत्र, 'द मेमोइरिस्ट्स' में वक्ताओं, मणिशंकर अय्यर और गुरुचरण दास ने संस्मरण लिखने की प्रक्रिया से अवगत कराया। अय्यर ने उन क्षणों को याद किया जिनका उन्होंने लिखते समय वास्तव में आनंद लिया था, "मैंने हमेशा लिखने का आनंद लिया है। मुझे कभी पता नहीं चला कि कैसे रुकना है।

'गुलज़ार साहब' सत्र में यतीन्द्र मिश्र की नई किताब के माध्यम से गुलज़ार साहब के जीवन और समय पर चर्चा हुई। यह किताब पिछले दो दशकों में गुलज़ार साहब और यतीन्द्र मिश्र के संवाद पर आधारित है। इसका अंग्रेजी अनुवाद किया है सत्या सरन ने। गुलज़ार साहब के प्रशंसकों से वेन्यु ठसाठस था, जो गुलज़ार साहब की एक झलक देखने को बेताब थे। गुलज़ार साहब ने भी उन्हें निराश न करते हुए, उनसे दिल खोलकर बात की।

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