Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

1993 Serial Bomb Blasts: सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी अब करेंगे सुप्रीम अपील,टाडा कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास

1993 Serial Bomb Blasts: देश में 1993 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के मास्टर माइंड आतंकी अब्दुल करमी टुंडा बरी,दो आंतकियों को आजीवन कारावास की सजा।

अजमेर की टाडा कोर्ट ने दो आरोपियों इरफान और हमीरूद्दीन को उम्र कैद सजा सुनाए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी शुरू हो गई है।

the-accused-in-the-1993-serial-bomb-blasts-were-today-sentenced-to-life-imprisonment-by-the-tada-cod

अजमेर की टाडा कोर्ट ने आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को सीबीआई के आरोपो को नकारते हुए बरी कर दिया। वहीं अन्य दो आरोपी इरफान और हमीरुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुनाई है।

क्या है पूरा सीरियल बम ब्लास्ट का मामला

बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी पर आतंकी अब्दुल करीम टुंडा ने 6 दिसंबर 1993 को देश के अलग-अलग शहरों की ट्रेनों में सिलसिले से बम धमाके किए थे।

बम धमाके करने के बाद आतंकी टुंडा लंबे समय तक फरार रहा और वह इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देता गया लेकिन अगस्त 2013 में पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर लिया था।

उसके बाद से आतंकी टुंडा का केस अजमेर की टाडा कोर्ट में चल रहा था, पिछले साल 24 सितंबर 2023 से आतंकी टुंडा अजमेर की सेंट्रल जेल में बंद है।

आज अजमेर की टाडा कोर्ट ने सुनाया यह फैसला

आज अजमेर की टाडा कोर्ट के जज महावीर प्रसाद गुप्ता ने सैकड़ो गवाहों, सबूतों, लंबी तारीखों और बहस के बाद आतंकी अब्दुल करीम टुंडा पर आज अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया।

अब्दुल करीम टुंडा के एडवोकेट शफकत सुल्तानी ने बताया की सीबीआई कोर्ट के द्वारा लगाए गए आरोप कोर्ट ने नहीं माने और आज उन्हें बरी कर दिया। वहीं अन्य दो आरोपी इरफान और हमीमुद्दीन को न्यायालय ने दोषी माना है और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है ।

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद कोटा, लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, सूरत और मुंबई की ट्रेनों में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे।

20 साल पहले 28 फरवरी 2004 को टाडा कोर्ट ने ही मामले में 16 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने चार आरोपियों को बरी कर शेष की सजा बहाल रखी थी, जो जयपुर जेल में बंद है।

6 दिसंबर 1993 से मामला कोर्ट में चल रहा है। अब्दुल करीम टुंडा, हमीदुद्दीन व इरफान अहमद के खिलाफ आज फैसला आया है। जिसमे अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया गया है।

इन पर 5 से 6 शहरों में आंध्र प्रदेश, यूपी, गुजरात राजस्थान और महाराष्ट्र में विस्फोट का आरोप है। वहीं अब्दुल करीम टुंडा पर यह आरोप था कि वह मामले का मास्टरमाइंड है।

शातिर दिमाग का है अब्दुल करीम टुंडा
अब्दुल करीम टुंडा, यह वही टुंडा है जिसने एक ही दिन में अलग अलग शहरों में सीरियल बम ब्लास्ट करके पूरे देश को दहला दिया था।

6 दिसंबर 1993 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की पहली बरसी पर टुंडा की प्लानिंग के मुताबिक लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, सूरत और मुम्बई में एक साथ ट्रेनों में बम धमाके किए गए थे।

कुछ सालों बाद रोहतक और हैदराबाद में भी बम धमाके किए थे। देश में हुई अन्य कई आतंकी घटनाओं में भी टुंडा शामिल रहा।

शातिर दिमाग का टुंडा कई सालों तक पुलिस को गच्चा देता रहा लेकिन अगस्त 2013 में उसे नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया गया।

80 वर्षीय आतंकी टुंडा को हाल ही में अजमेर की टाडा कोर्ट में दो अन्य आतंकियों के साथ पेश किया गया था जिसके पास से वह अजमेर की सेंट्रल जेल में बंद है।

वही आतंकी टुंडा की तबीयत खराब होने की शिकायत के चलते उसको कई बार इलाज के लिए जेल से अस्पताल भी लाया जाता था ।

बम धमाकों का मास्टरमाइंड है आतंकी टुंडा
1993 से लेकर 1998 तक देश के कई शहरों में हुए बम धमाकों का मास्टर माइंड अब्दुल करीम टुंडा ही था। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में हुई कई आतंकी घटनाओं में टुंडा का हाथ था।

टुंडा आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का प्रमुख भी रहा है। उसने धार्मिक कट्टरता के चलते आतंकियों की नई फौज तैयार कर ली थी। टुंडा के आतंकी संगठन की फंडिंग विदेशों से होती थी। केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पता चला कि टुंडा का नेटवर्क कई देशों तक फैला हुआ था।

देश में हुए कुल 40 बम धमाकों में अब्दुल करीम टुंडा का हाथ बताया गया था । देश के अलग अलग राज्यों में 33 मुकदमें टुंडा के खिलाफ दर्ज हैं। अगस्त 2013 में उसे गिरफ्तार किया गया। देश में तीन शहरों अजमेर, श्रीनगर और मुम्बई में स्पेशल टाडा कोर्ट हैं जहां विशेष मामलों की सुनवाई होती है। वर्ष 1993 में देश के पांच शहरों में एक साथ हुए बम ब्लास्ट के मामले की सुनवाई अजमेर की टाडा कोर्ट में चल रही थी, जिसमे आज उसे बरी कर दिया है, अभी फिलहाल टुंडा अजमेर की सेंट्रल जेल में बंद है।

कौन है आतंकी टुंडा

टुंडा का जन्म 1943 में पुरानी दिल्ली के छत्तालाल मियां में हुआ। पिता का लोहे की ढलाई काम था। टुंडा की हरकतों को देखकर पिता ने पुरानी दिल्ली छोड़ने का मन बनाया और गाजियाबाद जिले के पिलखुआ में बस गए। यहां टुंडा ने भाइयों के साथ बढ़ई का काम किया।

उसकी शादी जरीना नामक महिला से हुई। टुंडा की गतिविधियां संदिग्ध थीं। वह कई-कई दिनों तक घर से गायब रहने लगा।

वर्ष 1981 में वह जरीना को छोड़कर लापता हो गया। जब घर लौटा तो उसके साथ दूसरी पत्नी अहमदाबाद निवासी मुमताज भी थी।

उसी दौरान टुंडा के पाकिस्तान में आईएसआई से ट्रेनिंग लेने की बात भी सामने आई। टुंडा के खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में 21 और गाजियाबाद में 13 मामलों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में कई मामले दर्ज हैं। इसके खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1956 में चोरी का दर्ज हुआ था। उस समय इसकी उम्र कम थी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+